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सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति निर्विरोध चुने गए, शिवसेना (यूबीटी) को एक और झटका

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सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति निर्विरोध चुने गए, शिवसेना (यूबीटी) को एक और झटका

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने के महज 24 घंटे के भीतर सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति बन गए। MVA उम्मीदवार के नाम वापसी के बाद यह चुनाव निर्विरोध रहा। उद्धव ठाकरे खेमे के लिए यह एक और बड़ा राजनीतिक झटका है।

मुख्य बातें

सचिन अहीर को 1 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद का उप-सभापति निर्विरोध चुना गया।
अहीर ने चुनाव से महज 24 घंटे पहले शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे के शिवसेना गुट में प्रवेश किया।
MVA उम्मीदवार जे.एम.
अभ्यंकर ने विधान परिषद की परंपराओं का हवाला देते हुए अपनी उम्मीदवारी वापस ली।
अहीर जुलाई 2022 में 'धनुष-बाण' चिह्न पर चुने गए थे, जो अब शिंदे गुट के पास है — इसलिए दल-बदल विरोधी कार्यवाही का खतरा नहीं।
यह शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक और झटका है; हाल ही में पार्टी के 6 लोकसभा सांसद भी पाला बदल चुके हैं।

महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर को बुधवार, 1 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद का उप-सभापति निर्विरोध चुना गया। यह चुनाव उस राजनीतिक उथल-पुथल के महज़ 24 घंटे के भीतर हुआ, जब अहीर ने शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट का दामन थामा। उद्धव ठाकरे खेमे के लिए यह एक और बड़ा राजनीतिक नुकसान है।

निर्विरोध चुनाव कैसे संभव हुआ

विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार जे.एम. अभ्यंकर ने ऊपरी सदन की पारंपरिक सहयोगी परंपराओं का सम्मान करते हुए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। MVA नेताओं के अनुसार, यह निर्णय राज्य विधानमंडल की गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। विपक्ष की चुनौती हटते ही अहीर के उप-सभापति पद पर चुनाव की औपचारिक घोषणा कर दी गई।

मुख्य राजनीतिक घटनाक्रम

सचिन अहीर मूल रूप से जुलाई 2022 में संयुक्त शिवसेना के 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न पर विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए थे — वही चुनाव चिह्न जिसे अब शिंदे गुट के पास मान्यता प्राप्त है। इस कारण उनके दल-बदल पर दल-बदल विरोधी अयोग्यता की कार्यवाही शुरू होने की कोई कानूनी बाधा नहीं है। मंगलवार को उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदेसुनेत्रा पवार की उपस्थिति में अपना नामांकन दाखिल किया था।

सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के अनेक सदस्यों ने अहीर को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। शिंदे ने कहा कि नगर निकाय समन्वय, विधायी मामलों और मुंबई की मजदूर संघ राजनीति में अहीर का व्यापक अनुभव महायुति गठबंधन के ऊपरी सदन के कामकाज को और मज़बूत करेगा।

शिवसेना (यूबीटी) को बढ़ता नुकसान

अहीर की विदाई उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) खेमे के लिए एक के बाद एक झटकों की श्रृंखला में ताज़ा कड़ी है। गौरतलब है कि हाल ही में पार्टी के छह लोकसभा सांसद भी पाला बदल चुके हैं। अहीर को आदित्य ठाकरे के करीबी सहयोगी के रूप में जाना जाता था, जिससे यह प्रस्थान और भी राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

आगे क्या

उप-सभापति के रूप में सचिन अहीर का यह पद महायुति गठबंधन की विधान परिषद में पकड़ को और मज़बूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) की कमज़ोर होती स्थिति और महायुति के बढ़ते दबदबे का स्पष्ट संकेत है। आने वाले दिनों में विपक्ष की रणनीति पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) की संरचनात्मक कमज़ोरी का प्रतिबिंब है। छह लोकसभा सांसदों के बाद अब एक वरिष्ठ एमएलसी का जाना यह संकेत देता है कि उद्धव ठाकरे का खेमा अपने जनप्रतिनिधियों को एकजुट रखने में संघर्ष कर रहा है। MVA द्वारा उम्मीदवारी वापस लेना 'परंपरा' के नाम पर हुआ, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि संख्याबल के अभाव में विपक्ष के पास वास्तविक विकल्प सीमित थे। महायुति के लिए यह विधायी नियंत्रण मज़बूत करने का अवसर है, पर असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये दल-बदल जनता के बीच विश्वसनीयता बनाते हैं या केवल सत्ता की सुविधाजनक पुनर्व्यवस्था बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन अहीर कौन हैं और वे महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति कैसे बने?
सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य (MLC) हैं, जो जुलाई 2022 में शिवसेना के 'धनुष-बाण' चिह्न पर निर्वाचित हुए थे। 1 जुलाई 2026 को शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने के 24 घंटे के भीतर MVA उम्मीदवार की नाम वापसी के बाद वे निर्विरोध उप-सभापति चुने गए।
क्या सचिन अहीर के दल-बदल पर अयोग्यता की कार्यवाही हो सकती है?
नहीं। चूँकि अहीर मूल रूप से उस 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न पर चुने गए थे जिसे अब शिंदे गुट के पास मान्यता प्राप्त है, इसलिए दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का कोई खतरा नहीं है।
MVA ने अपना उम्मीदवार क्यों वापस लिया?
MVA नेताओं ने कहा कि जे.एम. अभ्यंकर ने राज्य विधानमंडल की गरिमा और सहयोगी परंपराओं को बनाए रखने के उद्देश्य से अपनी उम्मीदवारी वापस ली। हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संख्याबल की कमी भी इस निर्णय की एक प्रमुख वजह रही।
शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह घटना कितनी बड़ी राजनीतिक क्षति है?
यह उद्धव ठाकरे के खेमे के लिए हालिया झटकों में एक और कड़ी है। इससे पहले पार्टी के छह लोकसभा सांसद पाला बदल चुके हैं। अहीर को आदित्य ठाकरे के करीबी सहयोगी के रूप में जाना जाता था, जिससे यह प्रस्थान और भी राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
महायुति गठबंधन को इस चुनाव से क्या फायदा होगा?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अनुसार, नगर निकाय समन्वय, विधायी मामलों और मुंबई की मजदूर संघ राजनीति में अहीर के अनुभव से महायुति का विधान परिषद में कामकाज मज़बूत होगा। उप-सभापति पद पर कब्ज़े से गठबंधन की ऊपरी सदन में पकड़ और सुदृढ़ हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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