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ममता बनर्जी का बड़ा दांव: TMC की सभी समितियाँ और फ्रंटल संगठन तत्काल भंग, होगा पुनर्गठन

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ममता बनर्जी का बड़ा दांव: TMC की सभी समितियाँ और फ्रंटल संगठन तत्काल भंग, होगा पुनर्गठन

सारांश

पश्चिम बंगाल में 15 साल पुरानी सत्ता पर पकड़ ढीली होते देख ममता बनर्जी ने बड़ा दांव खेला है — TMC की सभी राज्य समितियाँ और फ्रंटल संगठन तत्काल भंग। पृष्ठभूमि में निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी का 59 विधायकों के समर्थन का दावा और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर खुली बगावत।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC ने पश्चिम बंगाल की सभी समितियाँ और सभी फ्रंटल संगठन तत्काल प्रभाव से भंग किए।
निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने 59 विधायकों के समर्थन पत्र के साथ खुद के गुट को मुख्य विपक्ष बताया।
ममता की बुलाई पिछली बैठक से 60 विधायक नदारद रहे थे, जिससे टूट की अटकलें तेज़ हुईं।
सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निलंबित किया गया।
ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी पर ‘कॉर्पोरेट शैली’ और I-PAC पर अति-निर्भरता का आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल में 15 साल से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत और टूट की आशंकाओं के बीच 3 जून को एक बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय के तहत राज्य में पार्टी की सभी समितियाँ और सभी फ्रंटल संगठन तत्काल प्रभाव से भंग कर दिए गए हैं।

क्या है पूरा फैसला

TMC ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ‘सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियाँ, साथ ही इसके सभी फ्रंटल संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग कर दिए जाएँगे।’

पार्टी ने आगे कहा कि अब हर स्तर पर आत्मनिरीक्षण, प्रदर्शन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का व्यापक अभ्यास होगा। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर मूल निकाय और सभी फ्रंटल संगठनों की संरचना का पुनर्गठन कर ‘उचित समय पर’ घोषणा की जाएगी।

बगावत की पृष्ठभूमि

यह कदम ऐसे समय आया है जब TMC के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुँचे और उन्होंने 59 विधायकों के समर्थन पत्र होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि उनका गुट ही अब राज्य का मुख्य विपक्षी दल है, जबकि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार गुट कथित तौर पर अल्पमत में आ चुका है।

गौरतलब है कि हाल ही में जब ममता बनर्जी ने TMC विधायकों की बैठक बुलाई थी, तब 60 विधायकों ने उससे दूरी बना ली थी। तभी से पार्टी में टूट के कयास तेज़ हो गए थे। इसी कड़ी में सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निलंबित किया गया था।

अभिषेक बनर्जी पर सीधा निशाना

निलंबन के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने सांसद अभिषेक बनर्जी की केंद्रीय सुरक्षा बलों की माँग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘वह किस तरह के जननेता हैं। पार्टी की करारी हार के बाद वह 26 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले। अब वह अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की माँग कर रहे हैं। पहले तो कहते थे कि जनता उनकी रक्षा के लिए मौजूद है — फिर अब उन्हें सुरक्षा बलों की ज़रूरत क्यों?’

ऋतब्रत ने यह भी आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी पार्टी को ‘कॉर्पोरेट शैली’ में चला रहे हैं और TMC पूरी तरह चुनाव रणनीति संगठन इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) पर निर्भर होकर काम कर रही है।

आगे क्या

पार्टी का कहना है कि वह ‘नए जोश और उद्देश्य’ के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने को प्रतिबद्ध है। अब निगाहें इस पर हैं कि भंग ढाँचे की जगह नई संरचना कब और किस स्वरूप में सामने आती है, और बागी विधायकों का गुट विधानसभा में औपचारिक रूप से क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लक्षण ज़्यादा है। 60 विधायकों का बैठक से नदारद रहना और एक निष्कासित विधायक का 59 समर्थन पत्र लहराना बताता है कि TMC का संकट सतह से कहीं गहरा है — यह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली के बीच पीढ़ीगत खींचतान का सार्वजनिक विस्फोट है। ‘पुनर्गठन’ शब्द हर उस पार्टी का पसंदीदा कवच रहा है जो अंदरूनी असंतोष को संगठनात्मक भाषा में ढालना चाहती है। असली परीक्षा यह होगी कि नया ढाँचा बागी आवाज़ों को जगह देता है या उन्हें और हाशिये पर धकेलता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने TMC की समितियाँ क्यों भंग कीं?
पार्टी के अनुसार यह फैसला आत्मनिरीक्षण, प्रदर्शन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन के व्यापक अभ्यास के लिए लिया गया है। यह कदम तब आया है जब निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने 59 विधायकों के समर्थन का दावा कर TMC में बगावत के संकेत दिए।
ऋतब्रत बनर्जी का 59 विधायकों वाला दावा क्या है?
ऋतब्रत बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुँचकर दावा किया कि उनके पास 59 विधायकों के समर्थन पत्र हैं और उनका गुट ही राज्य का मुख्य विपक्षी दल है। उनके मुताबिक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार गुट कथित तौर पर अब अल्पमत में है।
TMC में फेरबदल का अगला कदम क्या होगा?
पार्टी ने कहा है कि आत्मनिरीक्षण और मूल्यांकन के निष्कर्षों के आधार पर मूल निकाय और सभी फ्रंटल संगठनों की संरचना का पुनर्गठन किया जाएगा। नई संरचना की घोषणा ‘उचित समय पर’ की जाएगी।
अभिषेक बनर्जी पर क्या आरोप लगे हैं?
ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया है कि अभिषेक बनर्जी पार्टी को कॉर्पोरेट शैली में चला रहे हैं और TMC पूरी तरह इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) पर निर्भर है। उन्होंने अभिषेक की केंद्रीय सुरक्षा बलों की माँग पर भी सवाल उठाए।
क्या TMC टूटने के कगार पर है?
पार्टी की पिछली विधायक बैठक से 60 विधायकों की अनुपस्थिति और निष्कासित नेताओं के सार्वजनिक दावों ने टूट की अटकलों को बल दिया है। हालाँकि TMC नेतृत्व ने इसे ‘पुनर्गठन’ बताकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है।
राष्ट्र प्रेस
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