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ममता बनर्जी को चुकानी होगी 15 साल के कार्यकाल की कीमत: अमित मालवीय का तीखा हमला

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ममता बनर्जी को चुकानी होगी 15 साल के कार्यकाल की कीमत: अमित मालवीय का तीखा हमला

सारांश

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल — TMC के 80 में से 58 विधायकों ने ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बनाया, और ममता-अभिषेक खेमे ने जवाब में राज्य की सभी आंतरिक समितियाँ भंग कर दीं। BJP के अमित मालवीय बोले — “और यह तो बस शुरुआत है।”

मुख्य बातें

BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के 2011-2026 के 15 वर्षीय कार्यकाल पर तीखा हमला बोला।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 80 में से 58 विधायकों ने अलग गुट बनाया।
नए गुट का नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी कर रहे हैं।
जवाबी कदम में TMC ने राज्य की सभी आंतरिक समितियाँ और सहयोगी संगठनों के पैनल भंग किए।
मूल गुट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठा दोहराई।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 3 जून को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 2011 से 2026 तक के अपने 15 वर्षीय कार्यकाल के दौरान कथित गलत कार्यों की और बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब TMC विधायक दल में बड़ी फूट सामने आई है।

मालवीय का सीधा हमला

BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने यह टिप्पणी TMC के भीतर चल रहे विघटन के बीच की, जो बुधवार सुबह पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी विधायक दल के भीतर एक नए गुट के गठन के साथ और स्पष्ट हो गई। इस नए गुट में पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 58 शामिल बताए गए हैं, जिनका नेतृत्व TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी कर रहे हैं।

एक्स पर तीखी पोस्ट

मालवीय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे प्रहार कर देश की प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रही थीं, लेकिन हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की जनता ने न केवल उनकी पार्टी को नकार दिया, बल्कि अब उनके अपने विधायकों ने भी बगावत का बिगुल फूँक दिया है।

मालवीय ने अपने बयान का समापन आने वाले दिनों में ममता के लिए और अधिक मुश्किलों की भविष्यवाणी करते हुए किया। उन्होंने लिखा, “और यह तो बस शुरुआत है। ममता बनर्जी को अपने हाथों पर लगे खून का हिसाब देना होगा।”

TMC का जवाबी कदम: सभी समितियाँ भंग

विधानसभा में नए गुट के गठन की घोषणा के तुरंत बाद TMC के मूल गुट ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठा दोहराते हुए राज्य की सभी आंतरिक समितियों को भंग करने का बड़ा फ़ैसला किया। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी बयान में पश्चिम बंगाल में पार्टी की सभी आंतरिक समितियों के साथ-साथ सहयोगी संगठनों के पैनलों को भी भंग करने की घोषणा की गई।

राजनीतिक मायने

गौरतलब है कि TMC के लिए यह झटका हाल के विधानसभा चुनावी पराजय के तुरंत बाद आया है, जिससे पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। आलोचकों का कहना है कि एक ही दिन में 58 विधायकों का अलग गुट बनाना और शीर्ष नेतृत्व द्वारा सभी समितियाँ भंग करना — दोनों घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहराते संकट का संकेत हैं।

आगे क्या

अब निगाहें इस पर हैं कि क्या ऋतब्रता बनर्जी का नेतृत्व वाला गुट औपचारिक रूप से अलग दल के रूप में मान्यता माँगेगा, और क्या ममता-अभिषेक खेमा पुनर्गठन के ज़रिए स्थिति सँभाल पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संरचनात्मक भूचाल है — एक ही पार्टी के 80 में से 58 विधायकों का खुली बगावत करना भारत के क्षेत्रीय दलों के इतिहास में दुर्लभ है। ममता बनर्जी की राजनीति लंबे समय तक व्यक्तित्व-केंद्रित रही, और यही अब उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बन कर उभरी है। सभी समितियों को एक झटके में भंग करना संगठनात्मक नियंत्रण बचाने की हताश कोशिश दिखता है, समाधान नहीं। असली सवाल यह है कि अभिषेक बनर्जी का उत्तराधिकार-मॉडल अब विधायी संख्याबल के बिना कितना टिकाऊ रह पाएगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित मालवीय ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए हैं?
BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के सदस्यों ने 2011 से 2026 तक के 15 वर्षीय शासन के दौरान जो कथित गलत कार्य किए, उनकी राजनीतिक कीमत अब चुकानी होगी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि “यह तो बस शुरुआत है”।
तृणमूल कांग्रेस में नया गुट किसने बनाया है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 80 में से 58 विधायकों ने मिलकर एक नया गुट बनाया है। इस गुट का नेतृत्व पार्टी से पहले निष्कासित किए जा चुके विधायक ऋतब्रता बनर्जी कर रहे हैं।
ममता बनर्जी खेमे ने इस बगावत पर क्या प्रतिक्रिया दी?
नए गुट के गठन की घोषणा के तुरंत बाद TMC के मूल गुट ने पश्चिम बंगाल में पार्टी की सभी आंतरिक समितियाँ और सहयोगी संगठनों के पैनल भंग करने का ऐलान कर दिया। मूल गुट ने ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति निष्ठा दोहराई है।
यह घटनाक्रम TMC के लिए क्यों मायने रखता है?
यह पार्टी के 15 वर्षीय शासन के अंत और हाल के विधानसभा चुनाव में हार के बाद आया सबसे बड़ा संगठनात्मक संकट है। बहुमत विधायकों के अलग गुट में चले जाने से ममता बनर्जी का राज्य की राजनीति में पकड़ कमज़ोर होने का संकेत मिलता है।
राष्ट्र प्रेस
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