वारिस पठान का UBT के 6 बागी सांसदों पर तंज: 'असली गद्दार कौन, जनता ने देख लिया'
सारांश
मुख्य बातें
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने 23 जून को मुंबई में उद्धव ठाकरे के यूबीटी गुट के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल होने पर कड़ा प्रहार किया। पठान ने सीधे शब्दों में कहा कि इन सांसदों का असली चेहरा अब जनता के सामने आ चुका है।
मुसलमान मतदाताओं से विश्वासघात का आरोप
पठान ने कहा, 'मैं उन तथाकथित सेक्युलर पार्टियों के नेताओं से पूछना चाहता हूँ जो महाराष्ट्र की हर गली में जाकर मुसलमानों को 'मशाल' चुनाव चिह्न पर वोट देने के लिए कह रहे थे। मुसलमानों ने उनकी बात मानकर भारी संख्या में वोट किया। अब वोट लेने के बाद वे दूसरे दल में शामिल हो गए।'
उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने 'सब कुछ दूसरे दल को हवाले कर दिया है' और अब वे अपने बयानों से मुसलमानों पर हमला करेंगे। पठान ने चेतावनी दी कि जब ये सांसद अपने संसदीय क्षेत्रों में जाएंगे, तो जनता उनसे जवाब माँगेगी।
शिवसेना प्रवक्ता की प्रतिक्रिया
शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता किरण पावस्कर ने इस विलय को पार्टी की वैचारिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि जब 6 सांसद शिवसेना में शामिल हो रहे थे, उस समय एकनाथ शिंदे और पार्टी के कई मंत्री मौजूद थे। पावस्कर ने दावा किया कि इन सांसदों ने उद्धव ठाकरे और उनके गुट की नीतियों से नाराज़ होकर पार्टी छोड़ी। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए कहा कि शिंदे ने अपने बेटे को निर्देश दिया है कि नए सदस्यों का ध्यान रखा जाए।
लखनऊ कोचिंग हादसे पर पठान की माँग
वारिस पठान ने लखनऊ में हुए कोचिंग संस्थान अग्निकांड पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस हादसे में कथित तौर पर लगभग 15 लोगों की जान चली गई, जो अत्यंत दुखद है। पठान ने कहा, 'घटनास्थल के वीडियो दिल दहला देने वाले हैं, जिनमें छात्र बैग लटकाए और तारों का सहारा लेकर बाहर निकलने की कोशिश करते दिख रहे हैं।'
उन्होंने सरकार से माँग की कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें जेल भेजा जाए। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद से यूबीटी गुट और शिंदे गुट के बीच सांसदों और विधायकों की खींचतान जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज़ हो रही है। पठान का यह बयान उस व्यापक राजनीतिक बहस को और तीखा करता है जिसमें अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ विश्वास और प्रतिनिधित्व का सवाल केंद्र में है।