30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तृणमूल के 20 बागी सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होने का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को सौंपा, एनडीए को समर्थन का ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तृणमूल के 20 बागी सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होने का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को सौंपा, एनडीए को समर्थन का ऐलान

सारांश

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग गुट बनाने की बजाय त्रिपुरा की NCPI में शामिल होने का रास्ता चुना और NDA को समर्थन का ऐलान किया। डॉ. काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में यह कदम लोकसभा में तृणमूल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने 14 जून 2026 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को NCPI में शामिल होने का प्रस्ताव सौंपा।
काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रही हैं; सांसदों ने NDA को समर्थन देने का ऐलान किया।
NCPI की स्थापना 2022 में हुई थी; इसके कार्यालय असम , त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में हैं।
तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर किसी भी नए गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया।
बागी सांसद पहले लोकसभा में अलग तृणमूल गुट बनाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन बाद में सीधे NCPI में विलय का मार्ग चुना।

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी और बहुमत वाले गुट के 20 सांसदों ने 14 जून 2026 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का औपचारिक प्रस्ताव सौंपा। इस गुट की अगुवाई चार बार लोकसभा सांसद रहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रही हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बागी सांसदों ने शुरुआत में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक अलग गुट बनाने के संकेत दिए थे — ठीक वैसे ही जैसा पश्चिम बंगाल विधानसभा में किया गया था। हालांकि, रविवार 14 जून को उन्होंने यह रणनीति बदलते हुए सीधे NCPI में विलय का मार्ग चुना और इसकी औपचारिक सूचना लोकसभा स्पीकर को पत्र के ज़रिए दी।

इस निर्णय की पुष्टि करते हुए डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ देश के हित में काम करेंगी।

एनसीपीआई: एक परिचय

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की स्थापना 2022 में हुई थी। पार्टी के कार्यालय फिलहाल असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में हैं। कोलकाता से सटे हावड़ा ज़िले के बांकरा में भी इसका एक दफ्तर है। बांकुरा से तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद अरूप चक्रवर्ती ने मीडिया को बताया कि NCPI जल्द ही पूरे पश्चिम बंगाल में अपने कार्यालय खोलेगी।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया

इन घटनाक्रमों के बीच, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को अलग से पत्र लिखकर आग्रह किया कि पार्टी के भीतर किसी भी नए गुट को मान्यता न दी जाए। उनका तर्क था कि पार्टी के निर्वाचित सांसद उस पार्टी के नीतिगत निर्णयों से स्वतंत्र होकर कार्य नहीं कर सकते जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रही है और लोकसभा में इस विभाजन को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

राजनीतिक असर और आगे की राह

गौरतलब है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिलती है। 20 सांसदों का यह गुट NCPI में विलय के इस कानूनी मार्ग का उपयोग करने की कोशिश में है। लोकसभा स्पीकर के निर्णय पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला लोकसभा में शक्ति-संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सीधे अलग गुट बनाने से ज़्यादा कानूनी सुरक्षा देता है। अभिषेक बनर्जी का प्रति-पत्र दर्शाता है कि तृणमूल इसे वैधानिक चुनौती देने के लिए तैयार है। असली सवाल यह है कि लोकसभा स्पीकर इस विलय को मान्यता देते हैं या नहीं — और यह निर्णय लोकसभा में विपक्षी अंकगणित को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तृणमूल के बागी सांसद किस पार्टी में शामिल हो रहे हैं?
तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो रहे हैं। NCPI की स्थापना 2022 में हुई थी और इसके कार्यालय असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में हैं।
इस गुट की अगुवाई कौन कर रहे हैं?
इस बागी गुट की अगुवाई चार बार लोकसभा सांसद रहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रही हैं। उन्होंने NDA के साथ मिलकर काम करने का ऐलान किया है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस विभाजन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर किसी भी नए गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि निर्वाचित सांसद अपनी पार्टी के नीतिगत निर्णयों से अलग होकर कार्य नहीं कर सकते।
बागी सांसदों ने अलग गुट बनाने के बजाय NCPI क्यों चुनी?
बागी सांसदों ने शुरू में लोकसभा में अलग तृणमूल गुट बनाने का संकेत दिया था, लेकिन बाद में NCPI में सीधे विलय का मार्ग चुना। दल-बदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई सदस्यों का किसी अन्य दल में विलय उन्हें अयोग्यता से बचाने का कानूनी रास्ता माना जाता है।
NCPI में शामिल होने का लोकसभा की राजनीति पर क्या असर होगा?
यदि लोकसभा स्पीकर इस विलय को मान्यता देते हैं, तो NDA को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा और लोकसभा में विपक्षी संख्या बल कमज़ोर होगी। NCPI पश्चिम बंगाल में भी अपने कार्यालय विस्तार की योजना बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले