शायना एनसी का दावा: एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना, यूबीटी सांसदों के आने का स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता शायना एनसी ने 22 जून को स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में एकमात्र वैध शिवसेना उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी है। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में संभावित विलय की खबरों का खुले तौर पर स्वागत किया और इसे जनता के बदलते मिज़ाज का संकेत बताया।
शिंदे गुट की बढ़ती ताकत
शायना एनसी ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में यह तथ्य अब निर्विवाद है कि असली शिवसेना एकनाथ शिंदे के साथ है। उन्होंने याद दिलाया कि जब विधानसभा में 40 विधायक शिंदे के साथ आए थे, तभी पार्टी की जड़ों की मज़बूती सामने आई थी। बाद में हुए विधानसभा चुनाव में भी शिंदे गुट ने शानदार प्रदर्शन किया, जो जनसमर्थन का प्रमाण है।
उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला
शायना एनसी ने उद्धव ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब उन्होंने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर सरकार बनाई, तब हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे की विचारधारा कहाँ थी? उनका आरोप था कि उस दौर में राजनीतिक सत्ता के लिए बाला साहेब की विचारधारा को दरकिनार किया गया और अब विचारधारा की दुहाई दी जा रही है।
दल-बदल और संवैधानिक प्रावधान
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के संभावित विलय पर शायना एनसी ने कहा कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद या विधायक किसी अन्य समूह में जाते हैं, तो संविधान और दल-बदल विरोधी कानून के तहत विलय का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। उन्होंने यूबीटी नेतृत्व को सलाह दी कि वे आत्ममंथन करें कि उनके जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर क्यों जा रहे हैं। उनके अनुसार, जब संवाद की जगह आरोप-प्रत्यारोप और अभद्र भाषा ले लेती है, तो लोग स्वाभाविक रूप से दूसरे विकल्प की तलाश करते हैं।
संजय राउत के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि भगवान राम के आशीर्वाद से सत्ता में आई भाजपा अब राम के श्राप से सत्ता से बाहर होगी — शायना एनसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राउत के ऐसे बयान उनकी राजनीतिक हताशा को उजागर करते हैं और राजनीतिक गंभीरता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। उनका यह भी आरोप था कि राउत का एकमात्र उद्देश्य उद्धव ठाकरे की पार्टी को नुकसान पहुँचाना है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच यह खींचतान ऐसे समय में तेज़ हो रही है जब यूबीटी के भीतर असंतोष के संकेत मिल रहे हैं। गौरतलब है कि यह विवाद तब और गहरा होता दिख रहा है जब राज्य की राजनीति में महायुति गठबंधन की स्थिति मज़बूत बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में यूबीटी सांसदों के किसी भी संभावित कदम से मुंबई की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।