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टीएमसी में विद्रोह की आहट: निरुपम का दावा — 22 बागी सांसद एनडीए में होंगे शामिल

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टीएमसी में विद्रोह की आहट: निरुपम का दावा — 22 बागी सांसद एनडीए में होंगे शामिल

सारांश

शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने दावा किया है कि टीएमसी के लगभग 22 सांसद ममता-अभिषेक नेतृत्व से नाराज़ होकर एनडीए का रुख करने वाले हैं। साथ ही उन्होंने इंडिया गठबंधन को वैचारिक रूप से खोखला बताया — यह दावे विपक्ष की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

मुख्य बातें

शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 14 जून 2026 को दावा किया कि टीएमसी के लगभग 22 सांसद एनडीए में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
कथित तौर पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली से नाराज़ सांसद और विधायक अलग गुट बनाने पर विचार कर रहे हैं।
निरुपम के अनुसार दिल्ली में बागी सांसदों की बैठकें जारी हैं और जल्द ही वे BJP में शामिल होंगे।
उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट में भी इसी तरह के असंतोष की चेतावनी दी।
इंडिया गठबंधन पर आरोप लगाया कि केरल सहित कई राज्यों में कांग्रेस और वाम दलों के बीच टकराव से गठबंधन की वैचारिक एकता पर सवाल उठते हैं।
टीएमसी की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 14 जून 2026 को मुंबई में दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष इतना गहरा हो चुका है कि लगभग 22 सांसदों का एक समूह शीघ्र ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का दामन थाम सकता है। निरुपम के अनुसार, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली के कारण सांसदों और विधायकों में नाराज़गी लगातार बढ़ रही है।

मुख्य दावे और घटनाक्रम

निरुपम ने कहा कि पहले अनुमान था कि टीएमसी के बागी सांसदों की संख्या 18 या 19 से अधिक नहीं होगी, लेकिन नए राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद यह आँकड़ा बदलता दिख रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में इस विषय पर बैठकों का दौर जारी है और आने वाले दिनों में ये सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विधिवत शामिल होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी में जो स्थिति उभर रही है, वह सामान्य संगठनात्मक असंतोष नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक दरार का संकेत है। नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की कमी को उन्होंने इस संकट की मूल वजह बताया।

उद्धव ठाकरे गुट पर भी निशाना

निरुपम ने शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता उद्धव ठाकरे पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ठाकरे चाहे जितनी बैठकें अपने सांसदों के साथ कर लें, उनकी पार्टी के भीतर भी असंतोष की लहर पनप रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी जैसी ही स्थिति उद्धव गुट में भी देखने को मिल सकती है।

इंडिया गठबंधन पर सवाल

शिवसेना प्रवक्ता ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और वाम दलों के बीच कई राज्यों में, विशेषकर केरल में, राजनीतिक टकराव लंबे समय से जारी है। निरुपम के अनुसार, गठबंधन वैचारिक एकता के बजाय केवल राजनीतिक अवसरवाद पर टिका है, जिसके कारण घटक दल अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे के विरुद्ध बयानबाजी करते नज़र आते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है और आने वाले समय में इंडिया गठबंधन और अधिक बिखर सकता है।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि यह दावे ऐसे समय में आए हैं जब एनडीए और विपक्षी गठबंधन के बीच संसदीय ताकत को लेकर सियासी हलचल तेज़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दावे अक्सर राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में भी सामने आते हैं और इनकी पुष्टि तब तक नहीं मानी जा सकती जब तक कि संबंधित सांसद स्वयं सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट न करें। टीएमसी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या निरुपम के दावे ज़मीनी राजनीतिक हकीकत में तब्दील होते हैं या यह केवल सत्तारूढ़ गठबंधन की बयानबाज़ी तक सीमित रहते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और टीएमसी ने इसे सिरे से नकारा नहीं तो माना भी नहीं। असली सवाल यह है कि क्या यह वास्तविक राजनीतिक भूकंप है या एनडीए की ओर से विपक्ष की मनोबल-तोड़ रणनीति — और इसका जवाब आने वाले हफ्तों में संसदीय व्यवहार से ही मिलेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने टीएमसी के बारे में क्या दावा किया है?
शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने दावा किया है कि टीएमसी के लगभग 22 सांसद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से नाराज़ होकर एनडीए में शामिल होने की तैयारी में हैं। उनके अनुसार दिल्ली में इस विषय पर बैठकें जारी हैं।
टीएमसी में असंतोष की वजह क्या बताई गई है?
निरुपम के अनुसार, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली तथा नेतृत्व व कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की कमी इस असंतोष की मूल वजह है। पार्टी के कई सांसद और विधायक कथित तौर पर शिकायत कर रहे हैं कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही।
क्या इंडिया गठबंधन पर भी निरुपम ने टिप्पणी की?
हाँ, निरुपम ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन वैचारिक एकता के बजाय राजनीतिक अवसरवाद पर टिका है। उन्होंने केरल में कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव का उदाहरण दिया।
क्या टीएमसी ने इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक टीएमसी की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ये दावे फिलहाल शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता के बयान तक सीमित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
उद्धव ठाकरे के बारे में निरुपम ने क्या कहा?
निरुपम ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में भी टीएमसी जैसी ही असंतोष की स्थिति उभर सकती है। उन्होंने कहा कि बैठकों की संख्या बढ़ाने से आंतरिक नाराज़गी दूर नहीं होती।
राष्ट्र प्रेस
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