शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर मनीषा कायंदे का दावा: शिंदे ने पार्टी को हिंदुत्व की राह पर वापस लाया
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने 19 जून 2026 को पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को उसकी मूल हिंदुत्व विचारधारा पर वापस लाने का काम किया है, जबकि उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों से मुँह मोड़कर कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। कायंदे ने यह बयान मुंबई में पार्टी के स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर दिया।
60 साल का सफर और हिंदुत्व की विरासत
कायंदे ने कहा, बालासाहेब ठाकरे द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को 60 वर्ष पूरे होना किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ने हमेशा हिंदुत्व की राह पर चलते हुए अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया। उनके अनुसार, एकनाथ शिंदे, धर्मवीर आनंद दिघे और बालासाहेब के अन्य सहयोगी आज भी उसी मार्ग पर अडिग हैं।
उद्धव ठाकरे पर सीधा निशाना
कायंदे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि राउत ने बालासाहेब के पुराने वीडियो को 'चुनिंदा तौर पर' प्रस्तुत किया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि 2019 में जनता ने शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बहुमत दिया था — उस जनादेश को किसने नकारा, यह सवाल उन्होंने उद्धव गुट से किया।
6 बागी सांसदों को वाई प्लस सुरक्षा पर सफाई
शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों को वाई प्लस सुरक्षा दिए जाने के निर्णय का बचाव करते हुए कायंदे ने कहा कि जब किसी कार्यकर्ता की ओर से खुलेआम धमकियाँ दी जाएँ — जैसे 'मारो' और 'गाड़ियाँ जलाओ' — तो सरकार और पुलिस का दायित्व है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा उसी जिम्मेदारी के तहत दी गई है।
उद्धव गुट पर तंज और शिंदे गुट की रणनीति
कायंदे ने उद्धव ठाकरे के गुट पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके कार्यक्रम में 'आत्ममंथन' की बैठक होनी चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि उनके नेता एक-एक कर पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं। इसके विपरीत, शिवसेना के स्थापना दिवस समारोह में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विकास और हिंदुत्व पर केंद्रित चर्चा होनी है। यह आयोजन दोनों गुटों के बीच वैचारिक और राजनीतिक दूरी को और स्पष्ट करता है।