काकोली घोष दस्तीदार की सुवेंदु अधिकारी की बैठक में मौजूदगी, तृणमूल छोड़ने की अटकलें तेज
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 27 मई 2025 को नदिया जिले के कल्याणी में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दस्तीदार कुछ ही दिन पहले बारासात जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकी हैं, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
बैठक का विवरण
कल्याणी के एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में आयोजित इस प्रशासनिक बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। काकोली के अलावा तृणमूल के तीन नवनिर्वाचित विधायक — देगंगा से अनीसुर रहमान बिदेश, स्वरूपनगर से बीना मंडल और हारोआ से अब्दुल मतीन — भी बैठक में उपस्थित रहे।
विधायकों की प्रतिक्रिया
बीना मंडल ने स्पष्ट किया, 'मैं अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए इस प्रशासनिक बैठक में आई हूँ।' अब्दुल मतीन ने कहा, 'राज्य सरकार ने मुझे बुलाया था, इसलिए मैं आया हूँ। मैं एक विधायक के तौर पर आया हूँ।' देगंगा के विधायक अनीसुर रहमान ने कहा कि उनके क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा पिछड़ा है और समग्र विकास के लिए राज्य सरकार का सहयोग आवश्यक है।
भाजपा और सरकार का पक्ष
भाजपा सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के आदेश पर काकोली सहित तृणमूल के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। गौरतलब है कि सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा। भाजपा के अनुसार, इसमें कोई राजनीतिक अभिप्राय नहीं है।
काकोली की नाराज़गी की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब काकोली को तृणमूल संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाकर यह ज़िम्मेदारी सांसद कल्याण बनर्जी को सौंपी गई थी। इसके बाद काकोली ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि 'उन्हें मैं काफी समय से जानती हूँ, और 1984 में उनके साथ अपना सफर शुरू किया था। आज, चार दशकों की वफादारी का मुझे यह इनाम मिला है।' इसके बाद उन्होंने बारासात संगठनात्मक जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया।
राजनीतिक निहितार्थ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा की बैठक में तृणमूल सांसद की उपस्थिति पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनाव में सत्ता गँवाने के बाद आंतरिक असंतोष से जूझ रही है। काकोली के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।