शिंदे की शिवसेना ही बाला साहेब की असली विरासत — गौरव वल्लभ का उद्धव गुट पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने 23 जून को नई दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के पाला बदलने की खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि बाला साहेब ठाकरे की विचारधारा का वास्तविक वाहक आज महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एकनाथ शिंदे की शिवसेना है, न कि उद्धव ठाकरे का गुट।
मुख्य आरोप: विचारधारा से समझौता
वल्लभ ने कहा कि बाला साहेब की विचारधारा को मानने वाला कोई भी शिवसैनिक कांग्रेस के साथ गठबंधन स्वीकार नहीं कर सकता। उनके अनुसार, उद्धव ठाकरे ने उस राजनीतिक रास्ते को अपना लिया है, जिसके विरुद्ध बाला साहेब ने जीवनभर संघर्ष किया था। उन्होंने कहा, 'यदि बाला साहेब ठाकरे यह सब देख रहे होंगे तो उन्हें बेहद दुख हो रहा होगा, क्योंकि जिस विचारधारा के खिलाफ उन्होंने पूरी जिंदगी लड़ाई लड़ी, उसी के साथ उनका पुत्र राजनीतिक साझेदारी कर रहा है।'
उद्धव गुट की स्थिति पर टिप्पणी
वल्लभ ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ अब केवल गिने-चुने नेता ही शेष हैं और वे भी कांग्रेस के साथ खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि उद्धव गुट के भीतर से भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया जा चुका है कि उद्धव ठाकरे अपने गुट का कांग्रेस में विलय करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, जो लोग बाला साहेब की विचारधारा से हटकर कांग्रेस के साथ चले गए, वे आज सत्ता से बाहर हैं और राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं।
नीट-यूजी विवाद पर कांग्रेस को घेरा
इसी प्रेस वार्ता में वल्लभ ने नीट-यूजी परीक्षा के मुद्दे पर विपक्ष की राजनीति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में कांग्रेस की रैली के कारण नीट परीक्षार्थी परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुँच सके। उन्होंने इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान उन्होंने दिल्ली एयरपोर्ट पर ही रुकना पसंद किया ताकि कोई व्यवधान न हो।
विपक्ष पर छात्र-राजनीति का आरोप
वल्लभ ने कहा कि विपक्ष के नेता छात्रों के कंधों पर सवार होकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, जो नेता स्वयं कभी किसी प्रतियोगी परीक्षा में नहीं बैठे, वे आज छात्रों को परीक्षा का ज्ञान दे रहे हैं। यह टिप्पणी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की ओर सीधे निर्देशित थी। आने वाले दिनों में शिवसेना विभाजन और नीट विवाद दोनों मुद्दों पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।