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शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर शिंदे का वार: 'राहुल गांधी हार के कप्तान, जहां जाते हैं हार लाते हैं'

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शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर शिंदे का वार: 'राहुल गांधी हार के कप्तान, जहां जाते हैं हार लाते हैं'

सारांश

शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी को 'बार-बार हारने वालों का कप्तान' करार दिया। 2022 के विभाजन के बाद 40 से 60 विधायकों तक पहुँचने का दावा करते हुए शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा पर अपना दावा ठोका और महायुति की एकजुटता का संदेश दिया।

मुख्य बातें

एकनाथ शिंदे ने 19 जून 2026 को मुंबई में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस रैली को संबोधित किया।
शिंदे ने राहुल गांधी को 'बार-बार हारने वालों का कप्तान' बताया और कहा कि वे जहाँ जाते हैं, हार साथ लेकर जाते हैं।
पार्टी का दावा — 2022 के विभाजन के बाद विधायकों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हुई; शिवसेना अब महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी।
शिंदे ने लाडकी बहिन योजना जारी रखने का वादा किया और किसानों को सूखे की स्थिति में सरकारी समर्थन का भरोसा दिलाया।
महायुति में मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए शिंदे ने देवेंद्र फडणवीस के साथ पूर्ण एकजुटता का दावा किया।
पार्टी कार्यकर्ताओं को एसआईआर अभियान और बीएलए नियुक्ति पर ध्यान देने का निर्देश दिया।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने 19 जून 2026 को मुंबई में आयोजित शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। शिंदे ने कहा कि राहुल गांधी 'बार-बार हारने वालों के कप्तान' हैं और जहाँ भी जाते हैं, हार उनके साथ चलती है। यह रैली बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।

राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन पर हमला

शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे 'न खुद भ्रष्टाचार करूंगा, न किसी को करने दूंगा' की तुलना विपक्ष के रवैये से करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि विपक्ष का असली नारा है — 'न खुद जीतेंगे और न किसी को जीतने देंगे।' उन्होंने इंडिया गठबंधन को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो लोग दूसरे दलों को कांग्रेस में विलय की सलाह दे रहे हैं, उन्हें पहले अपनी घटती ताकत पर आत्मचिंतन करना चाहिए।

मोदी और अमित शाह को बधाई

शिंदे ने प्रधानमंत्री मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और कहा कि उनका कार्यकाल भ्रष्टाचार के किसी भी दाग से मुक्त रहा है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 को हटाने जैसे फैसलों को बालासाहेब ठाकरे के सपनों की पूर्ति बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा करते हुए शिंदे ने कहा कि उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र में वामपंथी उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया। शिंदे ने यह भी बताया कि एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री के सम्मान में प्रस्ताव पेश करने का अवसर शिवसेना को दिया गया था।

शिवसेना की विचारधारा और उत्तराधिकार का दावा

शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, 'बालासाहेब ठाकरे के असली उत्तराधिकारी मेरे शिवसैनिक हैं। उत्तराधिकार खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि विचारधारा से तय होता है। शिवसेना जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की विचारधारा है।' उन्होंने बताया कि 2022 में अलग रास्ता चुनने के बाद विपक्ष के तमाम दावों के बावजूद पार्टी ने 40 से बढ़कर 60 विधायक बना लिए हैं। इस वर्ष बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी मनाई जा रही है और शिंदे ने दावा किया कि शिवसेना अब महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है।

महायुति एकजुट, विपक्ष को चुनौती

शिंदे ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके बीच मतभेद की खबरें निराधार हैं और महायुति पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी विधान परिषद चुनाव में विपक्ष अपना खाता भी नहीं खोल पाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं से उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पर ध्यान देने और अधिक बूथ स्तर एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने का आह्वान किया।

लाडकी बहिन योजना और किसानों का वादा

शिंदे ने लाडकी बहिन योजना का उल्लेख करते हुए कहा, 'दुनिया की कोई ताकत इस योजना को बंद नहीं कर सकती।' महाराष्ट्र में संभावित सूखे की स्थिति पर उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर संकट में उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र के खजाने पर सबसे पहला अधिकार हमारे किसानों का है।' आने वाले जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों में पार्टी की रणनीति को धार देने के संकेत के साथ शिंदे ने अपना संबोधन समाप्त किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि आगामी जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों में महायुति का आख्यान मजबूत हो। गौरतलब है कि 2022 के विभाजन के बाद से शिंदे गुट की असली परीक्षा स्थानीय निकाय चुनावों में होनी है, जहाँ जमीनी संगठन का महत्व सर्वाधिक होता है। 40 से 60 विधायकों का दावा विधानसभा चुनाव के संदर्भ में है, लेकिन शहरी स्थानीय निकायों में शिवसेना (यूबीटी) की पकड़ अभी भी चुनौती बनी हुई है। बालासाहेब की विचारधारा पर 'असली उत्तराधिकार' का दावा तब तक अधूरा रहेगा जब तक मुंबई जैसे शहरी गढ़ों में परिणाम सामने न आएँ।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी पर क्या टिप्पणी की?
शिंदे ने कहा कि राहुल गांधी 'बार-बार हारने वालों के कप्तान' हैं और जहाँ भी जाते हैं, हार उनके साथ चलती है। यह टिप्पणी 19 जून 2026 को मुंबई में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस रैली में की गई।
शिवसेना का 60वाँ स्थापना दिवस क्यों महत्वपूर्ण है?
यह आयोजन बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष में हुआ, जिसे शिंदे गुट ने विचारधारा पर अपने दावे को मजबूत करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। शिंदे ने दावा किया कि शिवसेना अब महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है।
शिंदे ने 2022 के विभाजन के बाद पार्टी की स्थिति के बारे में क्या कहा?
शिंदे ने कहा कि 2022 में अलग रास्ता चुनने पर विपक्ष ने दावा किया था कि उनका एक भी विधायक नहीं जीतेगा, लेकिन पार्टी ने 40 से बढ़कर 60 विधायक बना लिए। उन्होंने इसे शिवसैनिकों के भरोसे और मेहनत का परिणाम बताया।
लाडकी बहिन योजना पर शिंदे ने क्या वादा किया?
शिंदे ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत लाडकी बहिन योजना को बंद नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने इस योजना को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन महाराष्ट्र की महिलाओं ने उन्हें करारा जवाब दिया।
महायुति में मतभेद की खबरों पर शिंदे का क्या कहना है?
शिंदे ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिशें निराधार हैं। उन्होंने महायुति को पूरी तरह एकजुट और मजबूत बताया तथा विधान परिषद चुनाव में विपक्ष के खाता न खोलने का दावा किया।
राष्ट्र प्रेस
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