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शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अफवाहें निराधार, संजय राउत बोले — नौ सांसद पूरी तरह एकजुट

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शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अफवाहें निराधार, संजय राउत बोले — नौ सांसद पूरी तरह एकजुट

सारांश

संजय राउत ने मीडिया की उन खबरों को सिरे से खारिज किया जिनमें शिवसेना (यूबीटी) में टूट की बात कही जा रही थी। उन्होंने कहा कि नौ सांसद एकजुट हैं और पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर संवैधानिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की माँग की है।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 17 जून को कहा कि शिवसेना (यूबीटी) में टूट की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं।
पार्टी के नौ लोकसभा सांसद एकजुट और सक्रिय हैं; किसी विभाजन की आधिकारिक पुष्टि नहीं।
पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर औपचारिक आवेदन दाखिल किया।
राउत ने माँग की कि दलबदल के मामलों में संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन हो।
कथित तौर पर विधायकों-सांसदों को प्रभावित करने के लिए धन-बल के इस्तेमाल के आरोपों की ओर इशारा किया, पर नाम नहीं लिया।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने 17 जून को स्पष्ट किया कि पार्टी में टूट और असंतोष को लेकर मीडिया में चल रही खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा में पार्टी के नौ सांसद पूरी तरह सक्रिय और एकजुट हैं, और किसी बड़े विभाजन की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मीडिया रिपोर्टों पर राउत का खंडन

राउत ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से लगातार यह दावे किए जा रहे हैं कि पार्टी के कुछ सांसद या नेता अलग होने की तैयारी में हैं। उनके अनुसार, इन खबरों का कोई ठोस आधार नहीं है और कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है कि कोई नेता पार्टी क्यों छोड़ेगा। उन्होंने इन सभी रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात

राउत ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से औपचारिक मुलाकात की गई है। इस मुलाकात में पार्टी ने स्पीकर से आग्रह किया कि यदि किसी सदस्य के अलग होने या नई पार्टी बनाने की कोई प्रक्रिया शुरू होती है, तो उससे पहले शिवसेना (यूबीटी) का पक्ष अनिवार्य रूप से सुना जाए। पार्टी ने इस संबंध में एक औपचारिक आवेदन भी दाखिल किया है।

संवैधानिक प्रक्रिया की माँग

राउत ने ज़ोर देकर कहा कि दलबदल से जुड़े किसी भी मामले में संविधान, कानून और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन होना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की राजनीतिक तोड़-फोड़ को नियमों के दायरे में ही देखा जाना चाहिए, और इससे बाहर जाकर की गई कोई भी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी।

धन-बल के आरोपों पर इशारा

राउत ने यह भी कहा कि हाल की राजनीतिक चर्चाओं में विधायकों और सांसदों को प्रभावित करने के लिए धन से जुड़े आरोप लगाए जा रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने कथित तौर पर किसी व्यक्ति या दल का नाम नहीं लिया और कहा कि ऐसे मामलों की सच्चाई सार्वजनिक होनी चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति और पार्टी की स्थिति

राउत ने माना कि महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक का माहौल लगातार बना रहता है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह संगठित है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ने की बात कर रहे हैं, उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच जाकर अपनी स्थिति साबित करनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2022 की शिवसेना विभाजन की यादें अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित कर रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि पार्टी इस बार कानूनी और संवैधानिक मोर्चे पर पहले से तैयार रहना चाहती है। हालाँकि, धन-बल के आरोपों का बिना नाम लिए इशारा करना राजनीतिक दबाव की रणनीति भी हो सकती है। असली परीक्षा तब होगी जब — यदि कोई सदस्य अलग होता है — तो पार्टी यह साबित कर पाए कि उसके पास दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई के लिए पर्याप्त संख्याबल और साक्ष्य हैं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने शिवसेना (यूबीटी) में टूट की खबरों पर क्या कहा?
संजय राउत ने 17 जून को स्पष्ट किया कि पार्टी में टूट की सभी खबरें भ्रामक हैं और लोकसभा में पार्टी के नौ सांसद पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य के अलग होने का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात क्यों की?
पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर आग्रह किया कि यदि किसी सदस्य के अलग होने की प्रक्रिया शुरू हो, तो पहले पार्टी का पक्ष सुना जाए। इसके साथ ही पार्टी ने एक औपचारिक आवेदन भी दाखिल किया है।
दलबदल के मामले में राउत ने क्या माँग रखी?
राउत ने माँग की कि दलबदल से जुड़े किसी भी मामले में संविधान, कानून और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से हो। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक तोड़-फोड़ को नियमों के दायरे में ही देखा जाना चाहिए।
क्या शिवसेना (यूबीटी) पर पहले भी टूट का संकट आया है?
हाँ, 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत ने मूल शिवसेना को विभाजित कर दिया था, जिसके बाद उद्धव ठाकरे गुट को शिवसेना (यूबीटी) के नाम से जाना जाने लगा। वही पृष्ठभूमि अब नई अफवाहों को राजनीतिक संवेदनशीलता देती है।
राउत ने धन-बल के आरोपों पर क्या कहा?
राउत ने कथित तौर पर इशारा किया कि विधायकों और सांसदों को प्रभावित करने के लिए धन का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन उन्होंने किसी व्यक्ति या पार्टी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की सच्चाई सार्वजनिक होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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