ममता बनर्जी का बड़ा दांव: TMC की सभी समितियाँ और फ्रंटल संगठन तत्काल भंग, होगा पुनर्गठन
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में 15 साल से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत और टूट की आशंकाओं के बीच 3 जून को एक बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय के तहत राज्य में पार्टी की सभी समितियाँ और सभी फ्रंटल संगठन तत्काल प्रभाव से भंग कर दिए गए हैं।
क्या है पूरा फैसला
TMC ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ‘सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियाँ, साथ ही इसके सभी फ्रंटल संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग कर दिए जाएँगे।’
पार्टी ने आगे कहा कि अब हर स्तर पर आत्मनिरीक्षण, प्रदर्शन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का व्यापक अभ्यास होगा। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर मूल निकाय और सभी फ्रंटल संगठनों की संरचना का पुनर्गठन कर ‘उचित समय पर’ घोषणा की जाएगी।
बगावत की पृष्ठभूमि
यह कदम ऐसे समय आया है जब TMC के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुँचे और उन्होंने 59 विधायकों के समर्थन पत्र होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि उनका गुट ही अब राज्य का मुख्य विपक्षी दल है, जबकि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार गुट कथित तौर पर अल्पमत में आ चुका है।
गौरतलब है कि हाल ही में जब ममता बनर्जी ने TMC विधायकों की बैठक बुलाई थी, तब 60 विधायकों ने उससे दूरी बना ली थी। तभी से पार्टी में टूट के कयास तेज़ हो गए थे। इसी कड़ी में सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निलंबित किया गया था।
अभिषेक बनर्जी पर सीधा निशाना
निलंबन के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने सांसद अभिषेक बनर्जी की केंद्रीय सुरक्षा बलों की माँग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘वह किस तरह के जननेता हैं। पार्टी की करारी हार के बाद वह 26 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले। अब वह अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की माँग कर रहे हैं। पहले तो कहते थे कि जनता उनकी रक्षा के लिए मौजूद है — फिर अब उन्हें सुरक्षा बलों की ज़रूरत क्यों?’
ऋतब्रत ने यह भी आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी पार्टी को ‘कॉर्पोरेट शैली’ में चला रहे हैं और TMC पूरी तरह चुनाव रणनीति संगठन इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) पर निर्भर होकर काम कर रही है।
आगे क्या
पार्टी का कहना है कि वह ‘नए जोश और उद्देश्य’ के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने को प्रतिबद्ध है। अब निगाहें इस पर हैं कि भंग ढाँचे की जगह नई संरचना कब और किस स्वरूप में सामने आती है, और बागी विधायकों का गुट विधानसभा में औपचारिक रूप से क्या रुख अपनाता है।