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टीएमसी बागी विधायकों की कमेटी बेमानी, ममता के साथ 90% कार्यकर्ता: सौगत रॉय

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टीएमसी बागी विधायकों की कमेटी बेमानी, ममता के साथ 90% कार्यकर्ता: सौगत रॉय

सारांश

तृणमूल कांग्रेस में बड़ी दरार — बागी विधायकों ने ममता को चेयरपर्सन पद से हटाया, अभिषेक बनर्जी को निलंबित किया और चुनाव आयोग को पत्र लिखा। सांसद सौगत रॉय ने इसे 'सर्कस' बताते हुए कहा कि 90% कार्यकर्ता ममता के साथ हैं और बागी गुट BJP-वित्तपोषित है।

मुख्य बातें

बागी TMC विधायकों ने 23 जून 2026 को न्यू टाउन, कोलकाता के नोवोटेल होटल में बैठक कर ममता बनर्जी को पार्टी चेयरपर्सन पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया।
हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को बागी गुट का नया चेयरपर्सन घोषित किया गया; पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी को निलंबित किया गया।
बागी गुट ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर TMC के चुनाव चिह्न पर दावा किया।
TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा — पार्टी के लगभग 90 फीसदी कार्यकर्ता ममता बनर्जी के साथ हैं।
सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि बागी गुट को BJP से फंडिंग मिल रही है।
BJP बजट में 1 लाख नौकरियों में 33 फीसदी महिला आरक्षण की प्रशंसा, लेकिन 30 फीसदी अल्पसंख्यक बजट कटौती की आलोचना।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 23 जून 2026 को स्पष्ट किया कि पार्टी के बागी विधायकों द्वारा गठित कमेटी की कोई राजनीतिक वैधता नहीं है और ममता बनर्जी के साथ पार्टी के लगभग 90 फीसदी कार्यकर्ता खड़े हैं। यह बयान उस दिन आया जब बागी गुट ने न्यू टाउन के नोवोटेल होटल में बैठक कर ममता को TMC चेयरपर्सन पद से हटाने और हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन नियुक्त करने का ऐलान किया।

बागी गुट का घटनाक्रम

बागी विधायकों ने सोमवार को हुई बैठक में न केवल ममता बनर्जी को पार्टी की चेयरपर्सन पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया, बल्कि पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी निलंबित करने की घोषणा की। इस गुट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को पत्र लिखकर पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोका है।

सौगत रॉय की तीखी प्रतिक्रिया

सांसद सौगत रॉय ने इस पूरे घटनाक्रम को 'मजाक और सर्कस' करार दिया। उन्होंने कहा, 'न्यू टाउन के नोवोटेल होटल में इतनी बड़ी सभा के लिए जरूर किसी ने फंडिंग की होगी। तृणमूल कांग्रेस को ममता बनर्जी ने बनाया था और उन्होंने संघर्ष करके पार्टी को खड़ा किया। सिर्फ 29 विधायकों से शुरू होकर पार्टी पाँच साल के अंदर बंगाल में सत्ता में आ गई।' उन्होंने आरोप लगाया कि बागी विधायकों ने 'भाजपा और सीआईएम की कमेटी बनाई है' और यह गुट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पैसे पर चलेगा।

चुनाव आयोग और पार्टी चिह्न विवाद

चुनाव चिह्न के सवाल पर सौगत रॉय ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग पार्टी का चुनाव चिह्न चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत तय करता है। उन्होंने कहा, 'अगर हमें बुलाया गया, तो हम वहाँ जवाब देंगे। बागी विधायक जो कमेटी बना रहे हैं, उन्हें किसी भी विधानसभा क्षेत्र में सफलता नहीं मिलेगी।' गौरतलब है कि चुनाव चिह्न विवाद में आयोग का फैसला पार्टी की कानूनी पहचान के लिए निर्णायक होगा।

BJP बजट पर भी निशाना

सौगत रॉय ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के बजट पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 1 लाख नौकरियों में 33 फीसदी महिला आरक्षण की घोषणा सकारात्मक है, लेकिन 30 फीसदी अल्पसंख्यकों के बजट में कटौती की आलोचना की। उनके अनुसार सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी की है।

आगे क्या

TMC के भीतर यह टकराव ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं। बागी गुट का चुनाव आयोग में दावा और मुख्य धड़े की जवाबी रणनीति — दोनों मिलकर तय करेंगे कि TMC का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संगठित रणनीतिक चुनौती है। सौगत रॉय का '90% कार्यकर्ता ममता के साथ' वाला दावा राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन ज़मीनी परीक्षण विधानसभा चुनाव में होगा। BJP-फंडिंग का आरोप बिना सार्वजनिक साक्ष्य के लगाया गया है, जो इसे राजनीतिक बयानबाज़ी की श्रेणी में रखता है। असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग चुनाव चिह्न विवाद में किसके पक्ष में फैसला करता है — क्योंकि वही TMC की कानूनी पहचान और 2026 के चुनावी भविष्य को तय करेगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC बागी विधायकों ने 23 जून को क्या किया?
बागी TMC विधायकों ने कोलकाता के न्यू टाउन स्थित नोवोटेल होटल में बैठक कर ममता बनर्जी को पार्टी चेयरपर्सन पद से हटाने और हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन नियुक्त करने का ऐलान किया। साथ ही पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने की घोषणा भी की गई।
सौगत रॉय ने बागी गुट पर क्या आरोप लगाए?
TMC सांसद सौगत रॉय ने बागी गुट को 'मजाक और सर्कस' बताया और आरोप लगाया कि होटल बैठक के लिए BJP ने फंडिंग की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का साथ छोड़ने वाले विधायकों की कमेटी की कोई राजनीतिक अहमियत नहीं है।
TMC के चुनाव चिह्न विवाद में चुनाव आयोग की क्या भूमिका है?
भारत निर्वाचन आयोग चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत पार्टी के चुनाव चिह्न पर फैसला करता है। बागी गुट ने आयोग को पत्र लिखकर TMC के चिह्न पर दावा किया है; सौगत रॉय ने कहा कि मुख्य धड़ा बुलाए जाने पर आयोग के सामने अपना पक्ष रखेगा।
ममता बनर्जी के साथ कितने TMC कार्यकर्ता हैं?
सांसद सौगत रॉय के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के लगभग 90 फीसदी कार्यकर्ता ममता बनर्जी के साथ हैं। हालाँकि यह आँकड़ा पार्टी की ओर से दिया गया दावा है और इसका स्वतंत्र सत्यापन अभी नहीं हुआ है।
BJP बजट पर सौगत रॉय की क्या राय है?
सौगत रॉय ने BJP सरकार के बजट में 1 लाख नौकरियों में 33 फीसदी महिला आरक्षण की घोषणा को सकारात्मक बताया। लेकिन उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के बजट में 30 फीसदी कटौती की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने इस वर्ग की अनदेखी की है।
राष्ट्र प्रेस
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