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'मेक इन इंडिया' के 12 साल: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना, डिफेंस वैल्यू ₹1.78 लाख करोड़ — PM मोदी

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'मेक इन इंडिया' के 12 साल: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना, डिफेंस वैल्यू ₹1.78 लाख करोड़ — PM मोदी

सारांश

'मेक इन इंडिया' के 12 साल — और आँकड़े बोलते हैं: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹1.9 लाख करोड़ से ₹13.11 लाख करोड़, मोबाइल उत्पादन 33 गुना, डिफेंस वैल्यू ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है।

मुख्य बातें

'मेक इन इंडिया' ने 25 सितंबर 2026 को अपने 12 वर्ष पूरे किए; अब 27 सेक्टर्स में लागू।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ — लगभग 7 गुना वृद्धि।
मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा; भारत वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता।
डिफेंस उत्पादन वैल्यू ₹46,429 करोड़ से रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ (वित्त वर्ष 2025-26)।
फार्मा टर्नओवर 2024-25 में ₹4,71,898 करोड़ ; मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग 48.2% बढ़ी।
ऑटो उत्पादन 2024-25 में 3.103 करोड़ यूनिट — 2014-15 से 33% अधिक ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2026 को 'मेक इन इंडिया' के 12 वर्ष पूरे होने पर कहा कि इस पहल ने भारत के कई प्रमुख सेक्टर्स की तस्वीर बदल दी है — निवेश, निर्यात और उत्पादन तीनों मोर्चों पर देश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में मोदी ने लिखा, 'भारत में ज़्यादा उत्पादन, भारत में ज़्यादा निवेश, भारत से ज़्यादा निर्यात। हर सेक्टर में बदलाव साफ़ दिख रहा है!'

मेक इन इंडिया की शुरुआत और विस्तार

भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिज़ाइन और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से 25 सितंबर 2014 को यह पहल शुरू की गई थी। आज यह कार्यक्रम 27 सेक्टर्स में लागू है — जिनमें 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सर्विस सेक्टर शामिल हैं। गौरतलब है कि शुरुआत में यह मुख्यतः विनिर्माण क्षेत्र तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा सेवा उद्योगों तक भी बढ़ाया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उत्पादन में छलांग

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में ₹1.9 लाख करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ हो गया — यानी लगभग सात गुना की वृद्धि। इसी दौरान मोबाइल फोन उत्पादन करीब 33 गुना बढ़ा, जो ₹18,000 करोड़ से उछलकर ₹6.27 लाख करोड़ तक पहुँच गया। वॉल्यूम के हिसाब से भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है।

डिफेंस और ऑटोमोबाइल सेक्टर की उड़ान

रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी आँकड़े प्रभावशाली हैं। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, देश में बने डिफेंस उत्पादों की कुल वैल्यू 2014-15 में ₹46,429 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच गई। ऑटोमोबाइल सेक्टर में 2024-25 में वाहन उत्पादन 3.103 करोड़ यूनिट तक पहुँचा, जो 2014-15 की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है।

फार्मा और मेडिकल डिवाइस में भी उल्लेखनीय बढ़त

फार्मास्युटिकल उद्योग अब वॉल्यूम के लिहाज़ से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के हिसाब से 11वें स्थान पर है। 2024-25 में इस उद्योग का सालाना टर्नओवर ₹4,71,898 करोड़ तक पहुँचा। मेडिकल डिवाइस की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग 48.2 प्रतिशत बढ़ी — 2019-20 में ₹28,000 करोड़ से 2024-25 में ₹41,500 करोड़ हो गई।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी अभी भी लक्ष्य से कम है, और रोज़गार सृजन के आँकड़ों को स्वतंत्र सत्यापन की ज़रूरत है। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में PLI और मेक इन इंडिया के तालमेल से उत्पादन और निर्यात में और तेज़ी आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी अभी भी 25% के दीर्घकालिक लक्ष्य से काफी नीचे है — यह असंगति मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर छूट जाती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उत्पादन की छलांग वास्तविक है, पर यह काफी हद तक PLI प्रोत्साहनों और Apple-सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों के कुछ ही इकाइयों पर निर्भर है — जो व्यापक-आधारित औद्योगिकीकरण का संकेत नहीं। रोज़गार के ठोस और सत्यापित आँकड़ों की अनुपस्थिति में, उत्पादन मूल्य की वृद्धि को नीतिगत सफलता का एकमात्र पैमाना मानना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मेक इन इंडिया' पहल क्या है और यह कब शुरू हुई?
'मेक इन इंडिया' भारत सरकार की एक प्रमुख औद्योगिक पहल है, जिसे 25 सितंबर 2014 को लॉन्च किया गया था। इसका लक्ष्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिज़ाइन और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाना है, और यह अब 27 सेक्टर्स में लागू है।
'मेक इन इंडिया' के 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ हो गया — यानी लगभग सात गुना की वृद्धि। मोबाइल फोन उत्पादन इसी अवधि में 33 गुना बढ़ा।
भारत का डिफेंस उत्पादन 'मेक इन इंडिया' के बाद कहाँ पहुँचा?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, देश में निर्मित रक्षा उत्पादों की वैल्यू 2014-15 में ₹46,429 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ हो गई। यह वृद्धि चार गुना से अधिक है।
भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की वैश्विक रैंकिंग क्या है?
भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के हिसाब से 11वें स्थान पर है। 2024-25 में इस उद्योग का सालाना टर्नओवर ₹4,71,898 करोड़ तक पहुँच गया।
PM मोदी ने 'मेक इन इंडिया' की 12वीं वर्षगाँठ पर क्या कहा?
PM मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा — 'भारत में ज़्यादा उत्पादन, भारत में ज़्यादा निवेश, भारत से ज़्यादा निर्यात। हर सेक्टर में बदलाव साफ़ दिख रहा है!' उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुई वृद्धि को रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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