TMC बागी गुट ने मेट्रोपॉलिटन भवन पर जमाया कब्जा, 2027 तक लीज एग्रीमेंट साइन
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी विधायक दल ने 30 जुलाई 2026 को कोलकाता के मेट्रोपॉलिटन भवन स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर आधिकारिक रूप से कब्जा कर लिया। पार्टी से निष्कासित और अब पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले इस गुट ने बिल्डिंग मालिक के साथ 2027 तक का शुरुआती लीज एग्रीमेंट साइन कर लिया है।
मुख्य घटनाक्रम
हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की भारी हार के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी कर रहे हैं, जबकि दूसरा गुट रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में है, जिसे 'बागी लेकिन बहुमत वाला' गुट कहा जा रहा है। मेट्रोपॉलिटन भवन पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों के बीच पिछले महीने से खींचतान जारी थी।
ममता गुट का पीछे हटना
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने बिल्डिंग मालिक के साथ अपना एग्रीमेंट खत्म करने का निर्णय लिया। यह गुट फिलहाल दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास से अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रहा है। इस निर्णय के तुरंत बाद बागी गुट ने मौके का फायदा उठाते हुए बिल्डिंग मालिक के साथ नया लीज एग्रीमेंट कर लिया।
बागी गुट की आगे की योजना
बताया जा रहा है कि बागी गुट के विधायक नियमित रूप से इस कार्यालय में आएंगे और वहाँ से संगठनात्मक गतिविधियाँ चलाएंगे। एक रोस्टर तैयार किए जाने की योजना है, जिसके आधार पर इस गुट के विधायक और नेता बारी-बारी से प्रतिदिन कार्यालय संभालेंगे। नए गुट की नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक की तारीख अगले दो दिनों में तय किए जाने की संभावना है।
राजनीतिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के भीतर सत्ता-संघर्ष अपने चरम पर है। मेट्रोपॉलिटन भवन पर नियंत्रण महज एक भवन विवाद नहीं है — यह पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे, विरासत और जनमानस में वैधता की लड़ाई है। गौरतलब है कि रितब्रत बनर्जी अब विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका में हैं, जो उनके गुट को संस्थागत वैधता प्रदान करता है।
आगे क्या होगा
नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद बागी गुट के संगठनात्मक ढाँचे की दिशा और स्पष्ट होगी। दोनों गुटों के बीच कानूनी और राजनीतिक टकराव आने वाले हफ्तों में और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।