काकोली घोष के इस्तीफे पर सौगत रॉय का तंज: 'मीडिया में बने रहने की ट्रिक', बंगाल की राजनीति गरमाई
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 27 मई 2026 को पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'मीडिया में बने रहने की ट्रिक' करार दिया। यह ऐसे समय में हुआ जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सौमित्र खान के इस दावे ने बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया है कि टीएमसी के कई सांसद और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं।
सौगत रॉय का बयान: 'इस्तीफा कोई नई बात नहीं'
मीडिया से बातचीत में टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, 'अच्छा हुआ कि उन्होंने इस्तीफा दिया। यह पहली बार तो नहीं, वे पहले से ही इस्तीफे देती आई हैं। यह एक स्टाइल है — रोज एक इस्तीफा देंगे तो मीडिया में बने रहेंगे। इसे इतना महत्वपूर्ण नहीं माना जाना चाहिए।'
जब उनसे पूछा गया कि काकोली घोष ने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया है, तो रॉय ने कहा, 'यह भी देखा जा रहा है, वैसे भी वे स्टेप बाइ स्टेप फैसला ले रही हैं। चुनाव में टीएमसी हार गई। जिसके पास नैतिक शक्ति होगी वही टीएमसी में रहेगा।' भाजपा में काकोली घोष के संभावित प्रवेश के सवाल पर उन्होंने कहा, 'अपने फैसले लेने के लिए हर कोई आजाद है।'
सरकारी बैठक और पार्टी की स्थिति
सरकारी प्रशासनिक बैठक में टीएमसी के सांसदों और विधायकों के शामिल होने के मामले पर सौगत रॉय ने स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से कोई रोक नहीं थी। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने उन्हें आमंत्रित किया था, इसलिए इसका कोई राजनीतिक महत्व नहीं है।' भाजपा सांसद सौमित्र खान के दावे पर रॉय ने कहा कि यह महज एक अफवाह है और उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
भाजपा का दावा: 'कई सांसद-विधायक संपर्क में'
भाजपा सांसद सौमित्र खान ने कहा कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य स्तर पर सुवेंदु अधिकारी तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के निर्देश मिलते ही कई सांसद और विधायक भाजपा में शामिल होने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'अभी कई सांसद और विधायक हमारे संपर्क में हैं। पार्टी का फैसला ही सबसे बड़ा फैसला है।'
भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने और आगे जाते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी के अलावा टीएमसी में कोई नहीं बचेगा। उन्होंने फाल्टा विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि टीएमसी के 15 साल पुराने नेता वहाँ चौथे स्थान पर रहे और जमानत भी नहीं बची। उन्होंने ममता बनर्जी से अपील की कि वे अपने हाथों से टीएमसी का साइनबोर्ड हटा दें। हालाँकि, सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा टीएमसी के आंतरिक कलह में नहीं पड़ना चाहती और बंगाल के विकास पर ध्यान केंद्रित रखेगी।
भाजपा के वादे और एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि भाजपा ने अपने घोषणापत्र में 'लक्ष्मी भंडार' की जगह 'अन्नपूर्णा भंडार' योजना लाने और आर्थिक सहायता बढ़ाने का वादा किया था, जिसे पूरा किया जाएगा। एसआईआर पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर मजूमदार ने कहा कि खबरों के अनुसार अदालत ने एसआईआर को कानूनी माना है और यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है।
गौरतलब है कि बंगाल में हाल के चुनावी नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। काकोली घोष दस्तीदार का यह इस्तीफा पार्टी में बढ़ते आंतरिक तनाव की एक और कड़ी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या वे सांसद पद से भी इस्तीफा देती हैं और किस दिशा में अपना राजनीतिक भविष्य तय करती हैं।