25 सितंबर 2026
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'मेक इन इंडिया' के 12 वर्ष: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 32 गुना बढ़ी

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'मेक इन इंडिया' के 12 वर्ष: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 32 गुना बढ़ी

सारांश

'मेक इन इंडिया' के 12 वर्ष — और आँकड़े चौंकाते हैं। मोबाइल उत्पादन 32 गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स 7 गुना, इस्पात दोगुना। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है। सवाल यह है कि क्या यह उत्पादन उछाल GDP हिस्सेदारी और रोज़गार में भी उतनी ही तेज़ी से झलकेगा।

मुख्य बातें

'मेक इन इंडिया' ने 25 सितंबर 2026 को 12 वर्ष पूरे किए; योजना 25 सितंबर 2014 को शुरू हुई थी।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ — 7 गुना वृद्धि।
मोबाइल फोन उत्पादन ₹18,900 करोड़ से ₹6.3 लाख करोड़ — 32 गुना उछाल; भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता ।
कच्चे इस्पात का उत्पादन 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 170.0 मिलियन टन ; वाहन उत्पादन 33 प्रतिशत बढ़कर 31.03 मिलियन यूनिट ।
फार्मास्युटिकल टर्नओवर 2025-26 में ₹5,08,630 करोड़ ; निर्यात ₹2,62,697 करोड़ ।
मैन्युफैक्चरिंग GVA ने 2022-23 से 2025-26 के बीच 10.88 प्रतिशत CAGR दर्ज किया।

'मेक इन इंडिया' योजना ने 25 सितंबर 2026 को अपने 12 वर्ष पूरे किए — और सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इस दौरान देश के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में सात गुना तथा मोबाइल फोन निर्माण में 32 गुना की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई है। नई दिल्ली से जारी आँकड़ों के अनुसार, 25 सितंबर 2014 को शुरू की गई इस योजना का मूल उद्देश्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिज़ाइन और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना था।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उत्पादन में ऐतिहासिक छलाँग

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, देश का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ तक पहुँच गया है — यानी लगभग सात गुना की वृद्धि। इसी अवधि में मोबाइल फोन उत्पादन ₹18,900 करोड़ से उछलकर ₹6.3 लाख करोड़ हो गया, जो करीब 32 गुना की बढ़ोतरी है। इस प्रदर्शन के बल पर भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

उल्लेखनीय है कि 2025-26 में कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 15.8 गुना अधिक रहा। यह वृद्धि दर इस बात का संकेत है कि प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) जैसी पूरक योजनाओं ने 'मेक इन इंडिया' को ठोस परिणामों से जोड़ने में भूमिका निभाई है।

इस्पात, ऑटोमोबाइल और रेलवे में मज़बूत प्रगति

इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है। देश में कच्चे इस्पात का उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170.0 मिलियन टन हो गया। वाहन उत्पादन 2024-25 में 31.03 मिलियन यूनिट तक पहुँचा, जो 2014-15 के मुकाबले 33 प्रतिशत अधिक है।

यात्री एवं वाणिज्यिक वाहनों के उत्पादन में 65 प्रतिशत, दोपहिया वाहनों में 30 प्रतिशत और तिपहिया वाहनों में 71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी क्रम में भारतीय रेलवे ने 2014-24 के दौरान 54,809 कोच बनाए — औसत वार्षिक उत्पादन 2004-14 के 3,300 से कम की तुलना में बढ़कर 5,481 हो गया। 2025-26 में अकेले 1,674 लोकोमोटिव का निर्माण किया गया।

फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र का विस्तार

आँकड़ों के अनुसार, भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वॉल्यूम के हिहाब से वैश्विक स्तर पर तीसरे और मूल्य के हिसाब से 11वें स्थान पर है। पिछले पाँच वर्षों में 9.2 प्रतिशत की औसत दर से वृद्धि दर्ज करते हुए इस उद्योग का वार्षिक टर्नओवर 2025-26 में ₹5,08,630 करोड़ तक पहुँचा, जबकि फार्मास्युटिकल निर्यात ₹2,62,697 करोड़ रहा।

मेडिकल डिवाइस के घरेलू उत्पादन में भी 48.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई — 2019-20 के करीब ₹28,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹41,500 करोड़ हो गया।

मैन्युफैक्चरिंग GVA में दस प्रतिशत से अधिक सालाना वृद्धि

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ने 2022-23 से 2025-26 के बीच 10.88 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की। यह आँकड़ा देश की बढ़ती औद्योगिक क्षमता को रेखांकित करता है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठित हो रही हैं और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ चीन से विकल्प तलाश रही हैं — जो भारत के लिए दीर्घकालिक अवसर का संकेत देता है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या यह उत्पादन वृद्धि रोज़गार सृजन और GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी में भी समान रूप से परिलक्षित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और रोज़गार के आँकड़े उत्पादन मूल्य जितनी तेज़ी से नहीं बढ़े। 'चाइना प्लस वन' रणनीति से मिल रहे अवसरों को भुनाने के लिए ज़रूरी होगा कि अगला दशक केवल संख्याओं का नहीं, गहरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करे।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मेक इन इंडिया' योजना क्या है और इसे कब शुरू किया गया था?
'मेक इन इंडिया' भारत सरकार की एक प्रमुख औद्योगिक पहल है, जिसे 25 सितंबर 2014 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिज़ाइन और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाना है।
'मेक इन इंडिया' के 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन कितना बढ़ा?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ हो गया है — यानी सात गुना की वृद्धि। इसमें मोबाइल फोन उत्पादन अकेले 32 गुना बढ़कर ₹6.3 लाख करोड़ पहुँचा।
भारत मोबाइल फोन निर्माण में विश्व में किस स्थान पर है?
आँकड़ों के अनुसार, भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। यह स्थान 2014 के मुकाबले एक उल्लेखनीय बदलाव है, जब देश में मोबाइल उत्पादन महज ₹18,900 करोड़ था।
'मेक इन इंडिया' के तहत ऑटोमोबाइल और इस्पात क्षेत्र में क्या बदलाव आया?
कच्चे इस्पात का उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170.0 मिलियन टन हो गया। वाहन उत्पादन 2024-25 में 33 प्रतिशत बढ़कर 31.03 मिलियन यूनिट तक पहुँचा, जबकि तिपहिया वाहनों में 71 प्रतिशत की सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई।
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वैश्विक स्तर पर कहाँ खड़ा है?
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वॉल्यूम के हिसाब से वैश्विक स्तर पर तीसरे और मूल्य के हिसाब से 11वें स्थान पर है। 2025-26 में इस उद्योग का वार्षिक टर्नओवर ₹5,08,630 करोड़ और निर्यात ₹2,62,697 करोड़ रहा।
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