28 जून 2026
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तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट के खिलाफ कोलकाता में 4 पुलिस शिकायतें दर्ज कराईं, लोगो दुरुपयोग का आरोप

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तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट के खिलाफ कोलकाता में 4 पुलिस शिकायतें दर्ज कराईं, लोगो दुरुपयोग का आरोप

सारांश

तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संघर्ष अब पुलिस थानों तक पहुँच गया है। मुख्य गुट ने कोलकाता में 4 शिकायतें दर्ज कराईं — आरोप है कि बागी गुट ने पार्टी लोगो का दुरुपयोग किया और अरूप रॉय को अवैध रूप से चेयरपर्सन घोषित किया। बागी गुट ने पलटवार करते हुए मामला चुनाव आयोग के हवाले किया।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस के मुख्य गुट ने 28 जून 2026 को कोलकाता और बिधाननगर के 4 पुलिस स्टेशनों में बागी गुट के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं।
शिकायतें कालीघाट , प्रगति मैदान , न्यू टाउन और बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुईं।
आरोप है कि बागी गुट ने पार्टी के लोगो का बिना अनुमति उपयोग किया और अरूप रॉय को अवैध रूप से TMC चेयरपर्सन घोषित किया।
2022 के संगठनात्मक सम्मेलन में ममता बनर्जी को आजीवन चेयरपर्सन चुना गया था; अगला सम्मेलन 2027 में निर्धारित है।
बागी गुट पार्टी चिह्न और संसाधनों पर अधिकार के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाज़ा खटखटा चुका है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मुख्य गुट ने 28 जून 2026 को कोलकाता और उसके आसपास चार अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के खिलाफ औपचारिक शिकायतें दर्ज कराईं। पार्टी के अनुसार, बागी गुट ने बिना अनुमति पार्टी के लोगो का इस्तेमाल किया और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अवैध रूप से तृणमूल कांग्रेस का चेयरपर्सन घोषित किया — जो पद संविधानिक रूप से ममता बनर्जी के पास है।

कहाँ-कहाँ दर्ज हुईं शिकायतें

चारों शिकायतें दो अलग पुलिस आयुक्तालयों के अंतर्गत दर्ज कराई गई हैं। कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में कालीघाट पुलिस स्टेशन और प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन में शिकायतें दर्ज हुईं। बिधाननगर सिटी पुलिस के अंतर्गत न्यू टाउन पुलिस स्टेशन और बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायतें दर्ज कराई गईं। सूत्रों के अनुसार, साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत सबसे अंत में दाखिल की गई।

शिकायतों का सार क्या है

मुख्य गुट के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि सभी चार शिकायतों का केंद्रीय आरोप एक ही है — बागी गुट द्वारा आयोजित बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में पार्टी के लोगो और नाम का बिना अनुमति उपयोग, तथा अरूप रॉय को पार्टी के चेयरपर्सन के रूप में अवैध रूप से प्रस्तुत करना।

मुख्य गुट का तर्क है कि 2022 में हुए तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने ममता बनर्जी को आजीवन पार्टी की चेयरपर्सन बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया था। उस सम्मेलन में मतदान का अधिकार केवल उन्हीं सदस्यों को था जो कम से कम पाँच वर्षों से पार्टी से जुड़े हों। पार्टी के नियमानुसार, अगला संगठनात्मक सम्मेलन 2027 में होना है।

बागी गुट का पक्ष

बागी गुट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे पार्टी के लोगो, नाम और फंड पर अधिकार के मामले को पहले ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष ले जा चुके हैं। गुट का कहना है कि अब इस विवाद का अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के स्तर पर ही होगा, न कि पुलिस शिकायतों से।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक दरार सार्वजनिक रूप से गहरी हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद उन्होंने अपने समर्थकों के साथ एक अलग गुट बना लिया, जो पार्टी के आधिकारिक ढाँचे को चुनौती दे रहा है। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला मुख्य गुट पार्टी संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए सक्रिय है।

आगे क्या होगा

अब इस मामले में दो समानांतर कार्यवाहियाँ चल रही हैं — एक पुलिस स्तर पर, दूसरी भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष। चुनाव आयोग का निर्णय पार्टी के आधिकारिक चिह्न और संसाधनों पर किसके अधिकार का निर्धारण करेगा, जो इस विवाद की असली धुरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे दल-विभाजन के मामलों में चुनाव आयोग का फैसला ही अंततः निर्णायक होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली लड़ाई चुनाव आयोग में होगी — जहाँ पार्टी चिह्न और फंड का नियंत्रण तय होगा। यह उल्लेखनीय है कि मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को अक्सर नजरअंदाज करती है कि दोनों गुट खुद को 'असली TMC' बता रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग के फैसले तक कानूनी स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट के खिलाफ पुलिस शिकायत क्यों दर्ज कराई?
मुख्य TMC गुट का आरोप है कि बागी गुट ने पार्टी के लोगो और नाम का बिना अनुमति उपयोग किया और विधायक अरूप रॉय को अवैध रूप से पार्टी का चेयरपर्सन घोषित किया। पार्टी के अनुसार, ममता बनर्जी 2022 के संगठनात्मक सम्मेलन में आजीवन चेयरपर्सन चुनी गई हैं और अगला सम्मेलन 2027 में होना है।
कोलकाता में किन पुलिस स्टेशनों में शिकायतें दर्ज हुईं?
चार शिकायतें कालीघाट पुलिस स्टेशन, प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन (दोनों कोलकाता पुलिस के अंतर्गत) और न्यू टाउन पुलिस स्टेशन, बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन (दोनों बिधाननगर सिटी पुलिस के अंतर्गत) में दर्ज कराई गईं।
TMC के बागी गुट का नेतृत्व कौन कर रहा है?
बागी गुट का नेतृत्व पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। इस गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अपना चेयरपर्सन घोषित किया है, जिसे मुख्य TMC गुट अवैध बताता है।
इस विवाद का अंतिम फैसला कहाँ होगा?
बागी गुट पार्टी के लोगो, नाम और फंड पर अधिकार के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाज़ा खटखटा चुका है। ऐसे दल-विभाजन के मामलों में चुनाव आयोग का निर्णय ही कानूनी रूप से निर्णायक माना जाता है।
TMC में यह विभाजन कब से है?
ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद उन्होंने अपने समर्थकों के साथ एक अलग गुट बनाया। 2022 में हुए पार्टी सम्मेलन में ममता बनर्जी को आजीवन चेयरपर्सन चुना गया था, और बागी गुट की हालिया गतिविधियों ने इस आंतरिक संघर्ष को सार्वजनिक रूप दे दिया।
राष्ट्र प्रेस
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