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टीएमसी संकट: सौगत रॉय बोले — 'जो हो रहा है वह अनैतिक', 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज़ सामने आए

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टीएमसी संकट: सौगत रॉय बोले — 'जो हो रहा है वह अनैतिक', 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज़ सामने आए

सारांश

तृणमूल कांग्रेस में गहराता संकट अब दस्तावेज़ी विवाद में बदल गया है — 19 सांसदों के कथित हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए हैं, जिनकी प्रामाणिकता पर सवाल हैं। वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इसे 'ऑपरेशन लोटस' का हिस्सा बताते हुए सीधे भाजपा पर निशाना साधा।

मुख्य बातें

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने 12 जून को कहा कि पार्टी में जो हो रहा है वह 'अनैतिक और गलत' है।
कुछ सांसदों का दावा — उन्होंने किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए, फिर भी उनके नाम का इस्तेमाल हो रहा है।
19 टीएमसी लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए; प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
रॉय ने सुवेंदु अधिकारी की गतिविधियों को 'ऑपरेशन लोटस' से जोड़ा; भूपेंद्र यादव और अमित शाह से मुलाकातों का ज़िक्र किया।
दस्तावेज़ों में पहले दो हस्ताक्षर काकोली घोष और शताब्दी रॉय के बताए जा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में गहराते अंदरूनी संकट के बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 12 जून को कहा कि कुछ सांसद यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए, फिर भी उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। रॉय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी के भीतर जो कुछ भी हो रहा है, वह 'अनैतिक और गलत' है।

सौगत रॉय का सीधा आरोप

सौगत रॉय ने कहा, 'कुछ लोग कह रहे हैं कि उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन फिर भी उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडिया में हस्ताक्षरों की एक सूची प्रसारित हो रही है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि 18, 19 या 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। दो-तिहाई बहुमत के फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है, लेकिन मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि जो कुछ वे कर रहे हैं, वह अनैतिक और गलत है।'

रॉय ने असंतुष्ट सांसदों की गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा, 'ये सभी सांसद तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने उनके लिए प्रचार किया था और पार्टी ने उन्हें पूरा समर्थन दिया था। अचानक ऐसा क्या हो गया कि वे पार्टी छोड़ने की सोच रहे हैं? वे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर रहे हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की योजना बना रहे हैं। राजनीति में इस तरह की घटनाएँ नहीं होनी चाहिए। यह सब 'ऑपरेशन लोटस' के कारण हो रहा है। भाजपा अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है।'

सुवेंदु अधिकारी की भूमिका पर निशाना

रॉय ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी की गतिविधियों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, 'एक तरफ समिक भट्टाचार्य अस्वस्थ होकर अस्पताल में भर्ती हैं, वहीं दूसरी ओर सुवेंदु अधिकारी काफी सक्रिय नज़र आ रहे हैं। उन्होंने शाम को शताब्दी रॉय के आवास पर जाकर मुलाकात की और बाद में कोलकाता में कुछ असंतुष्ट नेताओं से भी मिले। ऐसा लगता है कि वह किसी तरह 'ऑपरेशन लोटस' को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।'

19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज़ सामने आए

इस बीच शुक्रवार को टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए, जिनमें दावा किया जा रहा है कि ये सांसद लोकसभा में पार्टी के मुख्य और बहुमत वाले समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये तीनों पन्ने उस कथित पत्र का हिस्सा हैं या नहीं, जिसे सांसदों ने काकोली घोष और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में जमा कराया है।

इन दस्तावेज़ों में सबसे पहला हस्ताक्षर काकोली घोष का और दूसरा शताब्दी रॉय का बताया जा रहा है। तीन पन्नों में जिन अन्य लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर दिख रहे हैं, उनमें मथुरापुर से बापी हलदर, बर्दवान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूच बिहार से जगदीश वर्मा बसुनिया, बोलपुर से असित मल, बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती, झाड़ग्राम से कालीपद सोरेन, घाटल से दीपक अधिकारी उर्फ देव, मेदिनीपुर से जून मालिया, बैरकपुर से पार्थ भौमिक, जंगीपुर से खलीलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से ताहिर खान, बहरामपुर से युसूफ पठान, आरामबाग से मिताली बाग, कोलकाता (दक्षिण) से माला रॉय, हुगली से रचना बनर्जी और जादवपुर से सयोनी घोष शामिल हैं।

गौरतलब है कि इन तीन पन्नों और उन पर मौजूद 19 सांसदों के हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और टीएमसी के बीच खींचतान अपने चरम पर है। यदि असंतुष्ट सांसदों की संख्या दो-तिहाई बहुमत की सीमा पार करती है, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता का भविष्य भी दाँव पर लग सकता है। टीएमसी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय का रुख आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संख्या और दस्तावेज़ी साक्ष्य की चर्चा इसे अधिक ठोस रूप देती है। असली सवाल यह है कि क्या टीएमसी नेतृत्व इन असंतुष्टों को अनुशासन में रख पाएगा, या दल-बदल विरोधी कानून की परीक्षा तक यह मामला पहुँचेगा। बंगाल की राजनीति में इस तरह की 'खरीद-फरोख्त' की कोशिशें पहले भी हुई हैं और हर बार परिणाम राज्य के लोकतांत्रिक ढाँचे पर सवाल उठाते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी में मौजूदा संकट क्या है?
तृणमूल कांग्रेस के कथित तौर पर 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि ये सांसद लोकसभा में पार्टी के बहुमत वाले समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और कुछ सांसदों ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया है।
सौगत रॉय ने 'अनैतिक' किसे कहा?
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पार्टी के उन सांसदों की गतिविधियों को 'अनैतिक और गलत' कहा, जो कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर रहे हैं। उन्होंने इसे 'ऑपरेशन लोटस' का हिस्सा बताया।
'ऑपरेशन लोटस' क्या है?
'ऑपरेशन लोटस' वह राजनीतिक आरोप है जो विपक्षी दल भाजपा पर लगाते हैं, जिसमें कहा जाता है कि भाजपा विपक्षी दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी पार्टी में शामिल कराने के लिए प्रलोभन देती है। सौगत रॉय ने सुवेंदु अधिकारी की असंतुष्ट नेताओं से मुलाकातों को इसी रणनीति का हिस्सा बताया।
कौन-से टीएमसी सांसदों के हस्ताक्षर दस्तावेज़ में बताए जा रहे हैं?
दस्तावेज़ों में काकोली घोष और शताब्दी रॉय के अलावा बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश वर्मा बसुनिया, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, ताहिर खान, युसूफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, रचना बनर्जी और सयोनी घोष के नाम शामिल हैं। हालाँकि इन हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
यदि असंतुष्ट सांसदों की संख्या दल-बदल विरोधी कानून के तहत निर्धारित दो-तिहाई सीमा को पार करती है, तो उनकी लोकसभा सदस्यता पर खतरा टल सकता है। टीएमसी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय का रुख आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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