सचिन अहीर के शिंदे खेमे में जाने पर संजय राउत का पलटवार: 'स्वार्थी लोगों के जाने का दुख क्यों?'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने मंगलवार, 30 जून को पार्टी विधायक सचिन अहीर के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। राउत ने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग केवल निजी स्वार्थ लेकर पार्टी में आए थे, उनके जाने पर अफसोस करने की कोई वजह नहीं है।
राउत का तीखा बयान
राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पार्टी छोड़ने वालों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए लिखा, 'रोशनी की चार किरणों की उम्मीद ही क्यों करें? उनका इंतजार क्यों करें जो कभी सच में हमारे थे ही नहीं?' इसके बाद उन्होंने और सीधे शब्दों में कहा, 'जो लोग पहले से ही स्वार्थ और बेईमानी की भावना लेकर पार्टी में आते हैं, उनके जाने का दुख क्यों मनाया जाए?'
आदित्य ठाकरे की निराशा
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी गहरी निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा, 'हम पिछले चार दिनों से, बल्कि पिछले चार सालों से देख रहे हैं, जो लोग सबसे करीबी थे और जिन्हें सब कुछ मिला, वही अपने स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं। इसलिए, इसमें कोई हैरानी या चौंकाने वाली बात नहीं है।'
आदित्य ने यह भी कहा कि वर्ली और सेवरी जैसे इलाके हमेशा से शिवसेना के गढ़ रहे हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने अहीर से सवाल किया, 'ऐसे में सवाल उठता है कि आपको और क्या चाहिए? क्या अब हम आपके लिए रोज पूजा-पाठ करें?'
सचिन अहीर का पलटवार
उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए सचिन अहीर ने इन आरोपों का कड़ा खंडन किया। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब तक हम साथ थे, हमें अच्छा माना जाता था, लेकिन जैसे ही हम अलग हुए, हमें नाकाबिल करार दिया गया। मैं इस आलोचना का जवाब सही राजनीतिक मंच पर दूंगा।'
राउत के 'स्वार्थ' वाले आरोप पर पलटवार करते हुए अहीर ने कहा, 'क्या मैं तब स्वार्थी नहीं था जब मैंने पहले उनके ग्रुप को जॉइन किया था? अगर तब नहीं था, तो अब क्यों हूं? मैंने हमेशा उद्धव और आदित्य ठाकरे द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरी लगन से निभाने की कोशिश की है।'
अहीर का अपना पक्ष
अहीर ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) में रहते हुए उन्होंने पुणे जिले में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए जोर-शोर से काम किया। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेटर, विधायक और मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमेशा सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना से कोई वरिष्ठ नेता शिंदे खेमे की ओर गया हो — 2022 की बगावत के बाद से यह सिलसिला जारी है और हर ऐसे प्रकरण में उद्धव ठाकरे गुट के भीतर आक्रोश और आत्ममंथन की लहर उठती है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
अहीर के शिंदे खेमे में शामिल होने से वर्ली और सेवरी क्षेत्र में शिवसेना (यूबीटी) की जमीनी ताकत पर असर पड़ सकता है। आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर यह घटनाक्रम दोनों गुटों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।