शिवसेना (यूबीटी) में असंतोष पर संजय निरुपम का बयान: 'दल तोड़ना नहीं, शिंदे के नेतृत्व में आने वालों का स्वागत'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने 15 जून 2026 को मुंबई में कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के भीतर लंबे समय से आंतरिक मतभेद चल रहे हैं और कई विधायक व सांसद अपने नेतृत्व से नाखुश हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की ओर से किसी भी दल को तोड़ने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा, लेकिन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में आने के इच्छुक लोगों का स्वागत किया जाएगा।
शिवसेना (यूबीटी) में असंतोष के दावे
निरुपम के अनुसार, उद्धव ठाकरे की पार्टी के जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नेतृत्व उनसे संवाद नहीं करता और उनकी समस्याओं को अनसुना किया जाता है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कई सांसद और विधायक महसूस करते हैं कि नेतृत्व उनसे मिलने तक को तैयार नहीं है, जिससे संगठन में बेचैनी बढ़ रही है। गौरतलब है कि हाल ही में आयोजित एक बैठक में कुछ सांसदों की अनुपस्थिति को उद्धव ठाकरे ने स्वयं नाराजगी का संकेत बताया था।
शिंदे गुट की स्थिति और स्वागत का संदेश
जब निरुपम से पूछा गया कि यदि उद्धव गुट के नेता शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होना चाहें तो क्या उनका स्वागत होगा, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में अंतिम निर्णय महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे लेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिंदे के नेतृत्व में पहले से ही विभिन्न दलों और संगठनों से बड़ी संख्या में लोग शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की राजनीतिक स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
मुंबई में जैन समाज और मनसे विवाद पर प्रतिक्रिया
मुंबई में जैन समाज और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच सड़क चिह्नों को लेकर उठे विवाद पर निरुपम ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। दरअसल, मुंबई के कुछ इलाकों और आवासीय सोसायटियों में जैन साधु-साध्वियों के पैदल आवागमन के मार्ग पर सफेद पट्टियाँ बनाई गई थीं। जैन समुदाय का कहना है कि यह व्यवस्था नंगे पैर चलने वाले साधु-साध्वियों को तपती सड़क और गंदगी से राहत देने के लिए की गई थी, जबकि मनसे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी एक समुदाय के लिए इस तरह का बदलाव उचित नहीं है।
निरुपम ने कहा कि जैन समाज भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और सभी समुदायों को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। साथ ही उन्होंने जैन समाज से भी आग्रह किया कि धार्मिक मान्यताओं को दूसरों पर थोपने से बचें और सामाजिक समरसता बनाए रखें।
गहलोत के बयान और ईरान-इज़राइल युद्धविराम पर टिप्पणी
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो भाजपा पर प्रतिबंध लगा देतीं — निरुपम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस बयान को गैर-गंभीर बताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति है और जनता लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसे सत्ता सौंप चुकी है।
इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित ईरान-इज़राइल युद्धविराम का निरुपम ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश इस समझौते पर वास्तव में सहमत हैं, तो यह पूरी दुनिया और भारत के लिए राहत की बात होगी — इससे वैश्विक तेल बाज़ार में स्थिरता आएगी और महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी खेमे के भीतर असंतोष के ये दावे आगामी समय में किस रूप लेंगे, यह देखना अहम होगा।