सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन निर्विरोध चुने, शिंदे ने बताया 'मास्टर ब्लास्टर'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 1 जुलाई 2026 को सचिन अहीर को महाराष्ट्र विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन पद पर निर्विरोध निर्वाचित होने पर बधाई दी। शिंदे ने अहीर को राजनीति और समाज सेवा का 'मास्टर ब्लास्टर' बताते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की सराहना की।
मुख्य घटनाक्रम
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने अहीर की तुलना क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर से करते हुए कहा, 'बॉलर कोई भी हो या डिलीवरी कितनी भी तेज हो, सचिन अहीर छक्के मारना कभी बंद नहीं करते। जैसे सचिन तेंदुलकर क्रिकेट में लेजेंड हैं, वैसे ही सचिन अहीर पॉलिटिक्स और सोशल वर्क में भी एक बड़े नाम हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जैसे एक सचिन ने क्रिकेट से विदाई ली, वैसे ही दूसरे सचिन ने एक शानदार नई पारी की शुरुआत की है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
शिंदे ने स्मरण कराया कि उनकी पार्टी ने 2019 में अहीर को शिवसेना उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया था। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अहीर आज भी एक प्रतिबद्ध शिवसैनिक हैं। शिंदे ने गर्व जताया कि नीलम गोरहे के बाद शिवसेना का एक और नेता इस प्रतिष्ठित संवैधानिक पद पर आसीन हुआ है। अहीर तीन बार विधायक और राज्य मंत्री रह चुके हैं, फिर भी उन्होंने आम जनता से अपना जुड़ाव कभी नहीं तोड़ा।
समाज सेवा की विरासत
शिंदे ने संकल्प प्रतिष्ठान के माध्यम से अहीर के सामाजिक कार्यों की सराहना की। इस संस्था ने पारंपरिक दही हांडी उत्सव को मेडिकल कैंप और ब्लड डोनेशन ड्राइव जैसे सामाजिक कार्यों के मंच में बदल दिया। शिंदे ने कहा कि यह बालासाहेब ठाकरे के '80 प्रतिशत सामाजिक कार्य और 20 प्रतिशत राजनीति' के मंत्र की सच्ची अभिव्यक्ति है। अहीर के शांत स्वभाव और लोकप्रियता की तारीफ करते हुए शिंदे ने उर्दू के दोहे भी पढ़े — 'जो तूफानों में शांत रहे, उसे समंदर कहते हैं... जो हर दिल पर राज करे, उसे सिकंदर कहते हैं।'
संवैधानिक दायित्व पर संदेश
शिंदे ने नवनिर्वाचित डिप्टी चेयरमैन को पद की गरिमा और तटस्थता के बारे में स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक बार उस कुर्सी पर बैठने के बाद नियम पार्टी से बड़े हो जाते हैं, परम्पराएँ भावनाओं से ऊपर हो जाती हैं, और संयम आवाज़ से अधिक शक्तिशाली हो जाता है। उन्होंने जोर दिया कि यह नियम सत्ता पक्ष पर भी समान रूप से लागू होता है और विपक्ष को भी न्याय मिलना चाहिए। शिंदे के अनुसार, उस आसन से केवल डॉ. बी.आर. अंबेडकर का संविधान और न्याय के सिद्धांत ही प्रतिबिंबित होने चाहिए।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि स्वर्गीय अजित पवार ने कम उम्र में ही अहीर की नेतृत्व क्षमता को पहचान लिया था और उन्हें बड़े राजनीतिक अवसर दिए। उन्होंने बताया कि अजित पवार और सचिन अहीर के बीच का रिश्ता राजनीति से परे पारिवारिक स्नेह पर आधारित था। विधान परिषद के चेयरमैन राम शिंदे ने भी अहीर को बधाई देते हुए कहा कि अब बैट्समैन का बल्ला छोड़ अंपायर की टोपी पहनने का समय आ गया है, और उम्मीद जताई कि वे सदन की कार्यवाही संतुलन, धैर्य और पूर्ण निष्पक्षता के साथ संचालित करेंगे।
सचिन अहीर का यह नया संवैधानिक दायित्व महाराष्ट्र की विधायी राजनीति में शिवसेना (शिंदे गुट) की बढ़ती भूमिका का संकेत देता है।