शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा पत्र, बागी सांसदों को अलग मान्यता देने पर जताई कड़ी आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने 17 जून 2026 को पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के निर्देश पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र लिखकर पार्टी के कुछ असंतुष्ट सांसदों को लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता दिए जाने अथवा किसी अन्य राजनीतिक दल में उनके विलय की किसी भी संभावना पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से संपर्क में हैं।
पत्र में क्या कहा गया
सांसद अरविंद सावंत ने पत्र में स्पष्ट किया कि असली शिवसेना का प्रतिनिधित्व करने का दावा सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और यह पत्र उस दावे पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव डाले लिखा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिह्न पर चुने गए कुछ सांसद अध्यक्ष के कार्यालय से संपर्क कर रहे हैं या संपर्क करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि उन्हें सदन में अलग समूह की मान्यता मिल सके या वे किसी अन्य दल में विलय कर सकें।
सावंत ने जोर देकर कहा, 'शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) एक ही राजनीतिक दल है और कानून की नजर में भी यही स्थिति है।' उनके अनुसार, संवैधानिक ढाँचा सदन के भीतर एक ही राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई प्रतिस्पर्धी समूहों के अस्तित्व की परिकल्पना नहीं करता। इसलिए संसद में केवल एक ही अधिकृत पार्टी नेतृत्व, एक ही मान्यता प्राप्त व्हिप और एक ही मान्यता प्राप्त पार्टी संरचना हो सकती है।
संवैधानिक और कानूनी आधार
पत्र में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के उस ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया गया है जो 'सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र के राज्यपाल के प्रधान सचिव और अन्य' मामले में दिया गया था। इस फैसले के अनुसार, संविधान (91वाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत दसवीं अनुसूची के पैरा 3 को हटाए जाने के बाद राजनीतिक दल के भीतर 'विभाजन' को जो संवैधानिक मान्यता पहले प्राप्त थी, वह अब समाप्त हो चुकी है।
गौरतलब है कि इस संशोधन के बाद अब कोई भी सदस्य अयोग्यता की कार्यवाही से बचने के लिए राजनीतिक दल के भीतर विभाजन के दावे का सहारा नहीं ले सकता। इस प्रकार, संवैधानिक ढाँचा किसी दल के भीतर अलग गुट बनने को विधायिका में स्वतंत्र अस्तित्व के लिए वैध आधार नहीं मानता।
शिवसेना (यूबीटी) की माँगें
पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से तीन स्पष्ट माँगें रखी हैं। पहली — शिवसेना (यूबीटी) को सदन में उसके अधिकृत नेता और व्हिप के माध्यम से एकमात्र मान्यता प्राप्त दल के रूप में स्वीकृति मिलती रहे। दूसरी — पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी कथित गुट या अलग हुए समूह को कोई अलग मान्यता, दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा न दी जाए। तीसरी — यदि ऐसा कोई अनुरोध प्राप्त होता है, तो पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना कोई निर्णय न लिया जाए।
आगे क्या होगा
शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह दसवीं अनुसूची के प्रावधानों सहित कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकारों को सुरक्षित रखती है। यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दो धड़ों के बीच चल रहे दीर्घकालिक कानूनी संघर्ष का नया अध्याय है, और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले के परिणाम पर सबकी नज़र टिकी रहेगी।