TMC के 20 सांसद छोड़ गए ममता का साथ, भाजपा बोली — 'तृणमूल में अब कुछ नहीं बचा'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों द्वारा ममता बनर्जी का साथ छोड़ने की खबर के बाद 9 जून को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने इसे TMC की आंतरिक तानाशाही और विचारहीन नेतृत्व का परिणाम बताया।
केंद्रीय मंत्री बघेल का हमला
केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल और अपनी पार्टी को तानाशाही तरीके से चलाया। उनके अनुसार, TMC के भीतर विचार और अभिव्यक्ति की कोई स्वतंत्रता नहीं थी। बघेल ने यह भी कहा कि जनता ने सत्ता परिवर्तन कर दिया है और अब बंगाल के मुख्यमंत्री प्रतिदिन व्यवस्था परिवर्तन का कार्य कर रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री मौर्य का विचारधारा पर सवाल
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह TMC की आंतरिक समस्या है, लेकिन जिस पार्टी की कोई विचारधारा नहीं होती और जिसके पास कोई स्पष्ट विजन नहीं होता, उसका यही अंजाम होता है। उनकी यह टिप्पणी TMC के संगठनात्मक ढाँचे पर सीधा प्रहार मानी जा रही है।
सांसद दिनेश शर्मा की चेतावनी
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि ममता बनर्जी का जनता, विधायकों और सांसदों ने साथ छोड़ा है। उन्होंने आगाह किया कि कहीं ऐसा न हो कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी पार्टी छोड़ जाएँ। शर्मा ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के निर्देशों पर आम जनता के साथ अत्याचार हुआ और केवल BJP कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भी जान गई।
सांसद जगदंबिका पाल का तंज — 'तृणमूल में तृण नहीं बचा'
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने सबसे तीखा व्यंग्य करते हुए कहा, 'TMC में कोई बचा ही नहीं है। तानाशाही के डर से लोग पार्टी में थे।' उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता के जनादेश के बाद यह साफ हो गया कि जिस तरह जनता परेशान थी, उसी तरह पार्टी के लोग भी परेशान थे। पाल ने सवाल उठाया — '28 में से 20 सांसद चले गए तो तृणमूल कहाँ बची है?'
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में हाल के चुनावी नतीजों के बाद TMC की स्थिति पहले से ही कमज़ोर मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब TMC को बड़े पैमाने पर दलबदल का सामना करना पड़ा हो। आने वाले दिनों में पार्टी के शेष सांसदों और विधायकों का रुख राजनीतिक रूप से निर्णायक होगा।