1 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति निर्विरोध चुने गए, CM फडणवीस ने की तारीफ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति निर्विरोध चुने गए, CM फडणवीस ने की तारीफ

सारांश

महाराष्ट्र विधान परिषद में सचिन अहीर का निर्विरोध उप-सभापति बनना महायुति गठबंधन की एकजुटता का संकेत है। CM फडणवीस ने शरद पवार के राजनीतिक स्कूल और 1999 से चले आ रहे पुराने साथ का हवाला देकर इस नियुक्ति को भावनात्मक और रणनीतिक — दोनों स्तरों पर वैध ठहराया।

मुख्य बातें

सचिन अहीर को 1 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद का उप-सभापति निर्विरोध चुना गया।
CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अहीर ने शरद पवार की देखरेख में राजनीतिक प्रशिक्षण लिया और उनमें सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता है।
अहीर 1999 में पहली बार MLA बने, लगातार तीन बार विधायक रहे और 2009 में राज्य मंत्री बने।
फडणवीस ने 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न का हवाला देकर नियुक्ति की कानूनी वैधता स्पष्ट की।
पूर्व उप-सभापति नीलम गोर्हे को भी उनके कार्यकाल के लिए सराहा गया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 जुलाई 2026 को सचिन अहीर के महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति पद पर निर्विरोध निर्वाचित होने पर उन्हें बधाई दी और उनकी खुलकर प्रशंसा की। फडणवीस ने कहा कि अहीर ने वरिष्ठ नेता शरद पवार की छत्रछाया में राजनीतिक प्रशिक्षण लिया है, इसलिए उनमें सही समय पर सही निर्णय लेने की विशेष क्षमता है।

मुख्यमंत्री की प्रशंसा और व्यक्तिगत संबंध

मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने और सचिन अहीर के बीच के पुराने रिश्ते का उल्लेख करते हुए कहा, 'सचिन अहीर और मैं 1999 में एक साथ चुने गए थे।' उन्होंने बताया कि 'अहीर' शब्द का शाब्दिक अर्थ ग्वाला और निडर व्यक्ति होता है, और उनके व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर सचिन अहीर सच में एक निडर कार्यकर्ता हैं। फडणवीस ने विपक्ष का भी धन्यवाद किया, जिसने उप-सभापति पद के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया।

सचिन अहीर का राजनीतिक सफर

सचिन अहीर का करियर जमीनी आंदोलनों से जुड़ा रहा है। उन्होंने मजदूरों के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से काम किया और मिल मजदूर सभा के पदाधिकारी रहे। वे 1999 में पहली बार विधानसभा सदस्य (MLA) बने और लगातार तीन बार चुनाव जीते। 2009 में उन्होंने राज्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। फडणवीस ने याद किया कि सचिन अहीर एक ऐसे मंत्री के रूप में जाने जाते थे जो हमेशा सटीक और तथ्यपरक जवाब देते थे।

2019 का चुनाव और वर्ली का प्रसंग

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2019 के विधानसभा चुनाव में सचिन अहीर वर्ली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्होंने और सुनील शिंदे दोनों ने वहाँ से अपना दावा छोड़ दिया। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने परोक्ष रूप से उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा।

नियुक्ति की वैधानिकता पर स्पष्टीकरण

फडणवीस ने अहीर की नियुक्ति की कानूनी वैधता को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सचिन अहीर सदन में 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न के अंतर्गत आए थे, इसलिए उनकी नियुक्ति में कोई तकनीकी बाधा नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब नीलम गोर्हे उप-सभापति बनी थीं, तब भी विपक्ष की आपत्तियों को इसी तरह सुलझाया गया था।

नीलम गोर्हे को भी मिली बधाई

मुख्यमंत्री ने पूर्व उप-सभापति नीलम गोर्हे को भी बधाई दी और राजनीतिक उठापटक के दौर में उनके दृढ़ रुख तथा बेहतरीन कामकाज की सराहना की। फडणवीस ने अहीर के प्रसिद्ध दही-हांडी आयोजनों और सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान का भी विशेष उल्लेख किया। अब सबकी नज़रें इस बात पर होंगी कि उप-सभापति के रूप में सचिन अहीर सदन की कार्यवाही में किस तरह निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब वे विपक्ष के तीखे सवालों के बीच सदन की कुर्सी से निष्पक्षता दिखाएँगे। फडणवीस का उद्धव ठाकरे पर परोक्ष निशाना बताता है कि 2019 के वर्ली प्रसंग की कड़वाहट अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति में जीवित है। यह नियुक्ति तकनीकी रूप से निर्विवाद हो सकती है, पर राजनीतिक रूप से यह उस पुराने शिवसेना खेमे को एक और संदेश है जो अब विपक्ष में बैठा है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन अहीर को महाराष्ट्र विधान परिषद का उप-सभापति कब चुना गया?
सचिन अहीर को 1 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति पद पर निर्विरोध चुना गया। विपक्ष ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे यह चुनाव निर्विवाद रहा।
CM देवेंद्र फडणवीस ने सचिन अहीर की तारीफ क्यों की?
फडणवीस ने कहा कि अहीर ने शरद पवार की देखरेख में राजनीतिक प्रशिक्षण लिया है और उनमें सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता है। दोनों 1999 में एक साथ विधायक बने थे, इसलिए फडणवीस का यह मूल्यांकन व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित बताया गया।
सचिन अहीर का राजनीतिक करियर कैसा रहा है?
सचिन अहीर 1999 में पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने और लगातार तीन बार चुनाव जीते। 2009 में वे राज्य मंत्री भी रहे और मिल मजदूर सभा के पदाधिकारी के रूप में श्रमिक आंदोलनों से जुड़े रहे।
सचिन अहीर की नियुक्ति को लेकर कानूनी विवाद क्यों उठा?
कुछ पक्षों ने अहीर की पार्टी-संबद्धता को लेकर तकनीकी सवाल उठाए थे। CM फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अहीर सदन में 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न के अंतर्गत आए थे, इसलिए उनकी नियुक्ति पूरी तरह वैध और कानूनसम्मत है।
नीलम गोर्हे कौन हैं और उनका इस नियुक्ति से क्या संबंध है?
नीलम गोर्हे महाराष्ट्र विधान परिषद की पूर्व उप-सभापति हैं। CM फडणवीस ने सचिन अहीर के निर्वाचन के अवसर पर गोर्हे के कार्यकाल की भी सराहना की और राजनीतिक उठापटक के दौर में उनके दृढ़ नेतृत्व को रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. 21 घंटे पहले
  4. कल
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले