टीएमसी के 20 बागी सांसदों के दावे से एनसीपीआई लोकसभा की पाँचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है
सारांश
मुख्य बातें
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) — जो सप्ताहांत तक राष्ट्रीय राजनीति में लगभग अनजान थी — 15 जून 2026 को उस समय अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों के इसमें शामिल होने की खबर सामने आई। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस दलबदल को स्वीकृति देते हैं, तो एनसीपीआई संसद के निचले सदन में पाँचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई हलचल
एनसीपीआई के फेसबुक पेज पर सोमवार को एक ग्राफिकल प्रस्तुति साझा की गई, जिसमें पश्चिम बंगाल की लोकसभा सीटों का पार्टी-वार ब्योरा दर्शाया गया। इस ग्राफिक के अनुसार, एनसीपीआई के 20 सांसद हैं — जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 12 और टीएमसी के 8 सांसदों की संयुक्त संख्या के बराबर है। कांग्रेस का एक सदस्य है, जबकि बसीरहाट सीट मौजूदा सदस्य के निधन के बाद रिक्त है।
यह कदम कथित तौर पर दलबदल विरोधी कानूनों से बचने और खुद को भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जोड़ने की रणनीति के तहत उठाया गया है।
पार्टी की पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति
एनसीपीआई जनवरी 2023 में पंजीकृत हुई थी और फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पास एक अपंजीकृत मान्यताप्राप्त राजनीतिक दल के रूप में दर्ज है। पार्टी कानूनी रूप से अस्तित्व में है, परंतु उसे न तो राज्य स्तर पर और न ही राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।
इस कारण पार्टी को आरक्षित चुनाव चिह्न नहीं मिलता, सरकारी मीडिया पर मुफ्त प्रसारण समय नहीं मिलता और चुनाव प्रचार के लिए सब्सिडी वाली सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं। मान्यता के लिए पार्टी को लगातार चुनावों में निर्धारित वोट शेयर या सीटें हासिल करनी होंगी।
पार्टी का पंजीकृत पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बांकरा शहर में बताया जाता है।
चुनावी इतिहास: कमज़ोर ज़मीनी पकड़
2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में एनसीपीआई ने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन तकनीकी कारणों से चार नामांकन रद्द हो गए। चावामानु विधानसभा क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा को केवल 536 वोट मिले, जो कुल वैध मतों का 1.4 प्रतिशत से भी कम था। कैलाशहर सीट पर पार्टी उम्मीदवार को मात्र 286 वोट मिले। कुल मिलाकर पार्टी के तीनों उम्मीदवारों को 2,000 से कम वोट मिले।
आर्थिक दृष्टि से उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक कुल ₹1.13 लाख का ही चंदा प्राप्त हुआ है, जो इसके सीमित वित्तीय आधार को उजागर करता है।
नेतृत्व और संगठनात्मक ढाँचा
पार्टी अध्यक्ष उत्तिया कुंडू को राजनीतिक रूप से सक्रिय बताया जाता है और कहा जाता है कि उनके कई राजनीतिक नेताओं से करीबी संबंध हैं। पार्टी की कोषाध्यक्ष शेवली कुंडू पश्चिम बंगाल में उसी पते पर पंजीकृत कई सामाजिक संगठनों और निजी कंपनियों से भी जुड़ी हुई हैं। कुंडू दंपति का यह नेतृत्व-स्वरूप भारत में छोटी क्षेत्रीय पार्टियों की पारिवारिक राजनीति की परंपरा को दर्शाता है।
पार्टी के अन्य प्रमुख नाम के रूप में शांतनु डे का उल्लेख सामने आया है। उन्होंने बताया कि पार्टी का शुरुआती फोकस त्रिपुरा की स्वायत्त जिला परिषदों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में वंचित आदिवासी समुदायों के हितों की पैरवी करना था।
आगे क्या होगा
बागी टीएमसी सांसदों के इस कदम ने एनसीपीआई को राजनीतिक गुमनामी से बाहर निकाल कर पश्चिम बंगाल के राजनीतिक संकट के बीच एक संभावित अहम खिलाड़ी की भूमिका में ला दिया है। हालाँकि, यह पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी पर निर्भर है। गौरतलब है कि दलबदल विरोधी कानूनों के तहत इस तरह के समूह को मान्यता मिलने की प्रक्रिया जटिल और विवादास्पद हो सकती है।