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काकोली घोष दस्तीदार की सुवेंदु अधिकारी की बैठक में मौजूदगी, तृणमूल छोड़ने की अटकलें तेज

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काकोली घोष दस्तीदार की सुवेंदु अधिकारी की बैठक में मौजूदगी, तृणमूल छोड़ने की अटकलें तेज

सारांश

तृणमूल से नाराज़ सांसद काकोली घोष दस्तीदार का बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ है। चार दशकों की वफादारी का हवाला देकर नाराज़गी जता चुकीं काकोली का अगला कदम सबकी नज़र में है।

मुख्य बातें

तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 27 मई 2025 को कल्याणी में CM सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया।
काकोली कुछ दिन पहले ही बारासात जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकी हैं।
उन्हें तृणमूल संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाकर यह ज़िम्मेदारी कल्याण बनर्जी को दी गई थी।
बैठक में तृणमूल के तीन विधायक — अनीसुर रहमान बिदेश , बीना मंडल और अब्दुल मतीन — भी उपस्थित थे।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, CM के आदेश पर विपक्षी प्रतिनिधियों को भी बैठक में बुलाया गया था।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 27 मई 2025 को नदिया जिले के कल्याणी में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दस्तीदार कुछ ही दिन पहले बारासात जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकी हैं, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

बैठक का विवरण

कल्याणी के एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में आयोजित इस प्रशासनिक बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। काकोली के अलावा तृणमूल के तीन नवनिर्वाचित विधायक — देगंगा से अनीसुर रहमान बिदेश, स्वरूपनगर से बीना मंडल और हारोआ से अब्दुल मतीन — भी बैठक में उपस्थित रहे।

विधायकों की प्रतिक्रिया

बीना मंडल ने स्पष्ट किया, 'मैं अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए इस प्रशासनिक बैठक में आई हूँ।' अब्दुल मतीन ने कहा, 'राज्य सरकार ने मुझे बुलाया था, इसलिए मैं आया हूँ। मैं एक विधायक के तौर पर आया हूँ।' देगंगा के विधायक अनीसुर रहमान ने कहा कि उनके क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा पिछड़ा है और समग्र विकास के लिए राज्य सरकार का सहयोग आवश्यक है।

भाजपा और सरकार का पक्ष

भाजपा सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के आदेश पर काकोली सहित तृणमूल के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। गौरतलब है कि सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा। भाजपा के अनुसार, इसमें कोई राजनीतिक अभिप्राय नहीं है।

काकोली की नाराज़गी की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब काकोली को तृणमूल संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाकर यह ज़िम्मेदारी सांसद कल्याण बनर्जी को सौंपी गई थी। इसके बाद काकोली ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि 'उन्हें मैं काफी समय से जानती हूँ, और 1984 में उनके साथ अपना सफर शुरू किया था। आज, चार दशकों की वफादारी का मुझे यह इनाम मिला है।' इसके बाद उन्होंने बारासात संगठनात्मक जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया।

राजनीतिक निहितार्थ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा की बैठक में तृणमूल सांसद की उपस्थिति पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनाव में सत्ता गँवाने के बाद आंतरिक असंतोष से जूझ रही है। काकोली के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विपक्षी सांसद का सत्तारूढ़ दल की बैठक में उपस्थित होना राजनीतिक संभावनाओं को खुला छोड़ता है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल के भीतर यह पहली बड़ी दरार नहीं होगी, लेकिन एक वरिष्ठ सांसद का यह कदम दल के लिए चेतावनी की घंटी ज़रूर है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काकोली घोष दस्तीदार ने सुवेंदु अधिकारी की बैठक में क्यों हिस्सा लिया?
भाजपा सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के आदेश पर विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रशासनिक बैठक में बुलाया गया था। सरकार बनाने के बाद अधिकारी ने यह नीति घोषित की थी, हालाँकि काकोली की मौजूदगी तृणमूल से उनकी नाराज़गी के संदर्भ में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
काकोली घोष दस्तीदार तृणमूल से नाराज़ क्यों हैं?
काकोली को तृणमूल संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाकर यह ज़िम्मेदारी सांसद कल्याण बनर्जी को दी गई थी। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर 'चार दशकों की वफादारी' का हवाला देते हुए नाराज़गी जताई और बारासात जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
कल्याणी बैठक में और कौन-कौन से तृणमूल विधायक शामिल थे?
बैठक में तृणमूल के तीन नवनिर्वाचित विधायक — देगंगा से अनीसुर रहमान बिदेश, स्वरूपनगर से बीना मंडल और हारोआ से अब्दुल मतीन — भी उपस्थित थे। तीनों ने कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए बैठक में आए थे।
क्या काकोली घोष दस्तीदार तृणमूल कांग्रेस छोड़ सकती हैं?
अभी तक काकोली ने तृणमूल छोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालाँकि, मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने, सोशल मीडिया पर नाराज़गी, जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफे और अब भाजपा मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल होने के कारण राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हैं।
यह बैठक कहाँ और किस उद्देश्य से आयोजित हुई थी?
यह प्रशासनिक बैठक नदिया जिले के कल्याणी स्थित एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में हुई। इसमें उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे और इसका उद्देश्य इन जिलों के विकास कार्यों की समीक्षा करना था।
राष्ट्र प्रेस
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