शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ पर उद्धव ठाकरे का ऐलान: शिवसैनिक कहें तो अध्यक्ष पद छोड़ दूंगा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 19 जून 2026 को मुंबई में पार्टी की 60वीं स्थापना वर्षगांठ रैली में स्पष्ट किया कि यदि बालासाहेब की शिवसेना के सच्चे कार्यकर्ता उनसे पद छोड़ने को कहेंगे, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। यह संबोधन ऐसे समय में आया जब कथित तौर पर छह लोकसभा सांसदों ने बागी रुख अपना लिया है और पार्टी के भीतर फूट की खबरें तेज हो गई हैं।
मुख्य घोषणा और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील
ठाकरे ने भावुक लहजे में कहा, 'मैं राजनीति में बलपूर्वक पद पर बने रहने के लिए नहीं आया था। जब तक मेरे सामने खड़े लाखों शिवसैनिक चाहते हैं कि मैं नेतृत्व करूं, मैं लड़ता रहूंगा। लेकिन जिस क्षण आप मुझसे कहेंगे कि अब जाने का समय आ गया है, मैं बिना किसी हिचकिचाहट के पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दूंगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वफादार कार्यकर्ताओं और दलबदल करने वाले सांसदों के बीच का अंतर अब साफ दिखाई दे रहा है।
दलबदलू सांसदों पर सीधा हमला
ठाकरे ने कथित तौर पर बागी हुए सांसदों पर आरोप लगाया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में पद पाने के लिए बंद दरवाजों के पीछे सौदेबाजी की और निजी लाभ के लिए अपनी निष्ठा बदली। उन्होंने कहा, 'हमारे नौ सांसद मोदी के चेहरे का इस्तेमाल किए बिना ही जीत गए। अब यह लगातार विधायकों की खरीद-फरोख्त क्यों? सत्ता के लिए कोई कितना भूखा हो सकता है?' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट पर भी तीखे प्रहार किए।
मतदाताओं से माफी और 2019 के फैसले का बचाव
ठाकरे ने उन क्षेत्रों के मतदाताओं से सार्वजनिक माफी मांगी जहाँ दलबदल हुआ। उन्होंने कहा, 'मोदी लहर के दौरान लोगों ने हम पर भरोसा करके इन व्यक्तियों को वोट दिया था।' साथ ही उन्होंने 2019 में मुख्यमंत्री पद स्वीकार करने के अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि BJP द्वारा वादे से मुकरने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी लेनी पड़ी।
मातोश्री और परिवार पर हमलों का जवाब
ठाकरे ने मातोश्री पर हो रही चुनिंदा आलोचना को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मेरी पत्नी की आलोचना हो रही है, आदित्य और तेजस को निशाना बनाया जा रहा है। आप मंत्री बनते हैं, आपके बच्चे विधायक बनते हैं, लेकिन मातोश्री से उम्मीद की जाती है कि वह कुछ न करे — हम ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते।' गौरतलब है कि ठाकरे परिवार पर राजनीतिक हमले पिछले कुछ महीनों में लगातार तेज हुए हैं।
किसानों की दुर्दशा और राजनीतिक भ्रष्टाचार पर कटाक्ष
ठाकरे ने दलबदल को बढ़ावा देने वाले कथित प्रलोभनों की तुलना महाराष्ट्र के कृषि संकट से करते हुए कहा, 'राज्य के किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल रहा, लेकिन दलबदल करने वाले सांसदों का समर्थन मूल्य तो मानो तय है।' उन्होंने राज्य सरकार की ऋण माफी योजना को 'पूरी तरह धोखे वाली' करार देते हुए कहा कि किसान खुद कह रहे हैं कि वे ऐसी माफी स्वीकार करने के बजाय मरना पसंद करेंगे। आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर नेतृत्व और रणनीति पर निर्णायक चर्चा होने की संभावना है।