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टीएमसी से अलगाव धोखा नहीं, संविधान देता है इजाजत: सुदीप बंद्योपाध्याय का बड़ा बयान

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टीएमसी से अलगाव धोखा नहीं, संविधान देता है इजाजत: सुदीप बंद्योपाध्याय का बड़ा बयान

सारांश

पश्चिम बंगाल में सत्ता गँवाने के बाद TMC में बड़ी टूट — 20 सांसद 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में शामिल। बागी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय का दावा: संविधान में दो-तिहाई विलय की इजाजत है, यह धोखा नहीं। 'असली TMC' का फैसला अदालत करेगी।

मुख्य बातें

TMC के 20 लोकसभा सांसद अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय कर चुके हैं।
बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा — संविधान और लोकसभा नियम दो-तिहाई सांसदों के विलय की अनुमति देते हैं, इसलिए यह दल-बदल नहीं।
दावा किया जा रहा है कि बागी खेमे में और सांसद जुड़ सकते हैं।
20 जुलाई से मानसून सत्र शुरू होने से पहले बागी गुट अगले कदम उठाएगा।
TMC के प्रतीक, संपत्ति और 'असली पार्टी' के सवाल का फैसला न्यायालय करेगा — बंद्योपाध्याय ने शिवसेना विभाजन का उदाहरण दिया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि TMC छोड़ना किसी प्रकार का विश्वासघात नहीं है, बल्कि भारत का संविधान और लोकसभा की प्रक्रियाएँ इसकी पूरी इजाजत देती हैं। पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों की सत्ता गँवाने के बाद TMC में आंतरिक विद्रोह तेज हो गया है और पार्टी के 20 लोकसभा सांसद अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय कर चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बंद्योपाध्याय ने कहा, 'हम 20 लोकसभा सांसद हैं। अगर सांसद अलग हो रहे हैं, तो इसे धोखा नहीं कहा जाएगा — देश का संविधान और लोकसभा दोनों इसकी अनुमति देते हैं।' उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यदि अलग होने वाले सांसदों की संख्या दो-तिहाई से कम होती, तभी इसे दल-बदल माना जाता और कानूनी कार्रवाई संभव होती। दावा किया जा रहा है कि बागी खेमे में और सांसद शामिल हो सकते हैं।

संवैधानिक प्रावधान क्या कहता है

दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत यदि किसी राजनीतिक दल के लोकसभा में उपस्थित कम से कम दो-तिहाई सांसद एकजुट होकर किसी अन्य दल में विलय का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। बंद्योपाध्याय ने यही संवैधानिक आधार लेकर अपने कदम को वैध ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पहले कांग्रेस से विधिवत इस्तीफा देकर TMC जॉइन की थी और अब भी उसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।

शिवसेना विभाजन का उदाहरण

बंद्योपाध्याय ने महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि 'असली TMC' कौन है, इसका फैसला अदालत करेगी — ठीक वैसे जैसे न्यायालय ने तय किया था कि असली शिवसेना किस गुट की है। यह तुलना इस बात का संकेत है कि TMC के प्रतीक, संपत्ति और संगठनात्मक अधिकारों पर कानूनी लड़ाई अपरिहार्य मानी जा रही है।

आगे की रणनीति

बंद्योपाध्याय ने बताया कि लोकसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने से पहले बागी गुट अपने अगले कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बैठक और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा जारी है। लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी में नए संसदीय गुट को मान्यता देना, उसका गठन करना और पार्टी कार्यालय के लिए स्थान आवंटित करना शामिल है — ये सभी प्रक्रियाएँ सत्र से पहले पूरी करने की कोशिश होगी।

TMC पर असर और आगे का रास्ता

TMC के प्रतीक, संपत्ति और अन्य संगठनात्मक मामलों पर बंद्योपाध्याय ने स्वीकार किया कि इनमें से अधिकांश विवाद अंततः न्यायालय में ही सुलझेंगे। यह विभाजन ऐसे समय में आया है जब TMC पश्चिम बंगाल में सत्ता गँवाने के बाद पहले से ही राजनीतिक संकट में है। आलोचकों का कहना है कि यह टूट पार्टी की दीर्घकालिक संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह राजनीतिक नैतिकता के सवाल को नहीं सुलझाता — खासकर तब जब TMC ने इन्हीं सांसदों को जनाधार दिया था। शिवसेना विभाजन का उदाहरण दोधारी तलवार है: महाराष्ट्र में वह लड़ाई वर्षों तक न्यायालय में उलझी रही और जनता के बीच भ्रम बना रहा। गौरतलब है कि TMC की यह टूट पश्चिम बंगाल में सत्ता जाने के तुरंत बाद आई है — जो यह सवाल उठाती है कि क्या यह वैचारिक मतभेद है या सत्ता-विहीन पार्टी से पलायन। लोकसभा स्पीकर की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया मिलकर तय करेंगी कि यह विभाजन स्थायी राजनीतिक पुनर्गठन बनेगा या महज एक अवसरवादी कदम।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुदीप बंद्योपाध्याय ने TMC छोड़ने को धोखा क्यों नहीं माना?
बंद्योपाध्याय का तर्क है कि दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई या उससे अधिक सांसद एकजुट होकर विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। चूँकि TMC के 20 सांसद एक साथ अलग हुए हैं, इसलिए उनके अनुसार यह संवैधानिक रूप से वैध कदम है।
TMC के कितने सांसद अलग हुए हैं और वे किस पार्टी में शामिल हुए?
TMC के 20 लोकसभा सांसद अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय कर चुके हैं। दावा किया जा रहा है कि इस बागी खेमे में और सांसद भी शामिल हो सकते हैं।
'असली TMC' कौन है, इसका फैसला कैसे होगा?
बंद्योपाध्याय के अनुसार 'असली TMC' का फैसला न्यायालय करेगा, जैसा महाराष्ट्र में शिवसेना विभाजन के मामले में हुआ था। TMC के प्रतीक, संपत्ति और संगठनात्मक अधिकारों पर भी कानूनी लड़ाई अपेक्षित है।
बागी TMC सांसद आगे क्या करने वाले हैं?
बंद्योपाध्याय ने बताया कि लोकसभा के मानसून सत्र (20 जुलाई से) शुरू होने से पहले अगले कदम उठाए जाएंगे। इसमें लोकसभा स्पीकर से नए संसदीय गुट की मान्यता और कार्यालय आवंटन की प्रक्रिया शामिल है।
दल-बदल विरोधी कानून में दो-तिहाई विलय का प्रावधान क्या है?
भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत यदि किसी दल के लोकसभा में कम से कम दो-तिहाई सांसद एकमत होकर किसी अन्य दल में विलय का निर्णय लें, तो उन्हें दल-बदल के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। यह प्रावधान वैध विलय और अवसरवादी दल-बदल के बीच कानूनी रेखा खींचता है।
राष्ट्र प्रेस
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