काकोली घोष का कल्याण बनर्जी पर आरोप: लोकसभा में अभद्र व्यवहार, स्पीकर को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 28 मई 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी पर लोकसभा परिसर के भीतर मौखिक दुर्व्यवहार और महिला सांसदों के प्रति अपमानजनक आचरण का आरोप लगाया है। घोष ने अध्यक्ष से औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति माँगी है और इस मामले में कठोर कार्रवाई की माँग की है।
क्या है पूरा मामला
काकोली घोष दस्तीदार ने 27 मई को TMC के सभी संगठनात्मक पदों — जिनमें बारासात जिलाध्यक्ष का पद भी शामिल था — से इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता नहीं छोड़ी है, जिससे वे अभी भी TMC की सांसद बनी हुई हैं। इस्तीफे के अगले ही दिन उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपने आरोप सार्वजनिक किए।
पत्र में क्या कहा
पत्र में काकोली घोष ने लिखा, 'मैं आपके समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति चाहती हूँ। AITC सांसद कल्याण बनर्जी ने कई बार लोकसभा के भीतर मेरे साथ मौखिक दुर्व्यवहार किया है। यह महिला सांसदों के खिलाफ अपमानजनक रवैया है और इसके लिए उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।' उन्होंने इस आचरण को 'महिला विरोधी मानसिकता' करार दिया और कहा कि यह व्यवहार केवल उनके साथ नहीं, बल्कि अन्य महिला सांसदों के साथ भी होता रहा है।
TMC के भीतर अंदरूनी तनाव की पृष्ठभूमि
राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को TMC के संसदीय दल में बढ़ते अंतर्विरोध से जोड़कर देख रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने काकोली घोष को TMC के चीफ व्हिप पद से हटाकर यह जिम्मेदारी कल्याण बनर्जी को सौंपी थी। इसी फेरबदल के बाद से पार्टी के संसदीय गलियारों में तनाव की खबरें आने लगी थीं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब TMC पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को लेकर दबाव में है।
कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया
अभी तक कल्याण बनर्जी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। TMC के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आगे क्या होगा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय द्वारा शिकायत पर क्या कदम उठाया जाता है, यह देखना अहम होगा। संसदीय परंपरा के अनुसार ऐसी शिकायतों की जाँच एक समिति के माध्यम से की जाती है। इस प्रकरण से TMC के भीतर नेतृत्व और अनुशासन को लेकर जो सवाल उठे हैं, वे आने वाले दिनों में और मुखर हो सकते हैं।