शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद शिंदे गुट के संपर्क में, राउत ने जारी किए कारण बताओ नोटिस — 7 दिन की मोहलत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट से संपर्क में होने की आशंकाओं के बीच उद्धव ठाकरे का गुट हाईअलर्ट पर आ गया है। 18 जून को नई दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में केवल तीन सांसद उपस्थित हुए, जिसके बाद पार्टी ने अनुपस्थित सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने स्पष्ट कर दिया है कि बागी सांसदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक हर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।
बैठक में कौन आया, कौन नहीं
पार्टी के सख्त व्हिप के बावजूद बैठक में केवल तीन सांसद — अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण-मध्य) और राजाभाऊ वाजे (नासिक) — शामिल हुए। छह सांसद अनुपस्थित रहे: ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), नागेश आष्टीकर (हिंगोली), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व)।
इन छह सांसदों की अनुपस्थिति ने संसदीय विंग में विभाजन की आशंका को लगभग पक्का कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह 2022 में हुई मूल शिवसेना टूट की सीधी परिणति है, जब शिंदे ने बहुमत विधायकों के साथ विद्रोह किया था।
राउत की सख्त चेतावनी और कानूनी रोडमैप
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, “आज संसदीय दल की बैठक में हमारे लोकसभा के सिर्फ तीन सांसद शामिल हुए। हमने बैठक में न आने वाले सभी सांसदों को आधिकारिक 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए हैं और उन्हें अपना स्पष्टीकरण देने के लिए सात दिन की सख्त समय-सीमा दी है।”
राउत ने आगे कहा, “हम यह लड़ाई सड़कों पर लड़ेंगे और अदालतों में भी। उनकी सदस्यता रद्द करवाने के लिए जमीनी स्तर पर हमारी तैयारी जोर-शोर से शुरू हो चुकी है।” उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का रोडमैप भी स्पष्ट किया।
लोकसभा अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका
राउत ने जोर देकर कहा, “पार्टी सबसे पहले लोकसभा में सभी आंतरिक संवैधानिक और विधायी प्रक्रियाओं का पालन करेगी। अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नियमों, कानून और भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए सख्त दिशानिर्देशों के अनुसार काम करते हैं, तो इन छह सांसदों की सदस्यता रद्द होनी तय है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विधायी प्रक्रिया से निष्पक्ष समाधान नहीं निकला, तो उद्धव ठाकरे का गुट इस मामले को सीधे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए तैयार है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायालय पहले ही 2022 की शिवसेना विभाजन से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर चुका है।
19 जून का महत्व — स्थापना दिवस पर बड़ा दांव
महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में कथित तौर पर यह चर्चा है कि छह बागी सांसद 19 जून के आसपास आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो सकते हैं — यह तारीख शिवसेना का स्थापना दिवस भी है। आलोचकों का कहना है कि स्थापना दिवस पर इस तरह का कदम प्रतीकात्मक रूप से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व को और कमज़ोर करने की कोशिश हो सकती है।
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम 2022 की उस टूट की सीधी कड़ी है जब शिंदे के विद्रोह ने महाराष्ट्र की सत्ता पलट दी थी। अब संसदीय स्तर पर भी उसी इतिहास की पुनरावृत्ति की आशंका बन रही है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का रुख और सर्वोच्च न्यायालय की संभावित भूमिका इस राजनीतिक संकट की दिशा तय करेगी।