10 अगस्त 2026
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शायना एनसी का दावा: एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना, यूबीटी सांसदों के आने का स्वागत

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शायना एनसी का दावा: एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना, यूबीटी सांसदों के आने का स्वागत

सारांश

शिवसेना नेता शायना एनसी ने खुलकर कहा कि एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना है। यूबीटी सांसदों के संभावित विलय का स्वागत करते हुए उन्होंने उद्धव ठाकरे की विचारधारा पर सवाल उठाए और संजय राउत के बयान को राजनीतिक हताशा करार दिया। महाराष्ट्र में शिवसेना की अंदरूनी उठापटक एक नए मोड़ पर है।

मुख्य बातें

शायना एनसी ने 22 जून को दावा किया कि एकनाथ शिंदे गुट ही महाराष्ट्र की एकमात्र वैध शिवसेना है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में संभावित विलय का स्वागत किया; संवैधानिक दो-तिहाई विलय प्रावधान का हवाला दिया।
उद्धव ठाकरे पर आरोप — 2019 में कांग्रेस-NCP के साथ सरकार बनाकर बाला साहेब ठाकरे की विचारधारा को नज़रअंदाज़ किया।
संजय राउत के 'राम के श्राप' वाले बयान को राजनीतिक हताशा का प्रमाण बताया।
यूबीटी नेतृत्व से आत्ममंथन की माँग — कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के पार्टी छोड़ने के कारण तलाशें।

शिवसेना नेता शायना एनसी ने 22 जून को स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में एकमात्र वैध शिवसेना उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी है। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में संभावित विलय की खबरों का खुले तौर पर स्वागत किया और इसे जनता के बदलते मिज़ाज का संकेत बताया।

शिंदे गुट की बढ़ती ताकत

शायना एनसी ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में यह तथ्य अब निर्विवाद है कि असली शिवसेना एकनाथ शिंदे के साथ है। उन्होंने याद दिलाया कि जब विधानसभा में 40 विधायक शिंदे के साथ आए थे, तभी पार्टी की जड़ों की मज़बूती सामने आई थी। बाद में हुए विधानसभा चुनाव में भी शिंदे गुट ने शानदार प्रदर्शन किया, जो जनसमर्थन का प्रमाण है।

उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला

शायना एनसी ने उद्धव ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब उन्होंने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर सरकार बनाई, तब हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे की विचारधारा कहाँ थी? उनका आरोप था कि उस दौर में राजनीतिक सत्ता के लिए बाला साहेब की विचारधारा को दरकिनार किया गया और अब विचारधारा की दुहाई दी जा रही है।

दल-बदल और संवैधानिक प्रावधान

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के संभावित विलय पर शायना एनसी ने कहा कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद या विधायक किसी अन्य समूह में जाते हैं, तो संविधान और दल-बदल विरोधी कानून के तहत विलय का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। उन्होंने यूबीटी नेतृत्व को सलाह दी कि वे आत्ममंथन करें कि उनके जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर क्यों जा रहे हैं। उनके अनुसार, जब संवाद की जगह आरोप-प्रत्यारोप और अभद्र भाषा ले लेती है, तो लोग स्वाभाविक रूप से दूसरे विकल्प की तलाश करते हैं।

संजय राउत के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि भगवान राम के आशीर्वाद से सत्ता में आई भाजपा अब राम के श्राप से सत्ता से बाहर होगी — शायना एनसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राउत के ऐसे बयान उनकी राजनीतिक हताशा को उजागर करते हैं और राजनीतिक गंभीरता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। उनका यह भी आरोप था कि राउत का एकमात्र उद्देश्य उद्धव ठाकरे की पार्टी को नुकसान पहुँचाना है।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच यह खींचतान ऐसे समय में तेज़ हो रही है जब यूबीटी के भीतर असंतोष के संकेत मिल रहे हैं। गौरतलब है कि यह विवाद तब और गहरा होता दिख रहा है जब राज्य की राजनीति में महायुति गठबंधन की स्थिति मज़बूत बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में यूबीटी सांसदों के किसी भी संभावित कदम से मुंबई की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सत्यापित नहीं है। उद्धव ठाकरे पर 2019 की विचारधारा-विरोधी गठबंधन का आरोप पुराना है, लेकिन इसे बार-बार उठाना बताता है कि शिंदे गुट के पास नई वैचारिक जमीन कम है। असली सवाल यह है कि क्या यूबीटी से टूटने वाले नेता वाकई विचारधारा से प्रेरित हैं या सत्ता की निकटता उनका असल कारण है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शायना एनसी ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना क्यों बताया?
शायना एनसी का तर्क है कि विधानसभा में 40 विधायकों का शिंदे के साथ आना और बाद के चुनावों में शिंदे गुट का प्रदर्शन यह साबित करता है कि जनसमर्थन उन्हीं के साथ है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा शिंदे गुट को असली शिवसेना की मान्यता मिलना भी इसका प्रमाण है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों का शिंदे गुट में विलय कैसे संभव होगा?
शायना एनसी के अनुसार, संविधान और दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद या विधायक किसी अन्य समूह में जाते हैं, तो विलय का प्रावधान लागू होता है। हालाँकि अभी तक यूबीटी के कितने सांसद वास्तव में ऐसा कदम उठाएँगे, यह स्पष्ट नहीं है।
शायना एनसी ने उद्धव ठाकरे पर क्या आरोप लगाए?
शायना एनसी ने आरोप लगाया कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और NCP के साथ सरकार बनाकर बाला साहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को राजनीतिक लाभ के लिए नज़रअंदाज़ किया। उनके अनुसार, अब विचारधारा की दुहाई देना विरोधाभासी है।
संजय राउत के 'राम के श्राप' वाले बयान पर शायना एनसी की क्या प्रतिक्रिया थी?
शायना एनसी ने संजय राउत के उस बयान को — जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा राम के श्राप से सत्ता से बाहर होगी — राजनीतिक हताशा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान राजनीतिक गंभीरता से परे हैं और इनका एकमात्र उद्देश्य यूबीटी पार्टी को नुकसान पहुँचाना है।
यूबीटी से नेताओं के जाने का कारण क्या बताया गया?
शायना एनसी के अनुसार, जब पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं होता और संवाद की जगह आरोप-प्रत्यारोप तथा अभद्र भाषा का इस्तेमाल होता है, तो लोग स्वाभाविक रूप से दूसरे विकल्प तलाशते हैं। उन्होंने यूबीटी नेतृत्व से इस पर आत्ममंथन करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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