11 अगस्त 2026
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एनसीपीआई में बागी टीएमसी सांसदों के विलय पर विवाद, संस्थापक शांतनु देय बोले — पार्टी सदस्यों से नहीं ली गई राय

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एनसीपीआई में बागी टीएमसी सांसदों के विलय पर विवाद, संस्थापक शांतनु देय बोले — पार्टी सदस्यों से नहीं ली गई राय

सारांश

एनसीपीआई के संस्थापक शांतनु देय ने खुलकर कहा कि बागी टीएमसी सांसदों के विलय का फैसला उनसे और वरिष्ठ नेताओं से बिना चर्चा के लिया गया। पार्टी के अधिकांश सदस्य नाराज़ हैं। यह विवाद उस वक्त उभरा है जब छोटे दलों पर राजनीतिक पुनर्गठन का दबाव तेज़ हो रहा है।

मुख्य बातें

एनसीपीआई संस्थापक शांतनु देय ने 15 जून 2026 को कहा कि बागी टीएमसी सांसदों के विलय पर उनसे कोई चर्चा नहीं की गई।
पार्टी के अधिकांश सदस्य इस घटनाक्रम से असंतुष्ट हैं; अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ।
शांतनु देय ने 2022 में एनसीपीआई की स्थापना की थी और 2023 में पार्टी का आधिकारिक पंजीकरण हुआ।
2023 त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एनसीपीआई के 7 में से 3 उम्मीदवारों का नामांकन स्वीकार हुआ।
शांतनु देय NDA समर्थक हैं और PM मोदी या सुवेंदु अधिकारी के बुलाने पर मिलने को तैयार हैं।

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी इंडिया (एनसीपीआई) के संस्थापक शांतनु देय ने 15 जून 2026 को बारासत में स्पष्ट किया कि बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों के एनसीपीआई में संभावित विलय को लेकर न तो उनसे और न ही पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से कोई पूर्व परामर्श किया गया। उनके अनुसार, पार्टी के अधिकांश सदस्य इस घटनाक्रम से असंतुष्ट हैं और किसी भी अंतिम निर्णय से पहले सामूहिक विचार-विमर्श अनिवार्य है।

विवाद की पृष्ठभूमि

शांतनु देय ने बताया कि 2022 में कुछ साथियों और नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने एनसीपीआई की स्थापना की थी। पार्टी का उद्देश्य जनाधिकारों के लिए काम करना और देशभर में वंचित वर्गों की आवाज़ उठाना था। उन्होंने त्रिपुरा से संगठन का कार्य आरंभ किया और 2023 में पार्टी का आधिकारिक पंजीकरण कराया।

उन्होंने कहा, 'मैंने पार्टी का चुनाव चिह्न चुना, झंडा डिज़ाइन किया, संविधान लिखा और संगठनात्मक ढाँचा तैयार किया। लेकिन जिन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाया गया, उन्होंने मुझसे, लीगल सेल और प्रवक्ताओं से बिना किसी चर्चा के यह निर्णय ले लिया।'

विलय की खबर कैसे मिली

शांतनु देय के अनुसार, बागी टीएमसी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने की सूचना उन्हें सोशल मीडिया और पार्टी के अन्य नेताओं के फोन कॉल के ज़रिए मिली। उन्होंने कहा, 'पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती — उसमें सदस्य, पदाधिकारी और जनता सभी शामिल होते हैं।'

उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि संबंधित नेता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मिले थे, जहाँ यह कहा गया कि यदि निर्धारित समय के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती, तो आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है।

पार्टी सदस्यों की नाराज़गी

शांतनु देय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई अंतिम या आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है। उनका कहना है कि पार्टी के कई सदस्य इस घटनाक्रम से इसलिए संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि उनसे कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने कहा, 'यदि टीएमसी के नेता बातचीत करना चाहते हैं तो हम तैयार हैं, लेकिन कोई भी निर्णय पार्टी के संविधान और सामूहिक सहमति के अनुसार ही होगा।'

एनडीए समर्थन और भविष्य की राह

शांतनु देय ने यह भी बताया कि वे पहले से ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार, पार्टी का लक्ष्य उन क्षेत्रों तक पहुँचना है जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पहुँच अभी सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या पश्चिम बंगाल विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी द्वारा बुलाया जाए, तो वे अवश्य जाएँगे।

गौरतलब है कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एनसीपीआई ने सात उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से केवल तीन का नामांकन स्वीकार हुआ और वे चुनाव लड़ सके। पार्टी के भीतर यह आंतरिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बागी टीएमसी सांसद राजनीतिक पुनर्गठन की तलाश में हैं और छोटे दलों के लिए विलय का दबाव बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की खोखली होती जड़ों की ओर इशारा करता है। बागी टीएमसी सांसदों के लिए एनसीपीआई एक सुविधाजनक राजनीतिक पड़ाव हो सकती है, लेकिन यदि विलय बिना सामूहिक सहमति के हुआ तो यह पार्टी को मज़बूत करने की बजाय और अधिक विखंडित कर सकता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीपीआई में बागी टीएमसी सांसदों के विलय का विवाद क्या है?
बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों के नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने की खबरों पर पार्टी संस्थापक शांतनु देय ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह निर्णय उनसे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बिना किसी चर्चा के लिया गया।
शांतनु देय कौन हैं और एनसीपीआई से उनका क्या संबंध है?
शांतनु देय एनसीपीआई के संस्थापक हैं जिन्होंने 2022 में पार्टी की स्थापना की और 2023 में आधिकारिक पंजीकरण कराया। उन्होंने त्रिपुरा से संगठन का कार्य शुरू किया, पार्टी का झंडा, चुनाव चिह्न और संविधान तैयार किया।
क्या एनसीपीआई में टीएमसी सांसदों का विलय अंतिम हो गया है?
नहीं, अभी तक कोई अंतिम या आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है। शांतनु देय के अनुसार पार्टी के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों की सामूहिक सहमति के बाद ही कोई निर्णय सार्वजनिक किया जाएगा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की इस मामले में क्या भूमिका है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित नेता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले थे। वहाँ यह कहा गया कि यदि निर्धारित समय के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती, तो आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है।
एनसीपीआई का राजनीतिक रुझान क्या है?
शांतनु देय के अनुसार वे एनडीए के समर्थक हैं और पार्टी का लक्ष्य उन क्षेत्रों तक पहुँचना है जहाँ BJP की पहुँच सीमित है। उन्होंने कहा कि PM मोदी या सुवेंदु अधिकारी के बुलाने पर वे मिलने को तैयार हैं।
राष्ट्र प्रेस
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