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टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद का बागियों पर हमला: 'गद्दार' बोले, एनसीपीआई को बताया अपंजीकृत पार्टी

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टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद का बागियों पर हमला: 'गद्दार' बोले, एनसीपीआई को बताया अपंजीकृत पार्टी

सारांश

TMC सांसद कीर्ति आजाद ने 20 बागी सांसदों को सार्वजनिक रूप से 'गद्दार' कहा और NCPI को अपंजीकृत, गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी बताया। उन्होंने इसे BJP की रणनीति और निजी स्वार्थ की राजनीति करार दिया, जबकि बागी खेमे में नेतृत्व को लेकर आंतरिक कलह जारी है।

मुख्य बातें

TMC सांसद कीर्ति आजाद ने 16 जून को 20 बागी TMC सांसदों को 'गद्दार' बताया।
बागी सांसद जिस NCPI (नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया) में शामिल हुए, वह गैर-मान्यता प्राप्त और अपंजीकृत पार्टी है — संसद में उसका एक भी सदस्य नहीं।
बागी खेमे की कथित नेता काकोली घोष दस्तीदार को कथित तौर पर कैमरे पर ₹5 लाख लेते हुए पकड़ा गया था।
आजाद ने इस पूरे घटनाक्रम को BJP की रणनीति बताया, जिसका लक्ष्य परिसीमन विधेयक के लिए 362 का आँकड़ा हासिल करना है।
बागी गुट में नेतृत्व और मंत्री पदों को लेकर आंतरिक विवाद जारी है; सांसद और विधायकों के बीच कोई समन्वय नहीं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद ने मंगलवार, 16 जून को उन 20 बागी TMC सांसदों पर कड़ा प्रहार किया, जिन्होंने 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का दामन थामा है। आजाद ने इन सांसदों को सार्वजनिक रूप से 'गद्दार' करार दिया और NCPI की कानूनी व संवैधानिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए।

मुख्य घटनाक्रम

कीर्ति आजाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'टीएमसी ही असली पार्टी है — दीदी यानी ममता बनर्जी की पार्टी। दूसरा गुट गद्दारों की पार्टी है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि NCPI एक गैर-मान्यता प्राप्त और अपंजीकृत दल है, जिसका संसद में एक भी सदस्य नहीं है। उनके अनुसार, 'जिस पार्टी का कोई अस्तित्व ही नहीं, उसमें विलय का कोई राजनीतिक या कानूनी महत्व नहीं है।'

बागी खेमे में आंतरिक कलह

आजाद ने बताया कि बागी गुट में भी एकता नहीं है। उनके अनुसार, इस खेमे में इस बात को लेकर विवाद चल रहा है कि कौन-से दो लोग मंत्री पद पाएँगे और नेतृत्व किसके हाथ में होगा। उन्होंने कहा, 'सांसद कह रहे हैं कि वे अलग गुट बनाएँगे, जबकि विधायक कह रहे हैं कि वे विपक्ष में रहेंगे — इनमें आपस में कोई समन्वय नहीं है।'

काकोली घोष दस्तीदार का ज़िक्र

एक सवाल के जवाब में आजाद ने बागी खेमे की कथित नेता काकोली घोष दस्तीदार का नाम लिया, जिन्हें कथित तौर पर कैमरे पर ₹5 लाख लेते हुए पकड़ा गया था। उन्होंने कहा कि घोष दस्तीदार ने NDA का समर्थन करने और अलग गुट बनाने की बात कही थी, और अब उन्होंने खुद को NCPI में मिला लिया है — जो न तो मान्यता प्राप्त है और न ही संसद में प्रतिनिधित्व रखती है।

भाजपा पर निशाना और राजनीतिक नैतिकता का सवाल

कीर्ति आजाद ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP का लक्ष्य किसी तरह 362 का आँकड़ा हासिल करना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक पास कराना है। उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी 'ऑपरेशन' की बात हो रही है। आजाद ने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में राजनीतिक नैतिकता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अब ऐसे कदम खुलेआम उठाए जाते हैं।

TMC कार्यकर्ताओं का रुख

आजाद ने ज़ोर देकर कहा कि पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ता इस दल-बदल विवाद के बावजूद ममता बनर्जी के साथ मज़बूती से खड़े हैं। उन्होंने इस विलय को 'अलोकतांत्रिक' बताते हुए कहा, 'आम तौर पर विलय जनहित के लिए और किसी सिद्धांत के आधार पर होता है। यहाँ ऐसा कुछ नहीं है — यह केवल निजी स्वार्थ और सत्ता में बने रहने की कोशिश है।' यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के भीतर विभाजन की रेखाएँ गहरी होती दिख रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल NCPI की कानूनी स्थिति से परे है — यह है कि क्या TMC के भीतर यह दरार महज़ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है या संगठनात्मक विफलता का संकेत? जिस पार्टी का संसद में एक भी सदस्य न हो, उसमें 20 सांसदों का जाना दर्शाता है कि या तो वे वापसी का रास्ता खुला रखना चाहते हैं, या BJP की छत्रछाया में किसी बड़े खेल की तैयारी है। परिसीमन का ज़िक्र महत्वपूर्ण है — 362 का आँकड़ा और पश्चिम बंगाल की सीटें इस पूरे घटनाक्रम को महज़ दल-बदल से ऊपर उठाती हैं। मुख्यधारा की कवरेज 'गद्दार' वाले शोर में उलझ गई है, जबकि असली खबर यह है कि क्या यह TMC के लिए 2026 के बंगाल चुनाव से पहले एक संरचनात्मक संकट की शुरुआत है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्ति आजाद ने किन TMC सांसदों को 'गद्दार' कहा?
कीर्ति आजाद ने उन 20 बागी TMC सांसदों को 'गद्दार' कहा जो 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हो गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि असली TMC ममता बनर्जी की पार्टी है।
NCPI यानी नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया क्या है?
NCPI एक गैर-मान्यता प्राप्त और अपंजीकृत राजनीतिक दल है, जिसका संसद में एक भी सदस्य नहीं है। कीर्ति आजाद के अनुसार इस पार्टी का कोई कानूनी या राजनीतिक अस्तित्व नहीं है।
काकोली घोष दस्तीदार कौन हैं और उनका इस विवाद से क्या संबंध है?
काकोली घोष दस्तीदार बागी TMC खेमे की कथित नेता हैं, जिन्हें कथित तौर पर कैमरे पर ₹5 लाख लेते हुए पकड़ा गया था। कीर्ति आजाद के अनुसार उन्होंने NDA का समर्थन करने और NCPI में शामिल होने की घोषणा की है।
कीर्ति आजाद ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
आजाद ने आरोप लगाया कि BJP परिसीमन विधेयक पास कराने के लिए 362 का आँकड़ा हासिल करने की रणनीति के तहत इस दल-बदल को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में भी इसी तरह के 'ऑपरेशन' की बात हो रही है।
बागी TMC गुट में क्या आंतरिक विवाद चल रहा है?
कीर्ति आजाद के अनुसार बागी खेमे में नेतृत्व और मंत्री पदों को लेकर आपसी कलह है। सांसद अलग गुट बनाने की बात कर रहे हैं जबकि विधायक विपक्ष में रहने की — दोनों के बीच कोई समन्वय नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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