पश्चिम बंगाल चुनाव रुझान: भाजपा 194 सीटों पर आगे, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में टीएमसी को झटका

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पश्चिम बंगाल चुनाव रुझान: भाजपा 194 सीटों पर आगे, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में टीएमसी को झटका

सारांश

पश्चिम बंगाल के चुनावी रुझान ममता बनर्जी की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं — भाजपा 194 सीटों पर आगे और मुस्लिम बहुल इलाकों में भी अप्रत्याशित बढ़त। टीएमसी का वह वोट बैंक, जिसे अभेद्य माना जाता था, इस बार दरकता दिख रहा है।

मुख्य बातें

शुरुआती रुझानों में भाजपा 293 में से 194 सीटों पर आगे, टीएमसी मात्र 92 सीटों पर।
बहुमत के लिए जरूरी 147 सीटों का आँकड़ा भाजपा आसानी से पार करती दिख रही है।
मुर्शिदाबाद में भाजपा के गौरी शंकर घोष टीएमसी से 26,237 वोटों से आगे।
मोथाबाड़ी में भाजपा के निबार्ण घोष 1,750 वोटों से आगे; कांग्रेस के सायम चौधरी को 12,196 वोट मिले — वोट बँटवारे का स्पष्ट संकेत।
SIR प्रक्रिया , हिंदू मतदाताओं की बढ़ी भागीदारी और कांग्रेस की उपस्थिति को टीएमसी के नुकसान का कारण माना जा रहा है।
2021 में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थीं, भाजपा 77 पर थी — ये रुझान नाटकीय उलटफेर का संकेत।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने 4 मई 2026 को राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर संकेत दिया है। रुझानों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) 293 में से 194 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) मात्र 92 सीटों पर सिमटती दिख रही है। बहुमत के लिए आवश्यक 147 सीटों का आँकड़ा भाजपा आसानी से पार करती नज़र आ रही है।

मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा की अप्रत्याशित बढ़त

सबसे चर्चित पहलू यह है कि जिन मुस्लिम बहुल इलाकों को टीएमसी अपना अभेद्य वोट बैंक मानती रही है, वहाँ भाजपा ने अप्रत्याशित बढ़त बनाई है। जांगीपारा में भाजपा उम्मीदवार प्रसन्नजीत बाग 27,081 वोट पाकर 5,879 वोटों से आगे चल रहे हैं। मुर्शिदाबाद में भाजपा के गौरी शंकर घोष 59,558 वोट पाकर टीएमसी की शाओनी सिंह रॉय से 26,237 वोटों की बड़ी बढ़त पर हैं।

सबसे चौंकाने वाले रुझान मोथाबाड़ी सीट से आए हैं, जहाँ भाजपा के निबार्ण घोष 34,752 वोट पाकर करीब 1,750 वोटों से आगे हैं। टीएमसी के उम्मीदवार इस्लाम नजरूल इस अंतर से पीछे चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस के सायम चौधरी को 12,196 वोट मिले हैं — जो स्पष्ट करता है कि विपक्षी वोटों का बँटवारा हुआ है।

टीएमसी की मुश्किलें: एक से अधिक मोर्चों पर दबाव

रुझानों के पीछे कई कारण कथित तौर पर ज़िम्मेदार माने जा रहे हैं। टीएमसी को पहले से आशंका थी कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के चलते मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में कटौती से नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, इस चुनाव में हिंदू मतदाताओं की बड़े पैमाने पर भागीदारी भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है।

गौरतलब है कि कांग्रेस की कुछ सीटों पर सक्रिय उपस्थिति ने भी टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित किया है, जिससे मुकाबला और जटिल हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी पहले से ही केंद्र सरकार के साथ कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति में थीं।

राज्य की राजनीतिक तस्वीर

राज्य की कुल 293 विधानसभा सीटों में से अभी कुछ सीटों के रुझान आने बाकी हैं। भाजपा यदि इन रुझानों को अंतिम परिणामों में बदल लेती है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थीं और भाजपा 77 सीटों पर सिमटी थी — उस तुलना में ये रुझान नाटकीय उलटफेर का संकेत देते हैं।

क्या होगा आगे

अंतिम परिणाम आने के बाद राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि भाजपा बहुमत हासिल करती है, तो यह पूर्वी भारत में पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक जीत होगी। ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य और टीएमसी की रणनीति पर गहरे सवाल उठने तय हैं। रुझान बताते हैं कि मुस्लिम वोट बैंक में आई दरार इस चुनाव का सबसे निर्णायक 'एक्स फैक्टर' साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्षी वोटों का बँटवारा और हिंदू मतदाताओं का एकजुट होना, तीनों एक साथ काम करते दिखे। असली सवाल यह है कि क्या टीएमसी इस हार से सीख लेकर खुद को पुनर्गठित कर पाएगी, या यह बंगाल में एक लंबे राजनीतिक युग का अंत है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा कितनी सीटों पर आगे है?
शुरुआती रुझानों के अनुसार भाजपा 293 में से 194 सीटों पर आगे चल रही है, जो बहुमत के लिए जरूरी 147 सीटों से काफी अधिक है। टीएमसी मात्र 92 सीटों पर सिमटी दिख रही है।
मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा की बढ़त क्यों चौंकाने वाली है?
टीएमसी मुस्लिम वोट बैंक को अपना मजबूत आधार मानती रही है, लेकिन इस बार मुर्शिदाबाद और मोथाबाड़ी जैसी मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। यह टीएमसी की पारंपरिक रणनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
ममता बनर्जी और टीएमसी के नुकसान के क्या कारण बताए जा रहे हैं?
कथित तौर पर SIR प्रक्रिया के चलते मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में कटौती, हिंदू मतदाताओं की बड़े पैमाने पर भागीदारी और कांग्रेस द्वारा टीएमसी के वोट बैंक को प्रभावित करना — ये तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
2021 के चुनाव की तुलना में 2026 के रुझान कितने अलग हैं?
2021 में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थीं और भाजपा 77 सीटों पर थी। 2026 के रुझानों में यह स्थिति पूरी तरह पलट गई है, जो बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक उलटफेर का संकेत है।
मोथाबाड़ी सीट के रुझान क्यों खास हैं?
मोथाबाड़ी में भाजपा के निबार्ण घोष 34,752 वोट पाकर 1,750 वोटों से आगे हैं, जबकि टीएमसी ने यहाँ मुस्लिम उम्मीदवार इस्लाम नजरूल को उतारा था। कांग्रेस के सायम चौधरी को 12,196 वोट मिले, जो वोट बँटवारे को स्पष्ट करता है।
राष्ट्र प्रेस
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