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दलबदल विरोधी कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं — शिवसेना (यूबीटी) नेता भास्कर जाधव

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दलबदल विरोधी कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं — शिवसेना (यूबीटी) नेता भास्कर जाधव

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) नेता भास्कर जाधव ने रत्नागिरी में दो टूक कहा — दलबदल विरोधी कानून अब केवल कागज़ पर है, ज़मीन पर उसकी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। उद्धव ठाकरे को साहस रखने की सलाह देते हुए उन्होंने 'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों के बीच पार्टी को एकजुट रहने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

भास्कर जाधव ने 17 जून को रत्नागिरी में कहा कि दलबदल विरोधी कानून को व्यवहार में पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया गया है।
उन्होंने उद्धव ठाकरे को साहस के साथ काम लेने और 'बिल्कुल न डरने' की सलाह दी।
पिछले दो वर्षों से यूबीटी गुट के टूटने की अटकलें हैं; जाधव ने कहा — चर्चित नेता अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
जाधव ने कहा कि 15 साल पार्टी में रहे नेता सत्ता जाते ही 15 दिन भी नहीं टिकते — यह विचारधारा नहीं, सुविधा की राजनीति है।
शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंदे ने छत्रपति संभाजीनगर में 'ऑपरेशन टाइगर' के अस्तित्व से इनकार किया।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता भास्कर जाधव ने 17 जून को रत्नागिरी में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देश में दलबदल विरोधी कानून को व्यवहार में पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया गया है। उन्होंने पार्टी में चल रही हलचल और कथित 'ऑपरेशन टाइगर' के संदर्भ में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को साहस के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।

उद्धव ठाकरे को जाधव की सलाह

जाधव ने कहा, 'जो होना है, वह तो होकर ही रहेगा — पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को इसे लेकर बहुत ज़्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि मुश्किल दौर से उबरने के लिए पार्टी को ठोस अभियान शुरू करने होंगे, स्पष्ट फ़ैसले लेने होंगे और भूमिकाएँ तय करनी होंगी। उन्होंने ठाकरे से अपील की कि 'जो किस्मत में लिखा है वह होकर ही रहेगा — बिल्कुल भी न डरें।'

दो साल से टूट की अटकलें, पर सच्चाई अस्पष्ट

जाधव ने स्वीकार किया कि पिछले दो वर्षों से यूबीटी गुट के टूटने और कुछ सांसदों द्वारा नया गुट बनाने की अटकलें लगातार चल रही हैं। उन्होंने कहा, 'मैं इसकी सच्चाई पर टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उन्हें कम से कम अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।' उन्होंने चेताया कि केंद्र और राज्यों में सत्ता में रहते हुए एक के बाद एक पार्टी तोड़ने से नेताओं की सार्वजनिक विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा दोनों को गहरा नुकसान पहुँचता है।

विचारधारा नहीं, सुविधा के लिए बदल रहे हैं पार्टियाँ

जाधव ने तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग 15 साल तक किसी पार्टी में सांसद, विधायक और मंत्री रहे, वे सत्ता से बाहर होने के बाद उसी पार्टी में 15 दिन भी नहीं टिक पा रहे। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति राष्ट्रव्यापी है। उनके अनुसार, 'लोग विचारधारा या जनसमर्थन के आधार पर नहीं, बल्कि सुविधा और आराम के लिए पार्टियाँ बदल रहे हैं — और अगर कोई शांति से रहना चाहता है तो उसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाने की सलाह दी जाती है। यह जनता को गुमराह करना है।'

दलबदल विरोधी कानून पर गंभीर सवाल

जाधव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को मिले पत्र-व्यवहार को 'गौण मुद्दा' बताते हुए कहा कि असली चिंता यह है कि जनादेश की रक्षा के लिए बने दलबदल विरोधी कानून को अब व्यवहार में पूरी तरह कमज़ोर और निष्प्रभावी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी तोड़ने वालों में जवाबदेही का भाव होना चाहिए, भले ही वे जनता के सामने शर्म न महसूस करें।

'ऑपरेशन टाइगर' पर शिवसेना का खंडन

वहीं, छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना एमएलसी और प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' जैसी कोई चीज़ अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने कहा, 'ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं है। हालाँकि, अगर कुछ लोग अपनी लीडरशिप से नाखुश हैं या पार्टी के साथ उनके मतभेद हैं, तो यह एक अलग बात है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन टूटने और विलय की अटकलें तेज़ हैं। आने वाले दिनों में यूबीटी के भीतर नेताओं की स्थिति-स्पष्टता इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संस्थागत विफलता का स्वीकारोक्ति है जिसे सत्ता पक्ष भी नकार नहीं सकता। असली सवाल यह है कि क्या संसद इस कानून में दाँत लगाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएगी — या यह बहस अगले चुनाव तक फिर टल जाएगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भास्कर जाधव ने दलबदल विरोधी कानून को लेकर क्या कहा?
भास्कर जाधव ने 17 जून को रत्नागिरी में कहा कि जनादेश की रक्षा के लिए बना दलबदल विरोधी कानून अब व्यवहार में पूरी तरह कमज़ोर और निष्प्रभावी कर दिया गया है। उनके अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष को मिला पत्र-व्यवहार गौण मुद्दा है — असली चिंता इस कानून का उल्लंघन है।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और क्या यह सच है?
शिवसेना एमएलसी और प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने छत्रपति संभाजीनगर में स्पष्ट किया कि 'ऑपरेशन टाइगर' जैसा कोई ऑपरेशन अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने माना कि कुछ नेताओं के लीडरशिप से मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसे किसी संगठित ऑपरेशन से नहीं जोड़ा जा सकता।
उद्धव ठाकरे को भास्कर जाधव ने क्या सलाह दी?
जाधव ने ठाकरे से कहा कि मुश्किल दिन भी गुज़र जाएंगे और उन्हें बिल्कुल नहीं डरना चाहिए। उन्होंने पार्टी को ठोस अभियान शुरू करने, स्पष्ट फ़ैसले लेने और भूमिकाएँ तय करने की ज़रूरत बताई।
शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलें क्यों हैं?
जाधव के अनुसार, पिछले दो वर्षों से यूबीटी गुट के टूटने और कुछ सांसदों द्वारा नया गुट बनाने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि चर्चित नेताओं को कम से कम अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।
जाधव ने पार्टी बदलने की प्रवृत्ति पर क्या कहा?
जाधव ने कहा कि जो नेता 15 साल तक पार्टी में सांसद, विधायक और मंत्री रहे, वे सत्ता से बाहर होते ही 15 दिन भी नहीं टिकते। उनके अनुसार यह विचारधारा नहीं बल्कि सुविधा और आराम की राजनीति है, जो जनता को गुमराह करती है।
राष्ट्र प्रेस
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