10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद शिंदे गुट के संपर्क में, राउत ने जारी किए कारण बताओ नोटिस — 7 दिन की मोहलत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद शिंदे गुट के संपर्क में, राउत ने जारी किए कारण बताओ नोटिस — 7 दिन की मोहलत

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय बैठक में 9 में से केवल 3 सांसद पहुँचे — 6 की अनुपस्थिति ने विभाजन लगभग पक्का कर दिया। राउत ने 7 दिन का नोटिस थमाया और सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई की चेतावनी दी। 19 जून — शिवसेना स्थापना दिवस — पर बागियों के शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चा है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद 18 जून की संसदीय बैठक से अनुपस्थित रहे।
उपस्थित सांसद: अरविंद सावंत , अनिल देसाई , राजाभाऊ वाजे ; अनुपस्थित: ओमराजे निंबालकर , संजय जाधव , संजय देशमुख , नागेश आष्टीकर , भाऊसाहेब वाकचौरे , संजय दीना पाटिल ।
संजय राउत ने सभी 6 अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, जवाब के लिए 7 दिन की समय-सीमा।
पार्टी ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की।
कथित तौर पर बागी सांसद 19 जून (शिवसेना स्थापना दिवस) पर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।
राउत ने कहा — विधायी प्रक्रिया विफल रही तो मामला सीधे सर्वोच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा।

शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट से संपर्क में होने की आशंकाओं के बीच उद्धव ठाकरे का गुट हाईअलर्ट पर आ गया है। 18 जून को नई दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में केवल तीन सांसद उपस्थित हुए, जिसके बाद पार्टी ने अनुपस्थित सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने स्पष्ट कर दिया है कि बागी सांसदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक हर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।

बैठक में कौन आया, कौन नहीं

पार्टी के सख्त व्हिप के बावजूद बैठक में केवल तीन सांसद — अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण-मध्य) और राजाभाऊ वाजे (नासिक) — शामिल हुए। छह सांसद अनुपस्थित रहे: ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), नागेश आष्टीकर (हिंगोली), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व)।

इन छह सांसदों की अनुपस्थिति ने संसदीय विंग में विभाजन की आशंका को लगभग पक्का कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह 2022 में हुई मूल शिवसेना टूट की सीधी परिणति है, जब शिंदे ने बहुमत विधायकों के साथ विद्रोह किया था।

राउत की सख्त चेतावनी और कानूनी रोडमैप

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, “आज संसदीय दल की बैठक में हमारे लोकसभा के सिर्फ तीन सांसद शामिल हुए। हमने बैठक में न आने वाले सभी सांसदों को आधिकारिक 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए हैं और उन्हें अपना स्पष्टीकरण देने के लिए सात दिन की सख्त समय-सीमा दी है।”

राउत ने आगे कहा, “हम यह लड़ाई सड़कों पर लड़ेंगे और अदालतों में भी। उनकी सदस्यता रद्द करवाने के लिए जमीनी स्तर पर हमारी तैयारी जोर-शोर से शुरू हो चुकी है।” उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का रोडमैप भी स्पष्ट किया।

लोकसभा अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका

राउत ने जोर देकर कहा, “पार्टी सबसे पहले लोकसभा में सभी आंतरिक संवैधानिक और विधायी प्रक्रियाओं का पालन करेगी। अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नियमों, कानून और भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए सख्त दिशानिर्देशों के अनुसार काम करते हैं, तो इन छह सांसदों की सदस्यता रद्द होनी तय है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विधायी प्रक्रिया से निष्पक्ष समाधान नहीं निकला, तो उद्धव ठाकरे का गुट इस मामले को सीधे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए तैयार है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायालय पहले ही 2022 की शिवसेना विभाजन से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर चुका है।

19 जून का महत्व — स्थापना दिवस पर बड़ा दांव

महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में कथित तौर पर यह चर्चा है कि छह बागी सांसद 19 जून के आसपास आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो सकते हैं — यह तारीख शिवसेना का स्थापना दिवस भी है। आलोचकों का कहना है कि स्थापना दिवस पर इस तरह का कदम प्रतीकात्मक रूप से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व को और कमज़ोर करने की कोशिश हो सकती है।

गौरतलब है कि यह घटनाक्रम 2022 की उस टूट की सीधी कड़ी है जब शिंदे के विद्रोह ने महाराष्ट्र की सत्ता पलट दी थी। अब संसदीय स्तर पर भी उसी इतिहास की पुनरावृत्ति की आशंका बन रही है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का रुख और सर्वोच्च न्यायालय की संभावित भूमिका इस राजनीतिक संकट की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2022 की शिवसेना टूट की अगली कड़ी है — इस बार संसदीय मंच पर। राउत का कानूनी रोडमैप प्रभावशाली लगता है, लेकिन असली सवाल यह है कि लोकसभा अध्यक्ष, जो सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल से हैं, दल-बदल याचिका पर कितनी तेज़ी से और निष्पक्षता से काम करेंगे — पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे मामलों में निर्णय वर्षों तक लंबित रह सकते हैं। 19 जून का प्रतीकात्मक चुनाव — शिवसेना स्थापना दिवस — दर्शाता है कि शिंदे गुट केवल सांसद नहीं, बल्कि पार्टी की विरासत पर भी दावा ठोकना चाहता है। उद्धव ठाकरे के लिए यह परीक्षा केवल कानूनी नहीं, राजनीतिक अस्तित्व की भी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) के कितने सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं?
रिपोर्टों के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद शिंदे गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इन छह सांसदों ने 18 जून की संसदीय दल की बैठक में भाग नहीं लिया।
संजय राउत ने कारण बताओ नोटिस क्यों जारी किया?
पार्टी के सख्त व्हिप के बावजूद छह सांसदों के संसदीय बैठक से अनुपस्थित रहने पर शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। राउत ने सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण माँगा है और कहा है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर सदस्यता रद्द कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
क्या इन सांसदों की लोकसभा सदस्यता वाकई रद्द हो सकती है?
दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि कोई सांसद पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है या स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। राउत ने कहा कि यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार काम करें, तो सदस्यता रद्द होनी तय है — हालाँकि ऐसे मामलों में निर्णय में देरी की मिसालें भी रही हैं।
19 जून का इस राजनीतिक संकट में क्या महत्व है?
19 जून शिवसेना का स्थापना दिवस है। कथित तौर पर छह बागी सांसद इसी दिन के आसपास एकनाथ शिंदे के गुट में आधिकारिक रूप से शामिल हो सकते हैं, जिसे राजनीतिक विश्लेषक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर प्रतीकात्मक प्रहार के रूप में देख रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) आगे क्या कदम उठाएगी?
पार्टी पहले लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दल-बदल विरोधी याचिका दायर करेगी। यदि वहाँ से संतोषजनक परिणाम नहीं मिला, तो राउत के अनुसार मामला सीधे सर्वोच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा। साथ ही पार्टी जमीनी स्तर पर भी अभियान चलाने की तैयारी में है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले