टीएमसी से अलगाव धोखा नहीं, संविधान देता है इजाजत: सुदीप बंद्योपाध्याय का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि TMC छोड़ना किसी प्रकार का विश्वासघात नहीं है, बल्कि भारत का संविधान और लोकसभा की प्रक्रियाएँ इसकी पूरी इजाजत देती हैं। पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों की सत्ता गँवाने के बाद TMC में आंतरिक विद्रोह तेज हो गया है और पार्टी के 20 लोकसभा सांसद अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय कर चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बंद्योपाध्याय ने कहा, 'हम 20 लोकसभा सांसद हैं। अगर सांसद अलग हो रहे हैं, तो इसे धोखा नहीं कहा जाएगा — देश का संविधान और लोकसभा दोनों इसकी अनुमति देते हैं।' उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यदि अलग होने वाले सांसदों की संख्या दो-तिहाई से कम होती, तभी इसे दल-बदल माना जाता और कानूनी कार्रवाई संभव होती। दावा किया जा रहा है कि बागी खेमे में और सांसद शामिल हो सकते हैं।
संवैधानिक प्रावधान क्या कहता है
दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत यदि किसी राजनीतिक दल के लोकसभा में उपस्थित कम से कम दो-तिहाई सांसद एकजुट होकर किसी अन्य दल में विलय का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। बंद्योपाध्याय ने यही संवैधानिक आधार लेकर अपने कदम को वैध ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पहले कांग्रेस से विधिवत इस्तीफा देकर TMC जॉइन की थी और अब भी उसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
शिवसेना विभाजन का उदाहरण
बंद्योपाध्याय ने महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि 'असली TMC' कौन है, इसका फैसला अदालत करेगी — ठीक वैसे जैसे न्यायालय ने तय किया था कि असली शिवसेना किस गुट की है। यह तुलना इस बात का संकेत है कि TMC के प्रतीक, संपत्ति और संगठनात्मक अधिकारों पर कानूनी लड़ाई अपरिहार्य मानी जा रही है।
आगे की रणनीति
बंद्योपाध्याय ने बताया कि लोकसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने से पहले बागी गुट अपने अगले कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बैठक और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा जारी है। लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी में नए संसदीय गुट को मान्यता देना, उसका गठन करना और पार्टी कार्यालय के लिए स्थान आवंटित करना शामिल है — ये सभी प्रक्रियाएँ सत्र से पहले पूरी करने की कोशिश होगी।
TMC पर असर और आगे का रास्ता
TMC के प्रतीक, संपत्ति और अन्य संगठनात्मक मामलों पर बंद्योपाध्याय ने स्वीकार किया कि इनमें से अधिकांश विवाद अंततः न्यायालय में ही सुलझेंगे। यह विभाजन ऐसे समय में आया है जब TMC पश्चिम बंगाल में सत्ता गँवाने के बाद पहले से ही राजनीतिक संकट में है। आलोचकों का कहना है कि यह टूट पार्टी की दीर्घकालिक संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करती है।