कांग्रेस-टीएमसी गठबंधन पर सौगत रॉय बोले: 'मिलकर भाजपा को हराएं', विलय या तालमेल तय करेगा वक्त
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सौगत रॉय ने 11 जून 2026 को कोलकाता में स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस और टीएमसी के बीच साझा मोर्चे के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा, 'मैं चाहता हूं कि टीएमसी और कांग्रेस मिलकर काम करें और भाजपा को हराएं। बस यही मेरी इच्छा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों दलों के बीच विलय या गठबंधन की संभावनाओं पर राजनीतिक हलकों में तेज़ चर्चा है।
विलय या गठबंधन — क्या होगा फैसला?
कांग्रेस-टीएमसी के भविष्य के रिश्ते पर रॉय ने कहा, 'हमारे लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना ज़रूरी है। विलय होगा या गठबंधन, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ लड़ाई में ममता बनर्जी को सबसे आगे रहना चाहिए। गौरतलब है कि विपक्षी एकजुटता की कोशिशों के बीच टीएमसी और कांग्रेस के बीच तालमेल का सवाल बार-बार उठता रहा है।
बागी सांसदों पर रॉय की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने वाले बागी टीएमसी सांसदों के बारे में सौगत रॉय ने कहा, 'कौन गया है और कौन नहीं, मुझे नहीं पता। मैंने तीन दिन पहले माला रॉय और सायनी घोष दोनों से बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह नहीं जा रही हैं। अगर वे तीन दिन के अंदर अपना फैसला बदल लेती हैं तो हम क्या कर सकते हैं?' शताब्दी रॉय के बागी रुख पर उन्होंने कहा, 'शताब्दी पहले से ही जाने की योजना बना रही थीं। मुझे पता है कि कई भाजपा नेताओं के शताब्दी के साथ बहुत अच्छे संपर्क हैं।'
प्रकाश चिक के इस्तीफे पर चुप्पी
राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक के इस्तीफे पर रॉय ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता। मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह से जानता भी नहीं था। ज़रूर उन्हें पार्टी से कुछ दिक्कतें रही होंगी, जिसके चलते यह फैसला लिया गया।'
कुणाल घोष और प्रतिमा मंडल का रुख
पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि कल्याण बनर्जी एक वरिष्ठ और अनुभवी सांसद हैं तथा ममता बनर्जी के करीबी हैं। उन्होंने कहा, 'उनकी बात को लेकर मेरी तरफ से कोई मतभेद नहीं है। हम इस पर अंदरूनी तौर पर चर्चा करेंगे।' घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिमा मंडल ने बेबाकी से अपनी बात कही और वे पार्टी तथा 'दीदी' के साथ हैं। टीएमसी में इस उथल-पुथल के बीच पार्टी नेतृत्व की एकजुटता बनाए रखने की कोशिश साफ़ दिखती है।
आगे क्या होगा?
विपक्षी एकता की दिशा में कांग्रेस और टीएमसी के बीच औपचारिक वार्ता का अगला कदम अभी तय नहीं है। हालांकि, सौगत रॉय जैसे वरिष्ठ नेताओं का खुलकर समर्थन यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर गठबंधन के पक्ष में आवाज़ें मज़बूत हो रही हैं। भाजपा के खिलाफ विपक्षी रणनीति का स्वरूप आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होने की उम्मीद है।