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टीएमसी संकट: सौगत रॉय बोले — '19 सांसदों के हस्ताक्षर का मामला अनैतिक, ऑपरेशन लोटस की साजिश'

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टीएमसी संकट: सौगत रॉय बोले — '19 सांसदों के हस्ताक्षर का मामला अनैतिक, ऑपरेशन लोटस की साजिश'

सारांश

तृणमूल कांग्रेस में भूचाल — 19 सांसदों के कथित हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए, जिनकी प्रामाणिकता संदिग्ध है। वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इसे 'ऑपरेशन लोटस' की साजिश बताया और पूरे घटनाक्रम को अनैतिक करार दिया।

मुख्य बातें

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने 12 जून 2026 को पार्टी में जारी हस्ताक्षर विवाद को 'अनैतिक और गलत' बताया।
19 लोकसभा सांसदों के कथित हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए; प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।
दस्तावेज़ों में पहला हस्ताक्षर काकोली घोष और दूसरा शताब्दी रॉय का बताया जा रहा है।
रॉय ने आरोप लगाया कि असंतुष्ट सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की योजना बना रहे हैं।
सुवेंदु अधिकारी पर आरोप — शताब्दी रॉय के आवास पर मुलाकात और असंतुष्ट नेताओं से संपर्क।
कितने सांसदों ने वास्तव में हस्ताक्षर किए — 18, 19 या 20 — यह अभी स्पष्ट नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में गहराते अंदरूनी संकट के बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 12 जून 2026 को कहा कि कुछ सांसद यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए, फिर भी उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। रॉय ने इस पूरी घटना को 'अनैतिक और गलत' करार दिया और इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'ऑपरेशन लोटस' से जोड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के 19 लोकसभा सांसदों के कथित हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए, जिनमें दावा किया गया है कि ये सांसद लोकसभा में पार्टी के मुख्य और बहुमत वाले समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दस्तावेज़ों में पहला हस्ताक्षर काकोली घोष का और दूसरा शताब्दी रॉय का बताया जा रहा है।

हालाँकि, इन तीन पन्नों और उन पर मौजूद 19 सांसदों के हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ये पन्ने उस कथित पत्र का हिस्सा हैं या नहीं, जिसे सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में जमा कराया है।

सौगत रॉय का बयान

सौगत रॉय ने कहा, 'कुछ लोग कह रहे हैं कि उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन फिर भी उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडिया में हस्ताक्षरों की एक सूची प्रसारित हो रही है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि 18, 19 या 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। दो-तिहाई बहुमत के फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है, लेकिन मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि जो कुछ वे कर रहे हैं, वह अनैतिक और गलत है।'

उन्होंने आगे कहा, 'ये सभी सांसद तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीतकर आए हैं। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने उनके लिए प्रचार किया था और पार्टी ने उन्हें पूरा समर्थन दिया था। अचानक ऐसा क्या हो गया कि वे पार्टी छोड़ने की सोच रहे हैं?'

ऑपरेशन लोटस का आरोप

रॉय ने आरोप लगाया कि असंतुष्ट सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर चुके हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह सब ऑपरेशन लोटस के कारण हो रहा है। भाजपा अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है।'

रॉय ने सुवेंदु अधिकारी की गतिविधियों पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने शाम को शताब्दी रॉय के आवास पर जाकर मुलाकात की और बाद में कोलकाता में कुछ असंतुष्ट नेताओं से भी मिले। गौरतलब है कि समिक भट्टाचार्य इस दौरान अस्वस्थ होकर अस्पताल में भर्ती बताए जा रहे हैं।

किन सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं

कथित तीन पन्नों में जिन लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर दिख रहे हैं, उनमें मथुरापुर से बापी हलदर, बर्दवान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूच बिहार से जगदीश वर्मा बसुनिया, बोलपुर से असित मल, बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती, झाड़ग्राम से कालीपद सोरेन, घाटल से दीपक अधिकारी उर्फ देव, मेदिनीपुर से जून मालिया, बैरकपुर से पार्थ भौमिक, जंगीपुर से खलीलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से ताहिर खान, बहरामपुर से युसूफ पठान, आरामबाग से मिताली बाग, कोलकाता (दक्षिण) से माला रॉय, हुगली से रचना बनर्जी और जादवपुर से सयोनी घोष के नाम शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और तृणमूल कांग्रेस के भीतर गुटबाजी की खबरें पहले से चल रही थीं। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और असंतुष्ट सांसदों का अगला कदम इस संकट की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार 19 सांसदों के कथित हस्ताक्षर का मामला सीधे लोकसभा में पार्टी की एकता पर सवाल उठाता है। असली चिंता यह है कि हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर ही विवाद है — यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर संचार और अनुशासन दोनों टूट चुके हैं। ममता बनर्जी के लिए यह परीक्षा की घड़ी है कि वे विधानसभा चुनाव से पहले अपने लोकसभा दल को एकजुट रख पाती हैं या नहीं — और यह सवाल महज संख्या का नहीं, राजनीतिक विश्वसनीयता का भी है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तृणमूल कांग्रेस में 19 सांसदों के हस्ताक्षर विवाद का मामला क्या है?
शुक्रवार को टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के कथित हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आए, जिनमें दावा किया गया कि ये सांसद लोकसभा में पार्टी के बहुमत वाले समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सौगत रॉय ने इस मामले में क्या कहा?
सौगत रॉय ने कहा कि कुछ सांसद दावा कर रहे हैं कि उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए, फिर भी उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को 'अनैतिक और गलत' बताया और इसे BJP के 'ऑपरेशन लोटस' से जोड़ा।
ऑपरेशन लोटस क्या है और इसका टीएमसी से क्या संबंध है?
'ऑपरेशन लोटस' वह रणनीति है जिसके तहत BJP पर विपक्षी दलों के विधायकों या सांसदों को अपनी ओर खींचने का आरोप लगाया जाता है। रॉय का आरोप है कि असंतुष्ट टीएमसी सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की तैयारी में हैं, जो इसी रणनीति का हिस्सा है।
कथित हस्ताक्षर वाले दस्तावेज़ों में किन सांसदों के नाम हैं?
दस्तावेज़ों में काकोली घोष और शताब्दी रॉय के अलावा बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, दीपक अधिकारी उर्फ देव, जून मालिया, युसूफ पठान, सयोनी घोष सहित कुल 19 सांसदों के नाम बताए जा रहे हैं। हालाँकि इन हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।
इस संकट का तृणमूल कांग्रेस पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद लोकसभा में टीएमसी के दल की एकता पर सीधा सवाल उठाता है और पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है। पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और असंतुष्ट सांसदों का अगला कदम आने वाले दिनों में तस्वीर साफ करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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