टीएमसी में विद्रोह पर अधीर रंजन चौधरी का वार: 'नए चुनाव की मांग अव्यावहारिक, यह राजनीतिक हताशा है'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार, 9 जून को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभरे आंतरिक विद्रोह के बीच पार्टी नेताओं के नए चुनाव कराने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ये बयान राजनीतिक पराजय के बाद उपजी हताशा की उपज हैं, न कि किसी ठोस राजनीतिक विचार का परिणाम।
चौधरी का सीधा हमला
तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि नए सिरे से चुनाव कराने की माँग पूरी तरह अव्यावहारिक है। उन्होंने कहा, 'पागल की तरह बात करने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा नहीं हो सकता। यह कोई स्थानीय गाँव या मोहल्ले की कुश्ती प्रतियोगिता नहीं है जहाँ एक बार हारने पर कोई आधे घंटे बाद फिर से लड़ सकता है। यह निराशा की अभिव्यक्ति है।'
TMC में बागी गुट का उभार
सोमवार को तृणमूल सांसदों के एक समूह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई बैठक ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया। इस घटनाक्रम पर कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर झुकाव का आरोप लगाया और कहा कि वे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानते हैं।
इस विद्रोह की अगुवाई पश्चिम बंगाल के बारासात निर्वाचन क्षेत्र से चार बार की लोकसभा सांसद और पेशे से डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। वे बागी तृणमूल सांसदों के उस गुट का नेतृत्व कर रही हैं जिसने संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता माँगी है — जिससे वे पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ सीधे टकराव में आ गई हैं।
दस्तीदार पर चौधरी की तीखी टिप्पणी
काकोली घोष दस्तीदार की हालिया टिप्पणियों पर अधीर रंजन चौधरी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'देश के लिए काम करना कोई अपराध नहीं है। इतने सालों तक TMC में रहने के बाद शायद उन्हें देश के लिए काम करने का मौका नहीं मिला। अब चुनाव हारने के बाद सारे काम याद आ रहे हैं। यह उनकी अपनी पसंद है।'
TMC में संकट की पृष्ठभूमि
यह विद्रोह पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रहे आंतरिक मतभेदों का परिणाम बताया जा रहा है। यह ऐसे समय में हुआ है जब तृणमूल नेतृत्व को संगठनात्मक एकजुटता को लेकर बढ़ते सवालों का सामना करना पड़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह TMC के इतिहास के सबसे बड़े संसदीय विद्रोहों में से एक है।
आगे क्या होगा
बागी सांसदों की संसद में अलग गुट की मान्यता की माँग पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगामी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं।