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पश्चिम बंगाल के 20 TMC बागी सांसदों का NCPI में औपचारिक विलय, जारी हुई आधिकारिक सूची

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पश्चिम बंगाल के 20 TMC बागी सांसदों का NCPI में औपचारिक विलय, जारी हुई आधिकारिक सूची

सारांश

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर — TMC के 20 बागी सांसद अब औपचारिक रूप से NCPI का हिस्सा बन गए हैं। NDA के करीब जाने की यह कोशिश बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।

मुख्य बातें

NCPI ने 19 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के 20 सांसदों के विलय की आधिकारिक सूची जारी की।
विलय करने वाले सांसदों में सुदीप बंद्योपाध्याय , शताब्दी रॉय , यूसुफ पठान और रचना बनर्जी सहित 20 नाम शामिल हैं।
ये सभी सांसद मूलतः तृणमूल कांग्रेस (TMC) से थे और जून 2026 में बगावत कर NCPI में शामिल हुए थे।
इनका उद्देश्य BJP नेतृत्व वाले NDA गठबंधन के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस घटनाक्रम का असर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर पड़ सकता है।

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने 19 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के 20 सांसदों के पार्टी में विलय की आधिकारिक पुष्टि करते हुए उनकी सूची सार्वजनिक की। विलय स्वीकार किए जाने के बाद ये सभी सांसद अब औपचारिक रूप से NCPI का हिस्सा बन गए हैं, जो पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए एक उल्लेखनीय घटनाक्रम माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

NCPI द्वारा जारी आधिकारिक सूची में 20 सांसदों के नाम शामिल हैं। इनमें सुदीप बंद्योपाध्याय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय, मिताली बाग, पार्थ भौमिक, अधिकारी दीपक देव, डॉ. शर्मिला सरकार, सयानी घोष, बापी हलदार, कालीपद सारेन खेरवाल, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, प्रसून बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, असित कुमार मल, यूसुफ पठान, जून मालिया, खलीलुर रहमान, मोहम्मद अबू ताहेर खान और रचना बनर्जी के नाम हैं।

पृष्ठभूमि: TMC से अलगाव की कहानी

गौरतलब है कि ये सभी सांसद मूलतः तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े थे। जून 2026 में इन्होंने TMC से बगावत कर NCPI में विलय की घोषणा की थी। इनका स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जुड़ना था। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।

NCPI एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है, जो इस घटनाक्रम से पहले राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षाकृत कम चर्चित था। 20 सांसदों के एक साथ शामिल होने से इसकी संसदीय उपस्थिति और राजनीतिक वज़न में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पार्टी की प्रतिक्रिया

NCPI ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इन सांसदों के जुड़ने से संगठन की जनसेवा की भावना को नई मज़बूती मिलेगी। पार्टी का दावा है कि यह सामूहिक प्रयास देश के विकास और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

राजनीतिक विश्लेषण और असर

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस विलय का असर आने वाले समय में पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति दोनों पर देखने को मिल सकता है। यह घटनाक्रम TMC के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि एक साथ 20 सांसदों का पार्टी छोड़ना उसकी संसदीय ताकत को कमज़ोर करता है।

आलोचकों का कहना है कि NDA के करीब जाने की यह कोशिश बंगाल की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत हो सकती है, हालाँकि इसके दीर्घकालिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं हैं।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि NCPI इन सांसदों को NDA गठबंधन के भीतर किस भूमिका में स्थापित करती है और TMC इस बगावत का राजनीतिक जवाब किस तरह देती है। यह घटनाक्रम 2026 के आगामी राजनीतिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिम बंगाल में एक सुनियोजित राजनीतिक पुनर्गठन की ओर संकेत करता है। NCPI जैसे अपेक्षाकृत अपरिचित दल का अचानक इतना बड़ा संसदीय आधार पाना सवाल उठाता है कि यह स्वतःस्फूर्त बगावत है या किसी बड़े रणनीतिक खेल का हिस्सा। मुख्यधारा की कवरेज सूची और संख्याओं पर केंद्रित रही, लेकिन असली सवाल यह है कि NDA के साथ यह गठजोड़ लोकसभा में किस हद तक व्यावहारिक साबित होगा और क्या ये सांसद दलबदल विरोधी कानून की कसौटी पर खरे उतरेंगे।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCPI में विलय करने वाले 20 सांसद कौन हैं?
NCPI द्वारा जारी सूची में सुदीप बंद्योपाध्याय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय, मिताली बाग, पार्थ भौमिक, अधिकारी दीपक देव, डॉ. शर्मिला सरकार, सयानी घोष, बापी हलदार, कालीपद सारेन खेरवाल, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, प्रसून बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, असित कुमार मल, यूसुफ पठान, जून मालिया, खलीलुर रहमान, मोहम्मद अबू ताहेर खान और रचना बनर्जी के नाम शामिल हैं। ये सभी मूलतः TMC से जुड़े सांसद हैं।
NCPI क्या है और इसका NDA से क्या संबंध है?
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है। इन 20 सांसदों ने BJP नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ने के उद्देश्य से NCPI का दामन थामा है, हालाँकि NDA में औपचारिक प्रवेश की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
इन सांसदों ने TMC क्यों छोड़ी?
कथित तौर पर इन सांसदों ने जून 2026 में तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर NCPI में शामिल होने की घोषणा की थी। उनका घोषित उद्देश्य NDA गठबंधन के साथ राजनीतिक तालमेल बिठाना था, हालाँकि TMC छोड़ने के आंतरिक कारणों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस विलय का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 20 सांसदों का एक साथ TMC छोड़ना पार्टी की संसदीय ताकत को कमज़ोर करता है और बंगाल में नए राजनीतिक समीकरण बना सकता है। इसका असर राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर आने वाले समय में देखने को मिल सकता है।
क्या दलबदल विरोधी कानून इन सांसदों पर लागू होगा?
यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है। भारत के दलबदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत किसी दल के दो-तिहाई सदस्यों का विलय वैध माना जाता है। इस मामले में कानूनी स्थिति की जाँच अभी जारी है और अंतिम निर्णय संसद के पीठासीन अधिकारी पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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