शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों का शिंदे गुट में विलय संवैधानिक: संजय निरुपम, विपक्ष को शिकायत का अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 25 जून 2026 को स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों का मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होना पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी सांसद लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं, तो यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है — लेकिन शिंदे गुट कानूनी रूप से पूरी तरह आश्वस्त है।
सांसदों के विलय पर शिंदे गुट का रुख
निरुपम ने कहा, 'मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी का कोई भी राजनीतिक अभियान अधूरा नहीं रहता। शिवसेना (यूबीटी) के जो छह सांसद उनके साथ आए हैं, उनका निर्णय पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है।' उन्होंने जोड़ा कि पार्टी को विश्वास है कि कानूनी दृष्टिकोण से उनकी स्थिति मजबूत है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल और संवैधानिक वैधता को लेकर बहस तेज़ हो गई है।
कांग्रेस पर तीखा हमला
निरुपम ने कांग्रेस पर सीधे निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 'लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस जनता को भ्रमित करने और दुष्प्रचार फैलाने में लगी हुई है।' उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर संविधान बदलने की मंशा रखने का आरोप लगाया था, लेकिन सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बावजूद ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।
संविधान संशोधन के मुद्दे पर निरुपम ने कहा, 'संविधान में समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। क्या कांग्रेस के शासनकाल में संविधान संशोधन नहीं किए गए थे?' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष संविधान-रक्षा को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहा है।
आरक्षण और परिसीमन पर स्पष्टीकरण
आरक्षण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को निरुपम ने तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण समाप्त करने की नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को अधिक अवसर देने की दिशा में काम कर रही है। परिसीमन प्रस्तावों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रावधान था।
मुंबई हथियार बरामदगी पर चिंता
मुंबई के डिंडोशी क्षेत्र में एक टेम्पो से कथित तौर पर धारदार हथियार बरामद होने की घटना पर निरुपम ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि हथियार किस उद्देश्य से लाए जा रहे थे। उन्होंने माँग की कि यदि इसके पीछे हिंसा या अशांति फैलाने की साजिश थी, तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर जोर
कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी के मुद्दे पर निरुपम ने इसे राष्ट्रीय महत्व का विषय बताया। उनके अनुसार अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है और धीरे-धीरे पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि विस्थापित परिवारों के साथ दोबारा किसी प्रकार का अन्याय न हो। महाराष्ट्र की राजनीति में इस बहुआयामी प्रेस वार्ता से स्पष्ट है कि शिंदे गुट आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है।