तृणमूल कांग्रेस में बढ़ता असंतोष संगठन की गहरी खामियों का नतीजा: शताब्दी रॉय
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बागी सांसद शताब्दी रॉय ने 10 जून 2026 को कोलकाता में राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में पार्टी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टीएमसी में बढ़ता असंतोष और नेताओं का पार्टी छोड़ना केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि संगठन के भीतर की गहरी खामियों का संकेत है। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार, अति-आत्मविश्वास, आई-पैक का बढ़ता प्रभाव और पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार प्रमुख कारण हैं।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
शताब्दी रॉय ने कहा, 'इतने सारे लोग पार्टी छोड़ चुके हैं या असंतुष्ट हैं। इसे केवल उनकी व्यक्तिगत गलती नहीं कहा जा सकता। जब बड़ी संख्या में लोग नाराज हों, तो इसकी जिम्मेदारी पार्टी पर भी आती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं का समुचित ध्यान रखना चाहिए था।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब टीएमसी कई वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने और आंतरिक कलह की खबरों से जूझ रही है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के कई दिग्गज नेता या तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो चुके हैं या सार्वजनिक रूप से असंतोष जता चुके हैं।
चुनावी समीक्षा की कमी पर सवाल
रॉय ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी कमियों में से एक चुनावी हार के कारणों की गंभीर समीक्षा न करना है। उनके शब्दों में, 'हार के बाद कभी गंभीर चर्चा नहीं हुई कि हम क्यों हारे। जब तक हार के कारणों का विश्लेषण नहीं होगा, गलतियों को सुधारा नहीं जा सकता।' उन्होंने तर्क दिया कि हर संगठन अपनी असफलताओं की समीक्षा करता है और राजनीतिक दलों को भी ऐसा अवश्य करना चाहिए।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर इसका स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ गया है। 'किसी ने कल्पना नहीं की थी कि भ्रष्टाचार इस स्तर तक पहुँच जाएगा। जो बातें अब सामने आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं,' उन्होंने कहा।
नेतृत्व और सलाहकारों पर निशाना
शताब्दी रॉय ने राजनीतिक सलाहकारों और डेटा-आधारित रणनीतियों पर अत्यधिक निर्भरता की भी आलोचना की। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की भावनाओं को बेहतर समझते हैं, और टिकट वितरण तथा राजनीतिक रणनीति स्थानीय नेताओं से सलाह लेकर तय की जानी चाहिए।
ममता बनर्जी की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे देश की सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं, लेकिन उन्हें सभी जिम्मेदारियाँ अभिषेक बनर्जी को नहीं सौंपनी चाहिए थीं। साथ ही, अभिषेक को भी सब कुछ सलाहकारों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए था।
जवाबदेही पर सवाल
रॉय ने यह भी पूछा कि क्या पार्टी और सरकार को जमीनी स्तर पर हो रही गतिविधियों की जानकारी थी। उनके अनुसार, 'अगर जानकारी नहीं थी, तो यह भी एक बड़ी विफलता है। और यदि जानकारी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, तो जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।' उन्होंने यह धारणा भी रेखांकित की कि पार्टी में यह सोच बन गई थी कि लोग हर हाल में वोट देंगे, जो एक बड़ी भूल साबित हुई।
भविष्य की राह और BJP योजनाओं की सराहना
भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं पर शताब्दी रॉय ने कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और विभिन्न समूहों के बीच चर्चाएँ जारी हैं। उल्लेखनीय रूप से, उन्होंने मौजूदा BJP सरकार की कुछ योजनाओं — जैसे मुफ्त बस सेवा और अन्नपूर्णा योजना — की सराहना भी की और उम्मीद जताई कि सरकार अपने वादों को पूरा करने और सुशासन पर ध्यान देती रहेगी।
टीएमसी के भीतर यह बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना बाकी है।