टीएमसी को बड़ा झटका: चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सभी संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और बारासात से चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 27 मई 2026 को पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह इस्तीफा पत्र तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पार्टी की सामान्य सदस्य बनी रहेंगी।
इस्तीफे में क्या कहा
अपने पत्र में घोष दस्तीदार ने लिखा, 'बेहद पीड़ा और चिंता के साथ मैं अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की चेयरपर्सन समेत पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों, समितियों और जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे रही हूं।' उन्होंने कहा कि जब एक महिला सांसद के प्रति किसी 'अशिक्षित और अभद्र' पार्टी सांसद के व्यवहार को रोका नहीं जा सकता और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से सहयोग व सहानुभूति नहीं मिलती, तब किसी पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
कल्याण बनर्जी पर अप्रत्यक्ष निशाना
घोष दस्तीदार ने अपने पत्र में लोकसभा में पार्टी के मौजूदा मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा, जिन्होंने उनकी जगह यह पद संभाला था। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें हटाकर लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक बदल दिया था, जिसके बाद से उनकी पार्टी नेतृत्व से नाराजगी बढ़ती रही।
भ्रष्टाचार और आरजी कर मामले पर निराशा
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा कुछ नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने की कोशिशों से वह बेहद आहत हैं। इसके साथ ही उन्होंने कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अगस्त 2024 में एक जूनियर महिला डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना पर पार्टी नेतृत्व के रवैये को लेकर भी गहरी निराशा जताई।
चार दशक की वफादारी का सवाल
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब घोष दस्तीदार ने पार्टी पद छोड़ा हो — इससे पहले वह बारासात में तृणमूल कांग्रेस की जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे चुकी हैं। उस दौर में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट किया था, जिसमें लिखा था: '1976 से उन्हें जानती हूं, 1984 से साथ चल रही हूं। चार दशक की वफादारी का यही इनाम मिला।'
आगे क्या होगा
यह कदम ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में बारासात की सांसद के रूप में हिस्सा लिया था। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता बनाए रखने के उनके फैसले से संकेत मिलता है कि यह विवाद अभी और गहरा हो सकता है, और TMC नेतृत्व के लिए यह एक संवेदनशील राजनीतिक क्षण है।