शिवसेना (यूबीटी) में बार-बार टूट क्यों? विधायक किशोर पाटिल ने संजय राउत को दी आत्मचिंतन की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना विधायक किशोर पाटिल ने जलगांव में 18 जून को शिवसेना (यूबीटी) में लगातार हो रही टूट पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि संजय राउत और उनकी पार्टी के नेताओं को यह सोचना चाहिए कि आखिर उन्हीं के साथ बार-बार यह सब क्यों हो रहा है, जबकि अन्य दलों के साथ ऐसा नहीं होता। उनकी यह टिप्पणी उस समय आई जब शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
किशोर पाटिल का सीधा सवाल
विधायक किशोर पाटिल ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) में ही बार-बार टूट क्यों होती है — इस पर संजय राउत को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं है। गणेश नाइक, छगन भुजबल, नारायण राणे और एकनाथ शिंदे — सभी पार्टी छोड़ चुके हैं। पाटिल ने सवाल उठाया, 'क्या ये सभी गलत हैं और अकेले संजय राउत सही हैं? ऐसा नहीं हो सकता।'
राउत की 'उलटी-सीधी बयानबाजी' पर निशाना
किशोर पाटिल ने संजय राउत को सलाह दी कि वे बेतुकी बयानबाजी करने के बजाय पार्टी में टूट के असली कारणों का पता लगाएं। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को आत्मचिंतन करना चाहिए, न कि दूसरों पर दोष मढ़ते रहना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब संजय राउत ने संभावित रूप से पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें 'सबक सिखाने' की बात कही थी।
जमीनी हकीकत: 90% शिवसैनिक शिंदे के साथ
किशोर पाटिल ने दावा किया कि 90 प्रतिशत शिवसैनिक अब एकनाथ शिंदे के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जमीन पर काम करने के लिए कार्यकर्ताओं की जरूरत होती है और शिवसेना (यूबीटी) के पास अब न नेता बचे हैं, न कार्यकर्ता। ऐसे में वे किसे निर्देश देने की कोशिश कर रहे हैं, यह समझ से परे है।
सांसदों की सुरक्षा और स्थापना दिवस का संदेश
संजय राउत की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए किशोर पाटिल ने स्पष्ट किया कि न राउत, न कोई और — शिवसेना के सांसदों को कोई हाथ नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को शिवसेना का स्थापना दिवस है और उसी दिन ये सांसद शिवसेना के साथ दिखाई देंगे, जो पार्टी की एकजुटता का प्रमाण होगा।
पृष्ठभूमि: 6 सांसदों के जाने की आशंका
गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस पर संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इन सांसदों के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया। यह 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद से शिवसेना में दूसरी बड़ी उथल-पुथल मानी जा रही है, जिसने पार्टी को दो धड़ों में विभाजित कर दिया था। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ये सांसद औपचारिक रूप से कौन-सा रास्ता चुनते हैं।