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तृणमूल कांग्रेस में टूट पर शशि थरूर: '20 सांसदों का एनडीए से जुड़ना बिना सिद्धांतों की राजनीति'

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तृणमूल कांग्रेस में टूट पर शशि थरूर: '20 सांसदों का एनडीए से जुड़ना बिना सिद्धांतों की राजनीति'

सारांश

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में आई भूचाल — 58 विधायकों की बगावत, 3 राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा और 20 लोकसभा सांसदों का NDA की ओर रुख। शशि थरूर ने इसे 12 साल की विरोधी राजनीति को एक झटके में पलटने वाला 'सिद्धांतहीन' कदम करार दिया।

मुख्य बातें

शशि थरूर ने 19 जून को TMC की टूट को 'बिना सिद्धांतों की राजनीति' बताया और लालच या धमकी की आशंका जताई।
पश्चिम बंगाल चुनाव में TMC केवल 80 सीटें जीत सकी, जिसके बाद 58 विधायकों ने बगावत की।
20 लोकसभा सांसद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में शामिल होकर NDA का समर्थन करने पर राज़ी हुए।
तीन राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दिया।
थरूर ने कहा — राजनीति में टिके रहने के लिए भारत के लिए बेहतर विजन ज़रूरी, न कि सत्ता की लालसा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने 19 जून को तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई बड़ी टूट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। थरूर ने कहा कि इस विभाजन के पीछे 'लालच, फायदे या धमकियाँ' जैसे कारण रहे होंगे, और यह सब केवल सत्ताधारी पक्ष ही कर सकता है क्योंकि 'ताकत उन्हीं के पास है।' उन्होंने इसे भारतीय राजनीति के सिद्धांतहीन होते जाने का प्रमाण बताया।

मुख्य घटनाक्रम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा और पार्टी मात्र 80 सीटें ही जीत सकी। इसके तुरंत बाद पार्टी के भीतर विद्रोह की आँधी आई। सबसे पहले 58 विधायकों ने बगावत का झंडा उठाया और विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सोवनदेब चट्टोपाध्याय को मान्यता देने से इनकार कर दिया।

इसके बाद संसद में भी संकट गहराया। तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया, जबकि 20 लोकसभा सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में शामिल होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की घोषणा की।

थरूर का सीधा आरोप

थरूर ने इन बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा, "जो सबसे बड़ा गुट अलग हुआ — यानी तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद — उन्होंने खुलकर कहा है कि वे अब एनडीए के साथ जुड़ेंगे। ये वही सांसद हैं जो पिछले 12 सालों से एनडीए पर हमले करते रहे हैं। ऐसे में अचानक उनमें यह 'गुण' दिखना बताता है कि हमारे देश की राजनीति बिना सिद्धांतों वाली राजनीति हो गई है और यह काफी दुखद है।"

राजनीति में विजन की ज़रूरत

थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनकी सीमा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "दूसरी तरफ वाले आपके दुश्मन नहीं हैं — वे आपके विरोधी हैं। आपका काम देश के सामूहिक हित के लिए काम करना है।" उनके अनुसार राजनीति में टिके रहने का एकमात्र तर्क यह होना चाहिए कि आपके पास भारत और समाज को बेहतर बनाने का एक स्पष्ट विजन हो।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस में यह टूट महज आंतरिक असंतोष नहीं, बल्कि चुनावी हार के बाद उभरी सत्ता-खिंचाव की राजनीति का नतीजा है। आलोचकों का कहना है कि जब कोई पार्टी कमज़ोर पड़ती है, तो सत्ताधारी गठबंधन के लिए उसके नेताओं को अपनी ओर खींचना आसान हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता पर पहले से ही सवाल उठाए जा रहे हैं।

आगे की राह

तृणमूल कांग्रेस के शेष नेतृत्व के सामने अब पार्टी को पुनर्गठित करने की बड़ी चुनौती है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विपक्ष की भूमिका अब अनिश्चित हो गई है। थरूर की यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि विपक्षी दलों में भी इस घटनाक्रम को लेकर गहरी चिंता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भूलना नहीं चाहिए कि कांग्रेस खुद दलबदल और गठबंधन-तोड़ने की राजनीति से अछूती नहीं रही है। असली सवाल यह है कि क्या भारतीय राजनीति में दल-निष्ठा अब महज चुनावी गणित बन चुकी है — जहाँ 12 साल की वैचारिक विरोधिता एक झटके में पलट जाती है। तृणमूल कांग्रेस की यह टूट एक पृथक घटना नहीं, बल्कि उस बड़े पैटर्न की कड़ी है जिसमें हार के बाद विपक्षी दल बिखर जाते हैं और सत्ता का गुरुत्वाकर्षण उन्हें खींच लेता है। जब तक दलबदल विरोधी कानून में ठोस सुधार नहीं होते, 'सिद्धांतों की राजनीति' की बात महज वक्तव्य बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तृणमूल कांग्रेस में टूट क्यों हुई?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC को केवल 80 सीटें मिलने के बाद पार्टी में विद्रोह शुरू हुआ। पहले 58 विधायकों ने बगावत की, फिर 20 लोकसभा सांसदों ने NDA का समर्थन करने की घोषणा की और 3 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया।
शशि थरूर ने TMC टूट पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि इस टूट के पीछे लालच, फायदे या धमकियाँ रही होंगी। उन्होंने 20 सांसदों के 12 साल बाद NDA से जुड़ने को 'बिना सिद्धांतों की राजनीति' करार दिया और इसे दुखद बताया।
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी क्या है?
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी वह नई राजनीतिक इकाई है जिसमें TMC के 20 बागी लोकसभा सांसद शामिल हुए हैं और जो NDA को समर्थन दे रही है। यह पार्टी TMC की टूट के बाद उभरी है।
क्या TMC के विधायकों ने भी बगावत की?
हाँ, 58 TMC विधायकों ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सोवनदेब चट्टोपाध्याय को मान्यता देने से इनकार कर दिया। यह बगावत पश्चिम बंगाल चुनाव में पार्टी की खराब प्रदर्शन के तुरंत बाद सामने आई।
थरूर के अनुसार राजनीति में क्या होना चाहिए?
थरूर ने कहा कि राजनीति में टिके रहने के लिए नेताओं के पास भारत और समाज को बेहतर बनाने का स्पष्ट विजन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोधी दुश्मन नहीं होते और देश के सामूहिक हित के लिए मिलकर काम करना ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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