असम: ईडी ने पूर्व IAS अधिकारी इंद्रेश्वर कलिता की 5.64 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 5.64 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की।
- इंद्रेश्वर कलिता पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप।
- जांच में मूल्य को कम दिखाने की बात सामने आई।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
- संपत्तियों से प्राप्त आय का उपयोग बैंक ऋण चुकाने में हो रहा है।
गुवाहाटी, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने असम सरकार के पूर्व आबकारी सचिव और आईएएस अधिकारी इंद्रेश्वर कलिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत उनकी 5.64 करोड़ रुपए मूल्य की छह अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।
सीएमएसवीसी (मुख्यमंत्री विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ) द्वारा कलिता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की। कलिता पर आरोप है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति अर्जित की है।
सीएमएसवीसी द्वारा प्रस्तुत आरोपपत्र के अनुसार, 1 मार्च, 2000 से 31 दिसंबर, 2018 के बीच की जांच अवधि में, कलिता ने अपनी ज्ञात आय से 131.12 प्रतिशत अधिक यानी 5.64 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की।
जांच में यह भी पाया गया कि कलिता ने कई अचल संपत्तियां अपने नाम, पत्नी और परिवार के सदस्यों के नाम पर बिना किसी वैध आय के स्रोत के अधिग्रहित कीं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि यह वास्तविक स्वामित्व और संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत को छिपाने के लिए किया गया था।
जांचकर्ताओं ने यह भी खुलासा किया कि संपत्तियों की खरीद के लिए पंजीकृत विक्रय विलेखों में जानबूझकर मूल्य को कम दर्शाया गया था ताकि लेन-देन में खर्च की गई वास्तविक राशि को छिपाया जा सके।
इसके अलावा, यह भी पाया गया कि 2015 से 2018 के बीच कलिता ने अपनी पत्नी और एक रिश्तेदार के साथ मिलकर एक जी+4 कमर्शियल-कम रेजिडेंशियल इमारत का निर्माण किया। आरोप है कि रिश्तेदार केवल नाममात्र के साझेदार के रूप में काम कर रहा था।
इस इमारत का निर्माण लगभग 4.46 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था और वर्तमान में इस संपत्ति से अच्छी मासिक किराए की आय प्राप्त हो रही है, जिसका उपयोग बैंक ऋण चुकाने में किया जा रहा है। इस प्रकार से कथित तौर पर अपराध से प्राप्त धन को वैध वित्तीय प्रणाली में शामिल किया जा रहा है।