ममता बनर्जी को चुकानी होगी 15 साल के कार्यकाल की कीमत: अमित मालवीय का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 3 जून को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 2011 से 2026 तक के अपने 15 वर्षीय कार्यकाल के दौरान कथित गलत कार्यों की और बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब TMC विधायक दल में बड़ी फूट सामने आई है।
मालवीय का सीधा हमला
BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने यह टिप्पणी TMC के भीतर चल रहे विघटन के बीच की, जो बुधवार सुबह पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी विधायक दल के भीतर एक नए गुट के गठन के साथ और स्पष्ट हो गई। इस नए गुट में पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 58 शामिल बताए गए हैं, जिनका नेतृत्व TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी कर रहे हैं।
एक्स पर तीखी पोस्ट
मालवीय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे प्रहार कर देश की प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रही थीं, लेकिन हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की जनता ने न केवल उनकी पार्टी को नकार दिया, बल्कि अब उनके अपने विधायकों ने भी बगावत का बिगुल फूँक दिया है।
मालवीय ने अपने बयान का समापन आने वाले दिनों में ममता के लिए और अधिक मुश्किलों की भविष्यवाणी करते हुए किया। उन्होंने लिखा, “और यह तो बस शुरुआत है। ममता बनर्जी को अपने हाथों पर लगे खून का हिसाब देना होगा।”
TMC का जवाबी कदम: सभी समितियाँ भंग
विधानसभा में नए गुट के गठन की घोषणा के तुरंत बाद TMC के मूल गुट ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठा दोहराते हुए राज्य की सभी आंतरिक समितियों को भंग करने का बड़ा फ़ैसला किया। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी बयान में पश्चिम बंगाल में पार्टी की सभी आंतरिक समितियों के साथ-साथ सहयोगी संगठनों के पैनलों को भी भंग करने की घोषणा की गई।
राजनीतिक मायने
गौरतलब है कि TMC के लिए यह झटका हाल के विधानसभा चुनावी पराजय के तुरंत बाद आया है, जिससे पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। आलोचकों का कहना है कि एक ही दिन में 58 विधायकों का अलग गुट बनाना और शीर्ष नेतृत्व द्वारा सभी समितियाँ भंग करना — दोनों घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहराते संकट का संकेत हैं।
आगे क्या
अब निगाहें इस पर हैं कि क्या ऋतब्रता बनर्जी का नेतृत्व वाला गुट औपचारिक रूप से अलग दल के रूप में मान्यता माँगेगा, और क्या ममता-अभिषेक खेमा पुनर्गठन के ज़रिए स्थिति सँभाल पाएगा।