टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार का बड़ा बयान: आई-पैक ने कार्यकर्ताओं को नौकर समझा, बाहरी नेताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 25 मई 2026 को पार्टी संगठन, विधानसभा चुनावों में हार और चुनावी रणनीति एजेंसी आई-पैक की भूमिका पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर से आए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया, जबकि पुराने जमीनी कार्यकर्ताओं ने दशकों तक संघर्ष करके संगठन को खड़ा किया। बारासात संसदीय क्षेत्र की एआईटीसी जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकीं दस्तीदार का यह बयान पार्टी के भीतर उठते असंतोष की साफ झलक देता है।
40 साल के संघर्ष का हवाला
काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ी हैं और उन्होंने वह दौर भी देखा है जब पार्टी सत्ता में नहीं थी और कार्यकर्ताओं को सड़कों पर प्रताड़ित किया जाता था। उन्होंने कहा, 'मैं अच्छे समय में पार्टी में नहीं आई थी। जब लोग सड़कों पर पीटे जाते थे, तब भी मैं पार्टी के साथ थी। हमने लंबे संघर्ष के बाद पार्टी को मजबूत किया और करीब 20 साल बाद सत्ता हासिल की।'
उन्होंने इशारों में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निशाना साधा जो पार्टी के सत्ता में आने के बाद जुड़े। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति में आए और संगठन को मजबूत करने में उनका कोई विशेष योगदान नहीं रहा।
आई-पैक पर गंभीर आरोप
2026 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार के संदर्भ में दस्तीदार ने चुनावी रणनीति एजेंसी आई-पैक के कामकाज पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी के प्रतिनिधियों का पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति व्यवहार अपमानजनक था और उनके पास जमीनी राजनीति का पर्याप्त अनुभव नहीं था।
उन्होंने कहा, 'हमारे कार्यकर्ता किसी के नौकर नहीं हैं। वे ममता बनर्जी और पार्टी के प्रति प्रेम और विश्वास के कारण काम करते हैं, लेकिन आई-पैक के लोगों ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी।' उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी के कुछ सदस्य खुद को बड़ी सत्ता मानने लगे थे और स्थानीय नेताओं की राय को महत्व नहीं देते थे।
चुनावी हार के कारण
दस्तीदार ने स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं के बीच सरकार के खिलाफ नाराजगी थी। उन्होंने पंचायत और पार्षद स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 'अगर मतदाता नाराज थे, तो उसके पीछे कुछ न कुछ कारण जरूर रहा होगा।'
उन्होंने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का भी जिक्र किया और कहा कि इस प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से काट दिए गए थे। उनके अनुसार, आई-पैक की विफलता, बाहरी नेताओं का नकारात्मक प्रभाव, सरकार विरोधी नाराजगी और एसआईआर विवाद — इन सभी कारकों के मिले-जुले असर से यह चुनावी नतीजा सामने आया।
नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा
काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संसदीय क्षेत्र की एआईटीसी जिला अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सात में से पाँच विधानसभा सीटों पर हार के बाद उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि किसी नागरिक को असुरक्षा महसूस होती है या जमीन छीनने जैसी धमकियाँ मिलती हैं, तो सरकार का कर्तव्य है कि वह उसकी रक्षा करे।
आगे क्या
टीएमसी के भीतर से उठ रही ये आवाजें पार्टी नेतृत्व के लिए एक संकेत हैं कि 2026 के चुनावी नतीजों के बाद आंतरिक समीक्षा जरूरी है। यह देखना होगा कि पार्टी आगामी चुनावों में बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता घटाकर जमीनी कार्यकर्ताओं को कितना केंद्र में रखती है।