टीएमसी के 20 बागी सांसदों की सदस्यता रद्द हो, हिम्मत है तो इस्तीफा देकर चुनाव लड़ें: अधीर रंजन चौधरी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 25 अगस्त को मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों पर कड़ा प्रहार करते हुए माँग की कि उनकी संसद सदस्यता तत्काल रद्द की जाए। उन्होंने सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि इन सांसदों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) से गठजोड़ करना ही है, तो पहले अपने पद से इस्तीफा दें और जनता के सामने दोबारा चुनाव लड़कर जनादेश हासिल करें।
मुख्य आरोप और चुनौती
चौधरी ने कहा, 'इन 20 सांसदों ने अपनी पार्टी से गद्दारी की है और उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। दम है, तो वे लोग फिर से मैदान में उतरें और दोबारा चुनाव लड़ें।' उन्होंने विशेष रूप से मुर्शिदाबाद जिले का उल्लेख करते हुए कहा कि इन 20 सांसदों में से तीन उनके अपने जिले से हैं, और यह कृत्य नैतिक अपराध की श्रेणी में आता है।
उन्होंने आगे कहा, 'अगर BJP के साथ दोस्ती करने की जरूरत पड़ी, तो चुनाव के मैदान में उतरिए और फिर से जीतकर पार्टी में शामिल हो जाइए। ये जो आपने किया, वो नैतिक अपराध है। अगर नीयत है तो सीधा अपने पद से इस्तीफा देकर मैदान में उतरिए।'
मुर्शिदाबाद में कांग्रेस का संगठन विस्तार
कोलकाता नगर निगम चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में चौधरी ने बताया कि मुर्शिदाबाद जिले में सदस्यता अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में बंगाल के एक विधायक और वे स्वयं उपस्थित थे, जिन्हें स्थानीय ब्लॉक अध्यक्ष और पार्टी उम्मीदवारों ने आमंत्रित किया था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में शामिल होने वाले एक व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर की शिकायत आई थी, लेकिन जाँच में पाया गया कि उस व्यक्ति का न किसी एफआईआर में नाम है और न किसी सीआईडी जाँच में। उन्होंने कहा कि यह अभियान जारी रहेगा, चाहे कोई भी कांग्रेस की छवि धूमिल करने की कोशिश करे।
एसआईआर मामले पर न्यायिक प्रक्रिया पर चिंता
अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल में विशेष जाँच रिपोर्ट (SIR) की सुनवाई की धीमी गति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों को इस प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने न्यायालय से आग्रह किया कि यदि इसी रफ्तार से मामला चलता रहा, तो एक केस को सुलझाने में वर्षों लग जाएँगे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच राजनीतिक तनाव लंबे समय से चला आ रहा है। TMC के भीतर असंतोष और बागी सांसदों की गतिविधियाँ राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कोलकाता नगर निगम चुनाव की तैयारियाँ जोरों पर हैं और सभी दल अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं। चौधरी का यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसमें वह TMC के भीतरी विरोधाभासों को उजागर कर अपनी प्रासंगिकता स्थापित करना चाहती है।