बाबुल सुप्रियो का ऐलान: 'डूबते जहाज को नहीं छोड़ूँगा', टीएमसी संकट के बीच पार्टी के साथ बने रहने की घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता बाबुल सुप्रियो ने 11 जून 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे — यह बयान ऐसे समय आया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी लगातार इस्तीफों और आंतरिक कलह से घिरी हुई है। सुप्रियो ने कहा, 'जब कोई जहाज मुश्किल दौर से गुजर रहा हो, तब उसे छोड़ देना उचित नहीं होता।'
बाबुल सुप्रियो का बयान और उसकी पृष्ठभूमि
बाबुल सुप्रियो ने वीडियो संदेश में साफ कहा, 'मैं किसी अन्य गुट या पार्टी में शामिल नहीं हो रहा हूँ।' उनका यह स्पष्टीकरण इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि उसी दिन उनकी एक फेसबुक पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में दल-बदल की अटकलों को हवा दे दी थी। उस पोस्ट में उन्होंने विरोधी दलों के नेताओं के साथ काम करने के अनुभवों का उल्लेख किया था, जिसे अलग-अलग तरह से पढ़ा गया।
टीएमसी में इस्तीफों की लहर
गौरतलब है कि पिछले तीन दिनों में पार्टी के तीन राज्यसभा सांसदों — सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बराइक और सुखेंदु शेखर रॉय — ने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। इन इस्तीफों ने आने वाले दिनों में और बड़े पैमाने पर टूट की अटकलों को और तेज कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी पहले से ही दबाव में थी।
अन्य नेताओं ने भी जताई निष्ठा
सुप्रियो से पहले टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिमा मंडल भी ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी सार्वजनिक रूप से जता चुके हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं। वहीं, प्रतिमा मंडल ने बागी सांसदों की कथित सूची में अपना नाम होने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया और चुनौती दी कि यदि ऐसा कोई समूह है तो वह इस्तीफा देने वाले सांसदों की सूची सार्वजनिक करे।
आगे क्या होगा
टीएमसी के लिए यह संकट केवल संख्याओं का नहीं, बल्कि विश्वसनीयता का भी है। तीन राज्यसभा सांसदों के जाने के बाद पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर हुई है। बाबुल सुप्रियो जैसे वरिष्ठ नेताओं का खुलकर साथ आना ममता बनर्जी के लिए अल्पकालिक राहत जरूर है, लेकिन पार्टी में असंतोष की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।