क्या उद्धव ठाकरे ने मुंबई के जनादेश का अपमान किया?
सारांश
Key Takeaways
- संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- महायुति की जीत ने शिवसेना-यूबीटी की स्थिति को कमजोर किया है।
- मतदाता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना निर्णय स्पष्ट किया है।
- उद्धव ठाकरे को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।
- शिवसेना को अब अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।
मुंबई, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने बीएमसी चुनावों में महायुति की जीत के बाद उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) पर तीव्र प्रतिक्रिया दी है। संजय निरुपम ने कहा कि यदि शिवसेना-यूबीटी ने मुंबई की जनता के निर्णय का अपमान किया, तो लोग उन्हें नहीं छोड़ेंगे।
संजय निरुपम ने बुधवार को मीडिया को बताया, "बिल्कुल, मुंबई का मेयर महायुति का होगा। यह आपका या हमारा निर्णय नहीं है, यह मुंबई का निर्णय है। मुंबई के लोगों और मतदाताओं का निर्णय है। मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से तय कर लिया है कि पिछले 27 वर्षों से बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में जो भ्रष्ट शासन और भ्रष्टाचार चल रहा था, उसे समाप्त करना है।"
उद्धव ठाकरे पर हमला करते हुए संजय निरुपम ने कहा, "मुंबई की जनता ने तय किया है कि शिवसेना-यूबीटी के हाथों में महानगरपालिका की सत्ता नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें विपक्ष की कुर्सी पर रहना चाहिए। अगर शिवसेना-यूबीटी के नेता इस निर्णय में हस्तक्षेप करते हैं तो जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।"
संजय निरुपम ने कहा कि राज्य की 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी का महाराष्ट्र में लगभग कोई अस्तित्व नहीं रह गया है। शिवसेना-यूबीटी का मुंबई के बाहर नासिक, परभणी और चंद्रपुर में थोड़ा बहुत अस्तित्व बचा है। अन्य शहरों में यह पार्टी या तो शून्य है या केवल एक सीट पर सिमट गई है।
उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना ने महानगरपालिका चुनावों में यह साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र में पार्टी का दबदबा है। पूरे महाराष्ट्र में 2,869 सीटों के लिए चुनाव हुए थे, जिसमें से 1,425 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की और 399 सीटें जीतकर शिवसेना राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। राज्य में शिवसेना-यूबीटी को केवल 155 सीटें मिली हैं, जिसके साथ वह पांचवें स्थान पर आ गई है।