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आदित्य ठाकरे की बागी सांसदों को चुनौती: इस्तीफा दो और जनता का सामना करो

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आदित्य ठाकरे की बागी सांसदों को चुनौती: इस्तीफा दो और जनता का सामना करो

सारांश

आदित्य ठाकरे ने पाला बदलने वाले सांसदों को खुली चुनौती दी — इस्तीफा दो और जनता का सामना करो। कांग्रेस के भाई जगताप और सपा के अबू आज़मी भी कथित 'ऑपरेशन टाइगर' के खिलाफ एकजुट हुए, इसे लोकतंत्र और जनादेश पर सीधा हमला बताया।

मुख्य बातें

आदित्य ठाकरे ने 22 जून को बागी सांसदों को चुनौती दी — पद से इस्तीफा दें और दोबारा चुनाव का सामना करें।
ठाकरे ने आरोप लगाया कि पहले सांसदों को, फिर विधायकों को निशाना बनाया जा सकता है।
कांग्रेस विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने जाँच एजेंसियों के ज़रिए दबाव को असंवैधानिक बताया।
सपा विधायक अबू आज़मी ने माँग की कि दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए इस्तीफा और पुनः चुनाव अनिवार्य हो।
यह विवाद 2022 में शिवसेना और NCP में हुई टूट के बाद महाराष्ट्र में दलबदल की राजनीति की नई कड़ी है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक आदित्य ठाकरे ने 22 जून को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कथित 'ऑपरेशन टाइगर' के बीच पाला बदलने वाले सांसदों को सीधी चुनौती दी — यदि उनमें साहस है तो वे अपने पद से इस्तीफा दें और जनता के बीच दोबारा चुनाव का सामना करें। महाराष्ट्र की राजनीति में दलबदल की इस ताज़ा लहर ने विपक्षी दलों — कांग्रेस और समाजवादी पार्टी — को भी एकजुट कर दिया है।

आदित्य ठाकरे की सीधी चुनौती

ठाकरे ने कहा कि जिन सांसदों ने कथित तौर पर पार्टी छोड़कर दूसरी राजनीतिक राह चुनी है, उन्हें पहले अपना पद छोड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थन और नेतृत्व में चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो जनता का सामना करने से पीछे न हटें। उनका दावा था कि उनकी पार्टी ने जनता का विश्वास जीता है और मतदाता चुनाव के ज़रिए अपनी राय स्पष्ट कर देंगे।

ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि पहले सांसदों को साथ ले जाने की कोशिश हो रही है और आगे विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया कि विपक्ष के नेता से इतना भय क्यों है और इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों की ज़रूरत क्यों पड़ रही है।

कांग्रेस की संवैधानिक चिंता

कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था चुनावों की नींव पर टिकी है। जगताप के अनुसार, यदि चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर दबाव, भय, बल प्रयोग या जाँच एजेंसियों के माध्यम से पार्टी बदलने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विरुद्ध है।

समाजवादी पार्टी का विरोध

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी ने भी कथित 'ऑपरेशन टाइगर' की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति में मतदाताओं की भावना और जनादेश की अनदेखी होती है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई नेता किसी विचारधारा और पार्टी के नाम पर वोट माँगकर जीतता है, तो बाद में पार्टी बदलना मतदाताओं के साथ खुला अन्याय है। आज़मी ने माँग की कि दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए पहले इस्तीफा देना और फिर दोबारा चुनाव लड़ना अनिवार्य किया जाए।

लोकतंत्र पर व्यापक असर

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में दलबदल की राजनीति नई नहीं है — 2022 में शिवसेना और बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में हुई टूट ने पहले ही राज्य की राजनीति को हिला दिया था। आलोचकों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी राजनीतिक उथल-पुथल देश के लोकतांत्रिक ढाँचे को कमज़ोर करती है और मतदाताओं के जनादेश को निरर्थक बना देती है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं।

तीनों विपक्षी नेताओं की यह एकजुट आवाज़ संकेत देती है कि 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर महाराष्ट्र का सियासी पारा आने वाले दिनों में और चढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत का दलबदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) इतना सरल नहीं है — वह विधायकों पर लागू होता है, सांसदों के इस्तीफे पर नहीं। असली सवाल यह है कि क्या संवैधानिक ढाँचा राजनीतिक दलबदल को रोकने में पर्याप्त है, या उसे और कड़ा करने की ज़रूरत है। महाराष्ट्र 2022 से ही इस कानूनी-राजनीतिक खींचतान का अखाड़ा बना हुआ है, और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले भी पूरी तरह इस पर अंकुश नहीं लगा पाए। तीनों विपक्षी दलों की एकजुटता चुनावी गठबंधन की संभावना का संकेत देती है, लेकिन उनकी असली परीक्षा तब होगी जब अगले चुनाव में सीट-बँटवारे की बात आएगी।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कथित 'ऑपरेशन टाइगर' क्या है?
कथित 'ऑपरेशन टाइगर' महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों को तोड़कर सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करने की कथित राजनीतिक कोशिश को दिया गया नाम है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इसके लिए दबाव और जाँच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों से क्या माँग की?
आदित्य ठाकरे ने माँग की कि जिन सांसदों ने पाला बदला है, वे पहले अपने पद से इस्तीफा दें और फिर BJP के समर्थन में दोबारा चुनाव लड़कर जनता का सामना करें। उनका कहना था कि जनता चुनाव के ज़रिए अपनी राय स्पष्ट कर देगी।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने कहा कि यदि चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर जाँच एजेंसियों या बल प्रयोग के ज़रिए पार्टी बदलने का दबाव बनाया जाता है, तो यह असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
समाजवादी पार्टी का इस पर क्या रुख है?
सपा विधायक अबू आज़मी ने 'ऑपरेशन टाइगर' को मतदाताओं के जनादेश की अनदेखी बताया। उन्होंने माँग की कि दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए इस्तीफा देना और पुनः चुनाव लड़ना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए।
महाराष्ट्र में दलबदल की राजनीति का पिछला इतिहास क्या है?
2022 में शिवसेना में बड़ी टूट हुई थी, जिसके बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में एक गुट सत्ता में आया। इसके बाद NCP में भी विभाजन हुआ। आलोचकों का कहना है कि ये घटनाक्रम महाराष्ट्र के लोकतांत्रिक ढाँचे को लगातार कमज़ोर कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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