एनसीपीआई में बागी टीएमसी सांसदों के विलय पर विवाद, संस्थापक शांतनु देय बोले — पार्टी सदस्यों से नहीं ली गई राय
सारांश
मुख्य बातें
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी इंडिया (एनसीपीआई) के संस्थापक शांतनु देय ने 15 जून 2026 को बारासत में स्पष्ट किया कि बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों के एनसीपीआई में संभावित विलय को लेकर न तो उनसे और न ही पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से कोई पूर्व परामर्श किया गया। उनके अनुसार, पार्टी के अधिकांश सदस्य इस घटनाक्रम से असंतुष्ट हैं और किसी भी अंतिम निर्णय से पहले सामूहिक विचार-विमर्श अनिवार्य है।
विवाद की पृष्ठभूमि
शांतनु देय ने बताया कि 2022 में कुछ साथियों और नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने एनसीपीआई की स्थापना की थी। पार्टी का उद्देश्य जनाधिकारों के लिए काम करना और देशभर में वंचित वर्गों की आवाज़ उठाना था। उन्होंने त्रिपुरा से संगठन का कार्य आरंभ किया और 2023 में पार्टी का आधिकारिक पंजीकरण कराया।
उन्होंने कहा, 'मैंने पार्टी का चुनाव चिह्न चुना, झंडा डिज़ाइन किया, संविधान लिखा और संगठनात्मक ढाँचा तैयार किया। लेकिन जिन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाया गया, उन्होंने मुझसे, लीगल सेल और प्रवक्ताओं से बिना किसी चर्चा के यह निर्णय ले लिया।'
विलय की खबर कैसे मिली
शांतनु देय के अनुसार, बागी टीएमसी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने की सूचना उन्हें सोशल मीडिया और पार्टी के अन्य नेताओं के फोन कॉल के ज़रिए मिली। उन्होंने कहा, 'पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती — उसमें सदस्य, पदाधिकारी और जनता सभी शामिल होते हैं।'
उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि संबंधित नेता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मिले थे, जहाँ यह कहा गया कि यदि निर्धारित समय के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती, तो आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है।
पार्टी सदस्यों की नाराज़गी
शांतनु देय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई अंतिम या आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है। उनका कहना है कि पार्टी के कई सदस्य इस घटनाक्रम से इसलिए संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि उनसे कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने कहा, 'यदि टीएमसी के नेता बातचीत करना चाहते हैं तो हम तैयार हैं, लेकिन कोई भी निर्णय पार्टी के संविधान और सामूहिक सहमति के अनुसार ही होगा।'
एनडीए समर्थन और भविष्य की राह
शांतनु देय ने यह भी बताया कि वे पहले से ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार, पार्टी का लक्ष्य उन क्षेत्रों तक पहुँचना है जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पहुँच अभी सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या पश्चिम बंगाल विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी द्वारा बुलाया जाए, तो वे अवश्य जाएँगे।
गौरतलब है कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एनसीपीआई ने सात उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से केवल तीन का नामांकन स्वीकार हुआ और वे चुनाव लड़ सके। पार्टी के भीतर यह आंतरिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बागी टीएमसी सांसद राजनीतिक पुनर्गठन की तलाश में हैं और छोटे दलों के लिए विलय का दबाव बढ़ता जा रहा है।