26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

टीएमसी में विद्रोह पर अधीर रंजन चौधरी का वार: 'नए चुनाव की मांग अव्यावहारिक, यह राजनीतिक हताशा है'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
टीएमसी में विद्रोह पर अधीर रंजन चौधरी का वार: 'नए चुनाव की मांग अव्यावहारिक, यह राजनीतिक हताशा है'

सारांश

TMC में बागी सांसदों का उभार और नए चुनाव की माँग पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सीधा हमला बोला — 'यह कुश्ती प्रतियोगिता नहीं।' काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी गुट ने संसद में अलग पहचान माँगी, जिससे ममता बनर्जी की पार्टी का सबसे बड़ा संसदीय संकट सामने आया।

मुख्य बातें

अधीर रंजन चौधरी ने 9 जून को TMC की नए चुनाव की माँग को 'अव्यावहारिक' और 'राजनीतिक हताशा' करार दिया।
तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर BJP की ओर झुकाव का आरोप लगाया।
बारासात से चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार बागी गुट की अगुवाई कर रही हैं।
बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिसने पार्टी में नया विवाद पैदा किया।
बागी गुट ने संसद में अलग गुट के रूप में मान्यता माँगी है, जो ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधी चुनौती है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार, 9 जून को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभरे आंतरिक विद्रोह के बीच पार्टी नेताओं के नए चुनाव कराने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ये बयान राजनीतिक पराजय के बाद उपजी हताशा की उपज हैं, न कि किसी ठोस राजनीतिक विचार का परिणाम।

चौधरी का सीधा हमला

तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि नए सिरे से चुनाव कराने की माँग पूरी तरह अव्यावहारिक है। उन्होंने कहा, 'पागल की तरह बात करने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा नहीं हो सकता। यह कोई स्थानीय गाँव या मोहल्ले की कुश्ती प्रतियोगिता नहीं है जहाँ एक बार हारने पर कोई आधे घंटे बाद फिर से लड़ सकता है। यह निराशा की अभिव्यक्ति है।'

TMC में बागी गुट का उभार

सोमवार को तृणमूल सांसदों के एक समूह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई बैठक ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया। इस घटनाक्रम पर कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर झुकाव का आरोप लगाया और कहा कि वे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानते हैं।

इस विद्रोह की अगुवाई पश्चिम बंगाल के बारासात निर्वाचन क्षेत्र से चार बार की लोकसभा सांसद और पेशे से डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। वे बागी तृणमूल सांसदों के उस गुट का नेतृत्व कर रही हैं जिसने संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता माँगी है — जिससे वे पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ सीधे टकराव में आ गई हैं।

दस्तीदार पर चौधरी की तीखी टिप्पणी

काकोली घोष दस्तीदार की हालिया टिप्पणियों पर अधीर रंजन चौधरी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'देश के लिए काम करना कोई अपराध नहीं है। इतने सालों तक TMC में रहने के बाद शायद उन्हें देश के लिए काम करने का मौका नहीं मिला। अब चुनाव हारने के बाद सारे काम याद आ रहे हैं। यह उनकी अपनी पसंद है।'

TMC में संकट की पृष्ठभूमि

यह विद्रोह पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रहे आंतरिक मतभेदों का परिणाम बताया जा रहा है। यह ऐसे समय में हुआ है जब तृणमूल नेतृत्व को संगठनात्मक एकजुटता को लेकर बढ़ते सवालों का सामना करना पड़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह TMC के इतिहास के सबसे बड़े संसदीय विद्रोहों में से एक है।

आगे क्या होगा

बागी सांसदों की संसद में अलग गुट की मान्यता की माँग पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगामी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह खुद अपने भीतर असहमति को संभाल नहीं पा रही। यह संकट 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी संगठनात्मक परीक्षा बन सकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अधीर रंजन चौधरी ने TMC की नए चुनाव की माँग पर क्या कहा?
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि नए सिरे से चुनाव कराने की माँग पूरी तरह अव्यावहारिक है और यह राजनीतिक पराजय के बाद उपजी हताशा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने इसे 'कुश्ती प्रतियोगिता' से तुलना करते हुए खारिज किया।
TMC में बागी गुट का नेतृत्व कौन कर रहा है?
बारासात से चार बार की लोकसभा सांसद और डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार बागी तृणमूल सांसदों के गुट का नेतृत्व कर रही हैं। इस गुट ने संसद में अलग गुट के रूप में मान्यता माँगी है।
TMC के बागी सांसदों और भूपेंद्र यादव की बैठक का विवाद क्या है?
सोमवार को तृणमूल सांसदों के एक समूह ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिस पर कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि ये सांसद BJP की ओर झुक गए हैं और PM मोदी को अपना नेता मानने लगे हैं।
TMC का यह आंतरिक संकट क्यों अहम है?
यह TMC के इतिहास के सबसे बड़े संसदीय विद्रोहों में से एक माना जा रहा है। यह ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।
काकोली घोष दस्तीदार पर कांग्रेस नेता की क्या प्रतिक्रिया थी?
अधीर रंजन चौधरी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि इतने वर्षों तक TMC में रहने के बाद शायद उन्हें देश के लिए काम करने का मौका नहीं मिला, और अब चुनाव हारने के बाद सब याद आ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले