तृणमूल के 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए, लोकसभा में नए गुट को लेकर भ्रम बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उठापटक के बीच 12 जून 2026 को तीन पन्ने सामने आए, जिन पर पार्टी के 19 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इन पन्नों में दावा किया गया है कि हस्ताक्षर करने वाले सांसद लोकसभा में TMC प्रतिनिधित्व का मुख्य एवं बहुमत वाला गुट हैं। हालाँकि, इन तीन पन्नों की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
पत्र की पृष्ठभूमि और उलझन
यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये तीन पन्ने उसी कथित पत्र का अंतिम हिस्सा हैं, जो डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय की अगुवाई में सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में सौंपा गया बताया जाता है। लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से इस पत्र के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
किन सांसदों के हस्ताक्षर हैं
सामने आए पन्नों में पहला हस्ताक्षर डॉ. काकोली घोष दस्तीदार का है, जो बारासात निर्वाचन क्षेत्र (नॉर्थ 24 परगना) से TMC की चार बार की लोकसभा सदस्य हैं। दूसरा हस्ताक्षर अभिनेत्री से नेता बनी शताब्दी रॉय का है, जो बीरभूम निर्वाचन क्षेत्र से चार बार की लोकसभा सदस्य हैं।
शेष 17 सांसदों में शामिल हैं — बापी हलदर (मथुरापुर), शर्मिला सरकार (बर्दवान पूर्व), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), जगदीश वर्मा बसुनिया (कूच बिहार), असित मल (बोलपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), दीपक अधिकारी उर्फ देव (घाटल), जून मालिया (मेदिनीपुर), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद), यूसुफ पठान (बहरामपुर), मिताली बाग (आरामबाग), माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), रचना बनर्जी (हुगली) और सायनी घोष (जादवपुर)।
हस्ताक्षर के क्रम पर सवाल
रचना बनर्जी और सायनी घोष के हस्ताक्षर पन्नों पर निर्धारित क्रम से अलग स्थानों पर दर्ज हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों ने पत्र पर बाद में हस्ताक्षर किए थे, इसलिए उनके दस्तखत अन्य सांसदों से अलग स्थान पर हैं। उल्लेखनीय है कि इन 19 बागी सांसदों में से किसी ने भी सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया है।
TMC की मौजूदा संसदीय स्थिति
फिलहाल लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 27 सांसद हैं। नॉर्थ 24 परगना की बशीरहाट सीट सितंबर 2024 से रिक्त है, जब TMC सांसद हाजी शेख नूरुल इस्लाम का निधन हो गया था — वे 2024 के आम चुनाव में जीतने के कुछ ही महीनों बाद गुजर गए थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब TMC के भीतर केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय दल के बीच तनाव की खबरें लगातार आ रही हैं।
आगे की स्थिति
यदि इन सांसदों का अलग गुट आधिकारिक रूप से मान्यता पाता है, तो लोकसभा में TMC की संसदीय रणनीति और विपक्षी गठबंधन की राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नज़रें लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की प्रतिक्रिया और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।